कृषि स्टार्टअप के जरिए आइडिया से संपदा सृजन तक का दिया मंत्र

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के आरम्भ, एग्री-बिजनेस इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेंटर द्वारा आईसीएआर-नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल...

Oct 5, 2026 - 16:31
Oct 5, 2026 - 16:35
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कृषि स्टार्टअप के जरिए आइडिया से संपदा सृजन तक का दिया मंत्र

बांदा कृषि विश्वविद्यालय में एग्री स्टार्टअप इकोसिस्टम पर ओरिएंटेशन कार्यशाला, 250 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

बांदा। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय के आरम्भ, एग्री-बिजनेस इनोवेशन एवं इन्क्यूबेशन सेंटर द्वारा आईसीएआर-नेशनल एकेडमी ऑफ एग्रीकल्चरल रिसर्च मैनेजमेंट (नार्म), हैदराबाद के प्रौद्योगिकी व्यवसाय इनक्यूबेटर ए-आइडिया के सहयोग से ‘एग्री स्टार्टअप इकोसिस्टम: आइडिया से संपदा सृजन तक’ विषय पर ओरिएंटेशन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों को कृषि क्षेत्र में नवाचार, उद्यमिता, स्टार्टअप इकोसिस्टम तथा विचारों को व्यावसायिक उद्यम में बदलने के अवसरों से परिचित कराना रहा।

कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय गीत के साथ हुआ। इसके बाद दीप प्रज्ज्वलन कर अतिथियों का पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत किया गया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो. एस.के. सिंह ने प्रधान वैज्ञानिक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ए-आइडिया, नार्म, हैदराबाद डॉ. रंजीत कुमार का स्वागत किया। वहीं आरम्भ के प्रधान अन्वेषक प्रो. ए.के. श्रीवास्तव ने पूर्व सहायक महानिदेशक एवं पूर्व मुख्य कार्यकारी अधिकारी, ए-आइडिया डॉ. के. श्रीनिवास का स्वागत किया।

बुंदेलखंड के युवाओं को मिलेगा स्टार्टअप के लिए सहयोग

प्रो. ए.के. श्रीवास्तव ने स्वागत उद्बोधन में आरम्भ के उद्देश्यों तथा विश्वविद्यालय में कृषि आधारित नवाचार, उद्यमिता और स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए की जा रही गतिविधियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में स्थापित इन्क्यूबेशन सेंटर बुंदेलखंड के युवा उद्यमियों को नवाचार आधारित स्टार्टअप स्थापित करने में हर स्तर पर सहयोग प्रदान करेगा। कार्यशालाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को अपने विचारों की पहचान, विकास और उन्हें व्यावसायिक अवसर में बदलने के लिए आवश्यक मार्गदर्शन दिया जा रहा है।

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कृषि क्षेत्र में उद्यमिता की अपार संभावनाएं

मुख्य वक्ता डॉ. रंजीत कुमार ने कहा कि देश में 60 प्रतिशत से अधिक कृषि आधारित स्टार्टअप ऐसे लोगों द्वारा स्थापित किए गए हैं, जिनकी पृष्ठभूमि कृषि क्षेत्र से नहीं है। उन्होंने कहा कि कृषि विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों में भी उद्यमिता की अपार संभावनाएं हैं। इस प्रकार की कार्यशालाएं विद्यार्थियों में उद्यमी बनने के लिए आवश्यक कौशल और दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक हैं।

उन्होंने बताया कि भारत सरकार द्वारा स्टार्टअप को बढ़ावा देने के लिए बड़े स्तर पर निवेश किया जा रहा है, जिससे देश का स्टार्टअप इकोसिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है। उन्होंने कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में रोजगार सृजन और उद्यमिता की संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला।

समस्या की पहचान से समाधान और व्यवसाय तक

डॉ. के. श्रीनिवास ने विद्यार्थियों को विचार सृजन की प्रक्रिया से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि युवाओं को केवल रोजगार प्राप्त करने की मानसिकता तक सीमित न रहकर उद्यमी दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए। उन्होंने समस्या की पहचान से लेकर उसके समाधान के लिए नए विचार के विकास और उसे व्यावसायिक अवसर में परिवर्तित करने की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया।

कुलसचिव प्रो. एस.के. सिंह ने इन्क्यूबेशन सेंटर की स्थापना से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों में प्रतिभा और नए विचारों की कमी नहीं है। आरम्भ उन्हें अपने विचारों को वास्तविक उद्यम में बदलने के लिए आवश्यक मंच और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहा है।

250 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा

कार्यशाला के पहले दिन विद्यार्थियों को स्टार्टअप की अवधारणा, विचार सृजन, नवाचार, उद्यमिता, इन्क्यूबेशन प्रक्रिया तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में व्यवसाय की संभावनाओं की जानकारी दी गई। विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को समस्याओं और विचारों को अवसर में बदलने तथा कृषि क्षेत्र में नए उद्यम स्थापित करने के लिए प्रेरित किया। कार्यशाला में विभिन्न महाविद्यालयों के 250 से अधिक स्नातक छात्र-छात्राओं ने प्रतिभाग किया।

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उद्घाटन सत्र में प्रो. नरेंद्र सिंह, प्रो. जी.एस. पंवार, प्रो. मुकुल कुमार, प्रो. एस.वी. द्विवेदी, डॉ. वंदना कुमारी, डॉ. शैलेन्द्र कुमार चौरसिया, डॉ. आशीष दीक्षित सहित विश्वविद्यालय के अन्य शिक्षक एवं अधिकारी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंत में डॉ. हर्षद माण्डगे ने धन्यवाद ज्ञापित किया। तकनीकी सत्रों का समन्वय डॉ. पुष्पा एवं डॉ. धीरज मिश्रा ने किया। मंच संचालन डॉ. हंसमीत कौर ने किया, जबकि डॉ. योगेश सुमथाने और डॉ. प्रतीक शुक्ला ने आयोजन संबंधी व्यवस्थाओं में सहयोग प्रदान किया।

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