बांदा में गैंगस्टर एक्ट के 12 साल पुराने मामले में अदालत का फैसला
करीब 12 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में बांदा की विशेष गैंगस्टर अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषसिद्ध कर...
हत्या में आजीवन कारावास पा चुके तीन अभियुक्त गैंगस्टर एक्ट में भी दोषसिद्ध
रामबहादुर उर्फ दाऊ, कल्लू और बलराम उर्फ बल्लू को 4-4 वर्ष का कठोर कारावास, 6-6 हजार रुपये अर्थदंड
बांदा। करीब 12 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में बांदा की विशेष गैंगस्टर अदालत ने तीन अभियुक्तों को दोषसिद्ध कर 4-4 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने प्रत्येक अभियुक्त पर 6-6 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। अर्थदंड जमा न करने पर प्रत्येक को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।
विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीपाल सिंह ने विशेष सत्र परीक्षण संख्या 18/2015 में 8 अक्टूबर 2026 को यह फैसला सुनाया। दोषसिद्ध अभियुक्तों में रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह पुत्र चुन्नू सिंह निवासी कनवारा, कल्लू सिंह पुत्र बृजेश सिंह निवासी झील का पुरवा तथा बलराम उर्फ बल्लू पुत्र चुन्नू सिंह निवासी कनवारा, थाना कोतवाली नगर, बांदा शामिल हैं।
धारा 3 गैंगस्टर एक्ट में दोषसिद्ध
मामला थाना कोतवाली नगर के मु0अ0सं0 653/2014 से संबंधित है। अभियोजन के अनुसार तीनों अभियुक्त संगठित गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों में लिप्त थे तथा अपने और गिरोह के सदस्यों के आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए अपराध करते थे। अभियोजन पक्ष ने आरोपों के समर्थन में गैंगचार्ट, आपराधिक इतिहास, आधारभूत मुकदमों के अभिलेख, एफआईआर, जीडी, आरोपपत्र और अभियोजन स्वीकृति समेत अन्य दस्तावेज न्यायालय में प्रस्तुत किए।
न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के परीक्षण के बाद तीनों के विरुद्ध उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 3 के तहत अपराध सिद्ध माना।
हत्या समेत कई गंभीर मामलों का उल्लेख
अभियोजन के अनुसार अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास में हत्या, हत्या के प्रयास, लूट/वसूली, मारपीट, गंभीर चोट, बलवा, धमकी, शस्त्र अधिनियम, गुंडा एक्ट और गैंगस्टर एक्ट समेत विभिन्न धाराओं में मुकदमों का उल्लेख गैंगचार्ट में किया गया था। अभियोजन ने यह भी बताया कि हत्या के एक मामले में अभियुक्तों को आजीवन कारावास की सजा हो चुकी है।
गैंगचार्ट में मु0अ0सं0 182/2014 में धारा 386, 342, 353, 332, 323, 504, 394 आईपीसी व धारा 7 सीएल एक्ट तथा मु0अ0सं0 183/2014 में धारा 25 आयुध अधिनियम समेत अन्य मुकदमों का उल्लेख किया गया।
एक आरोपी की मृत्यु के बाद कार्यवाही समाप्त
मामले में प्रारंभ में चार अभियुक्तों का उल्लेख था। इनमें सुशील सिंह की विचारण के दौरान मृत्यु हो गई। न्यायालय में फौती आख्या और संबंधित अभिलेख प्रस्तुत किए जाने के बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही समाप्त कर दी गई। इसके बाद रामबहादुर सिंह उर्फ दाऊ सिंह, कल्लू सिंह और बलराम उर्फ बल्लू के खिलाफ मुकदमे की सुनवाई जारी रही।
विशेष लोक अभियोजक ने की प्रभावी पैरवी
राज्य की ओर से विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने गैंगचार्ट, आपराधिक इतिहास और अन्य दस्तावेजी एवं मौखिक साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्तों के खिलाफ अपना पक्ष रखा। बचाव पक्ष ने अभियुक्तों को निर्दोष बताते हुए अभियोजन के साक्ष्यों और गैंगचार्ट की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए।
अदालत के फैसले के बाद तीनों दोषसिद्ध अभियुक्तों के सजायावी वारंट तैयार कर उन्हें न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार, बांदा भेजने के निर्देश दिए गए। न्यायालय ने पूर्व में बिताई गई अभिरक्षा की अवधि को विधि के अनुसार सजा में समायोजित करने का आदेश भी दिया।
#OperationConviction के तहत कार्रवाई
पुलिस के अनुसार पुलिस महानिदेशक उत्तर प्रदेश के निर्देशन में चलाए जा रहे #OperationConviction अभियान के तहत थाना कोतवाली नगर में दर्ज मु0अ0सं0 653/14, धारा 2/3 गैंगस्टर एक्ट में प्रभावी विवेचना एवं पैरवी के परिणामस्वरूप 8 अक्टूबर 2026 को न्यायालय ने तीनों अभियुक्तों को 4-4 वर्ष के कठोर कारावास और 6-6 हजार रुपये जुर्माने से दंडित किया। अभियोजन की पैरवी में पैरोकार अभिलाष यादव तथा कोर्ट मुहर्रिर रघुनाथ मौर्य और अमित कुमार का भी सहयोग रहा।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
