79वें निरंकारी संत समागम में गूंजा प्रेम और मानवता का संदेश

हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रेम में स्थिर रहना ही सच्ची आध्यात्मिक जागृति है। यह संदेश निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज...

Oct 28, 2026 - 18:31
Oct 28, 2026 - 18:59
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79वें निरंकारी संत समागम में गूंजा प्रेम और मानवता का संदेश

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा—हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रेम में स्थिर रहना ही सच्ची जागृति; लाखों श्रद्धालुओं ने लिया सत्संग का लाभ

समालखा/चित्रकूट। हर परिस्थिति में परमात्मा के प्रेम में स्थिर रहना ही सच्ची आध्यात्मिक जागृति है। यह संदेश निरंकारी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम के तीसरे दिन अपने प्रेरणादायी प्रवचनों के माध्यम से दिया। हरियाणा के समालखा में आयोजित समागम में देश-विदेश से पहुंचे लाखों श्रद्धालुओं की उपस्थिति में प्रेम, श्रद्धा, एकत्व और विश्वबंधुत्व का संदेश गूंजा।

सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने कहा कि आत्मा का परमात्मा से मिलन और प्रत्येक पल निराकार प्रभु का अनुभव करना ही आध्यात्मिक जीवन का सार है। परमात्मा अटल सत्य है, जबकि मनुष्य की इच्छाएं और परिस्थितियां बदलती रहती हैं। अनुकूल परिस्थितियों में आस्था बनाए रखना आसान होता है, लेकिन सच्ची भक्ति वही है जो हर परिस्थिति में अडिग रहे।

उन्होंने कहा कि ब्रह्मज्ञान से प्राप्त जागृति व्यक्ति को जीवनभर सजग और सचेत रहने की प्रेरणा देती है। यह जागृति केवल विचारों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि व्यवहार, निर्णयों और सामाजिक जीवन में भी दिखाई देनी चाहिए। अन्याय के विरुद्ध खड़े होते समय व्यक्ति को अपने उद्देश्य पर विचार करना चाहिए कि उसका प्रयास वास्तव में भलाई के लिए है या उसमें अहंकार, स्वार्थ और दिखावे की भावना शामिल है। विचारों में भिन्नता होने के बावजूद प्रत्येक व्यक्ति में परमात्मा का अंश देखकर उसे अपनाना ही निष्काम प्रेम की सच्ची पहचान है।

सतगुरु माता जी के प्रवचनों से पहले निरंकारी राजपिता रमित जी ने भी आध्यात्मिक जागरूकता का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि जहां परिवर्तन संभव हो, वहां सकारात्मक प्रयास किए जाने चाहिए और जहां परिस्थितियों को बदलना संभव न हो, वहां उन्हें सहजता से स्वीकार करने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मनुष्य अक्सर भौतिक आवश्यकताओं और सुख-सुविधाओं के प्रति सजग रहता है, लेकिन अपनी आत्मा की वास्तविक प्यास को अनदेखा कर देता है। परमात्मा के प्रेम और उसकी सर्वव्यापकता को पहचानना, अहंकार का त्याग करना तथा श्रद्धा और समर्पण के साथ जीवन जीना ही वास्तविक आध्यात्मिक जागृति है।

समागम के अवसर पर हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सतगुरु का आशीर्वाद प्राप्त किया। इसके अलावा कई पार्षदों और विधायकों ने भी सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज एवं निरंकारी राजपिता रमित जी के दर्शन कर आशीर्वाद लिया।

दिव्यांग श्रद्धालुओं के लिए विशेष व्यवस्थाएं

समागम में दिव्यांग संत-महात्माओं की सुविधा का विशेष ध्यान रखा गया। सभी प्रवेश द्वारों पर व्हीलचेयर की व्यवस्था की गई, ताकि उन्हें समारोह स्थल तक पहुंचने में परेशानी न हो। उनके ठहरने, भोजन और पेयजल की सुविधाओं के साथ कार्यक्रम देखने के लिए एलईडी स्क्रीन भी लगाई गईं। इन व्यवस्थाओं के माध्यम से दिव्यांग श्रद्धालुओं की सहज भागीदारी सुनिश्चित करने का प्रयास किया गया।

स्वास्थ्य सेवाओं के लिए व्यापक इंतजाम

समागम परिसर में मिशन के स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की ओर से व्यापक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। आयोजन के लिए आठ एलोपैथिक और छह होम्योपैथिक डिस्पेंसरी, 15 प्राथमिक चिकित्सा केंद्र तथा एक कायरोप्रैक्टिक शिविर स्थापित किया गया। इसके अलावा 15 आईसीयू सुविधाओं सहित 120 बिस्तरों वाला अस्थायी अस्पताल बनाया गया।

आपातकालीन सेवाओं के लिए मिशन की 12 और हरियाणा सरकार की 30 एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, जिनमें 15 वेंटिलेटरयुक्त एंबुलेंस शामिल थीं। कायरोप्रैक्टिक शिविर में भारत और विदेशों से आए विशेषज्ञ चिकित्सकों ने सेवाएं दीं। इसके साथ ही ईएनटी, नेत्र, बाल रोग, दंत चिकित्सा और मनोरोग सहित विभिन्न क्षेत्रों के वरिष्ठ चिकित्सकों की टीम ने श्रद्धालुओं को स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराईं।

लंगर में दिखी सेवा और समानता की भावना

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए समागम परिसर में चार स्थानों पर सामुदायिक लंगर की व्यवस्था की गई, जहां दिन-रात भोजन उपलब्ध कराया गया। सभी श्रद्धालुओं को एक साथ बैठकर लंगर ग्रहण करते देख सेवा, समानता और ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की भावना दिखाई दी। इसके अतिरिक्त परिसर में 22 कैंटीनों के माध्यम से रियायती दरों पर अल्पाहार, चाय, कॉफी और मिनरल वाटर उपलब्ध कराया गया।

79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम में आध्यात्मिक प्रवचनों के साथ सेवा, सहयोग और मानवीय संवेदनाओं पर विशेष जोर दिखाई दिया। सतगुरु माता सुदीक्षा जी महाराज और निरंकारी राजपिता रमित जी के संदेशों ने श्रद्धालुओं को प्रेम, विनम्रता, आत्मचिंतन और मानवता के मार्ग पर चलने की प्रेरणा दी।

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