डॉ. एन.के. बाजपेयी सहित बांदा, महोबा और झांसी के कृषि विज्ञान केंद्र सम्मानित
बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. एन.के. बाजपेयी को कृषि प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद...
UPCAR के 37वें स्थापना दिवस पर कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रदान किया सम्मान; कृषि प्रसार, किसान प्रशिक्षण और नवीन तकनीकों के हस्तांतरण में उत्कृष्ट कार्यों को मिली पहचान
बांदा। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक प्रसार डॉ. एन.के. बाजपेयी को कृषि प्रसार के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद (उपकार), लखनऊ की ओर से सम्मानित किया गया। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्रों बांदा, महोबा और झांसी को भी कृषि प्रसार, कृषक प्रशिक्षण, नवीन कृषि तकनीकों के प्रचार-प्रसार और किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में उल्लेखनीय कार्यों के लिए सम्मान मिला है।
यह सम्मान उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के 37वें स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित समारोह में प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रदान किया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता, उपकार के अध्यक्ष कैप्टन विकास गुप्ता, उपकार के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कानपुर के कुलपति डॉ. संजीव गुप्ता सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।
डॉ. एन.के. बाजपेयी को यह सम्मान किसानों तक नवीन कृषि तकनीकों को पहुंचाने, कृषि अनुसंधान के परिणामों का खेतों तक हस्तांतरण करने और कृषि प्रसार गतिविधियों को प्रभावी बनाने में उनके योगदान के लिए दिया गया। उनके नेतृत्व में विश्वविद्यालय के प्रसार निदेशालय के अंतर्गत सात जिलों में सात कृषि विज्ञान केंद्र कार्यरत हैं, जो किसानों को क्षेत्रानुकूल तकनीकों की जानकारी देने, प्रशिक्षण आयोजित करने और खेती में नवाचार को प्रोत्साहित करने का कार्य कर रहे हैं।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस.वी.एस. राजू ने डॉ. बाजपेयी को बधाई देते हुए कहा कि किसी भी संस्थान की प्रगति उसके नेतृत्व, कार्यक्षमता और दूरदर्शिता पर निर्भर करती है। डॉ. बाजपेयी के नेतृत्व में कृषि विज्ञान केंद्र अपने-अपने जिलों में किसानों के हित में प्रभावी कार्य कर रहे हैं। इसी का परिणाम है कि विश्वविद्यालय के अधीन केंद्रों को राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिल रही है।
कुलपति ने कृषि विज्ञान केंद्र बांदा के केंद्राध्यक्ष डॉ. श्याम सिंह, झांसी के केंद्राध्यक्ष डॉ. निशी राय तथा महोबा के प्रभारी डॉ. रजनीश चंद्र मिश्रा सहित सभी वैज्ञानिकों और कर्मचारियों को भी बधाई दी। उन्होंने कहा कि बुंदेलखंड क्षेत्र के कृषि विज्ञान केंद्रों ने सीमित संसाधनों के बावजूद उल्लेखनीय कार्य किए हैं। ये केंद्र वर्ष 2017 से बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के अधीन कार्य कर रहे हैं और कम समय में हासिल की गई उपलब्धियां सराहनीय हैं।
डॉ. बाजपेयी ने बताया कि विश्वविद्यालय के अधीन संचालित कृषि विज्ञान केंद्रों में क्षेत्र की जरूरतों के अनुरूप विभिन्न कृषि तकनीकों का प्रदर्शन और प्रशिक्षण दिया जा रहा है। किसानों को गौ-आधारित प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और परंपरागत खेती की तकनीकों से परिचित कराने के लिए एक-एक एकड़ के मॉडल स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही एकीकृत फसल प्रणाली, बागवानी, बीज उत्पादन, गाय एवं बकरी पालन, कुक्कुट पालन, वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप, मधुमक्खी पालन और मशरूम उत्पादन जैसी गतिविधियां भी संचालित की जा रही हैं।
कृषि विज्ञान केंद्रों की ओर से किसानों के खेतों पर प्रदर्शन आयोजित करने के साथ ग्रामीण युवाओं और कृषि विस्तार कर्मियों को भी कृषि एवं उससे जुड़ी तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है। इन प्रयासों का उद्देश्य किसानों को वैज्ञानिक खेती के प्रति जागरूक करना, उत्पादन प्रणालियों को बेहतर बनाना और उनकी आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध कराना है।
डॉ. एन.के. बाजपेयी और तीन कृषि विज्ञान केंद्रों को मिला यह सम्मान बुंदेलखंड में कृषि अनुसंधान, तकनीकी हस्तांतरण और किसान-केंद्रित प्रसार गतिविधियों को मिली महत्वपूर्ण पहचान के रूप में देखा जा रहा है।
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