क्या 2026 का अंत लेकर आएगा मौसम की नई चुनौती? अल नीनो पर WMO का अलर्ट

दुनिया भर में मौसम के बदलते मिजाज के बीच अल नीनो को लेकर चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है...

Oct 10, 2026 - 12:58
Oct 10, 2026 - 13:09
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क्या 2026 का अंत लेकर आएगा मौसम की नई चुनौती? अल नीनो पर WMO का अलर्ट
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संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम संगठन की चेतावनी, कई क्षेत्रों में भीषण गर्मी, सूखे और बाढ़ का जोखिम बढ़ने की आशंका

दुनिया भर में मौसम के बदलते मिजाज के बीच अल नीनो को लेकर चिंता बढ़ गई है। संयुक्त राष्ट्र के विश्व मौसम संगठन (WMO) ने चेतावनी दी है कि वर्ष 2026 के अंत तक अल नीनो और अधिक मजबूत हो सकता है तथा दिसंबर में इसके चरम पर पहुंचने का अनुमान है। इसके प्रभाव से दुनिया के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान और बारिश के पारंपरिक पैटर्न में बदलाव देखने को मिल सकता है। इससे कुछ क्षेत्रों में सूखे और अन्य क्षेत्रों में भारी बारिश एवं बाढ़ का जोखिम बढ़ने की आशंका है।

विश्व मौसम संगठन की 8 अक्टूबर 2026 को जारी मौसमी जलवायु अपडेट के अनुसार, अक्टूबर से दिसंबर के दौरान भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ सकता है। पूर्वानुमान के मुताबिक, दिसंबर के आसपास तापमान में यह वृद्धि अपने उच्चतम स्तर पर पहुंच सकती है। 

क्या है अल नीनो और क्यों बढ़ती है चिंता?

अल नीनो प्रशांत महासागर के उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में समुद्र की सतह के तापमान के सामान्य से अधिक गर्म होने से जुड़ी जलवायु घटना है। इसका प्रभाव वायुमंडलीय परिसंचरण, तापमान और वर्षा के पैटर्न पर पड़ता है। इसके चलते दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों में मौसम की परिस्थितियां बदल सकती हैं।

इसका प्रभाव हर देश और क्षेत्र में एक जैसा नहीं होता। कहीं सामान्य से कम बारिश होने की आशंका रहती है, तो कहीं अत्यधिक वर्षा और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। कई क्षेत्रों में तापमान भी सामान्य से अधिक रह सकता है।

भारत में भी मौसम पर पड़ सकता है असर

अल नीनो का प्रभाव भारतीय मानसून सहित विभिन्न मौसमी प्रणालियों पर पड़ सकता है। हालांकि, भारत में बारिश की वास्तविक स्थिति कई अन्य जलवायु कारकों पर भी निर्भर करती है। इसलिए केवल अल नीनो के आधार पर किसी विशेष राज्य या जिले में सूखे, बाढ़ अथवा भीषण गर्मी की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।

विश्व मौसम संगठन के अनुसार, मौजूदा अल नीनो का प्रभाव वर्ष 2027 तक जारी रह सकता है। ऐसे में मौसम संबंधी पूर्वानुमानों और स्थानीय मौसम विभाग की चेतावनियों पर नजर रखना महत्वपूर्ण होगा।

समय रहते तैयारी जरूरी

मौसम में संभावित बदलाव को देखते हुए कृषि, जल प्रबंधन, स्वास्थ्य और आपदा प्रबंधन से जुड़े विभागों के लिए समय रहते तैयारी करना अहम है। किसानों को फसलों और सिंचाई संबंधी निर्णयों में स्थानीय कृषि एवं मौसम सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए। वहीं, प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के लिए मौसम की निगरानी तथा समय पर चेतावनी जारी करना महत्वपूर्ण रहेगा।

अल नीनो का मजबूत होना दुनिया के कई हिस्सों में मौसम संबंधी चुनौतियां बढ़ा सकता है, लेकिन इसके वास्तविक प्रभाव क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होंगे। इसलिए वैज्ञानिक पूर्वानुमानों और आधिकारिक चेतावनियों के आधार पर ही स्थिति का आकलन करना जरूरी है।

Source : News 18 हिंदी
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