कमल पब्लिक स्कूल में गूंजी हनुमान चालीसा की पावन ऋचाएं, 11 करोड़ महानुष्ठान अभियान से जुड़े विद्यार्थी

युवा शक्ति में आध्यात्मिक चेतना, आत्मबल, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के संस्कारों का संचार करने के पावन उद्देश्य से पूज्यपाद जगद्गुरु रामानंदाचार्य...

Oct 28, 2026 - 18:06
Oct 28, 2026 - 18:07
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कमल पब्लिक स्कूल में गूंजी हनुमान चालीसा की पावन ऋचाएं, 11 करोड़ महानुष्ठान अभियान से जुड़े विद्यार्थी

जगद्गुरु श्री रामभद्राचार्य जी महाराज के पावन संकल्प को गति दे रहा है 'रामानन्द मिशन'

विद्यालय के निदेशक वेद टण्डन जी ने किया आचार्य रामचन्द्र दास जी महाराज का आत्मीय स्वागत

छात्रा मरियम को कंठस्थ है संपूर्ण हनुमान चालीसा, कहा, "सभी को नित्य करना चाहिए पाठ"

छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक किया सामूहिक पाठ, अध्यात्म, तर्क और जीवन-मूल्यों पर महाराज जी से किया सीधा संवाद

चित्रकूट/नई दिल्ली। युवा शक्ति में आध्यात्मिक चेतना, आत्मबल, अनुशासन और राष्ट्रसेवा के संस्कारों का संचार करने के पावन उद्देश्य से पूज्यपाद जगद्गुरु रामानंदाचार्य श्री रामभद्राचार्य जी महाराज द्वारा प्रेरित '11 करोड़ श्रीहनुमान चालीसा पाठानुष्ठान महाभियान' के अंतर्गत आज राजधानी के प्रतिष्ठित कमल पब्लिक स्कूल, मोहन गार्डन में एक भव्य एवं प्रेरणादायी कार्यक्रम का आयोजन संपन्न हुआ।

इस अवसर पर विद्यालय प्रांगण में आचार्य रामचन्द्र दास जी महाराज का शुभागमन हुआ। विद्यालय के निदेशक वेद टण्डन जी ने महाराज जी का पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर भावभीना व आत्मीय स्वागत किया।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण सामूहिक श्रीहनुमान चालीसा पाठ रहा, जिसमें विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों एवं प्रबंध समिति के सदस्यों ने 11 बार एक स्वर में सहभागिता की। संपूर्ण परिसर 'जय श्रीराम' और 'जय बजरंगबली' के पावन जयघोष से गुंजायमान हो उठा।

विद्यार्थियों की अद्भुत प्रतिभा और प्रेरक सहभागिता

कार्यक्रम में उस समय सब भावविभोर हो गए जब विद्यालय की छात्रा मरियम ने संपूर्ण हनुमान चालीसा कंठस्थ सुनाकर अपनी गहरी निष्ठा व्यक्त की। मरियम ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि हनुमान चालीसा मन को असीम शांति व शक्ति देती है और इसका पाठ सभी को प्रतिदिन करना चाहिए। वहीं छात्र सिद्धांत सिंह ने कहा कि उन्हें हनुमान जी के पावन चरित्र से यह सबसे बड़ी सीख मिलती है कि "जो हम मन में ठान लेते हैं, उसे करके दिखाना चाहिए", अर्थात् अटूट संकल्प ही सफलता की कुंजी है।
जिज्ञासु संवाद: युवाओं के प्रश्न और महाराज जी का मार्गदर्शन

सामूहिक पाठ के उपरांत आयोजित विशेष संवाद सत्र में विद्यार्थियों ने अत्यंत उत्साह एवं बौद्धिक प्रखरता के साथ आचार्य रामचन्द्र दास जी महाराज के सम्मुख अपनी जिज्ञासाएं रखीं:

कक्षा 9वीं (अ) के छात्र वंश ने पूछा: “हनुमान चालीसा की रचना कैसे हुई और इसकी पृष्ठभूमि क्या थी?”

समाधान: आचार्य श्री ने बताया कि मध्यकाल में जब समाज आक्रांताओं के संकट और सांस्कृतिक संक्रमण से जूझ रहा था, तब गोस्वामी तुलसीदास जी ने अपनी अनन्य भक्ति और साधना के बल पर जन-जन के संकट निवारण हेतु इस सर्वकालिक स्तोत्र की रचना की थी।

कक्षा 12वीं की छात्रा आर्या भारद्वाज ने समसामयिक प्रश्न किया: “आज का युवा तर्क (Logic) एवं श्रद्धा (Faith) के बीच किस प्रकार संतुलन बनाए रखे?”

समाधान: महाराज जी ने अत्यंत सहज भाव से समझाया कि तर्क और श्रद्धा एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि पूरक हैं। तर्क जहाँ हमारी बुद्धि को प्रखर और अंधविश्वास से मुक्त बनाता है वहीं श्रद्धा हमारे हृदय को संबल, विनम्रता और सकारात्मक ऊर्जा देती है। श्रद्धा विहीन तर्क शुष्क हो जाता है और तर्क विहीन श्रद्धा अंधविश्वास। हनुमान चालीसा बुद्धि और विवेक दोनों को जागृत करती है।

इस संवाद सत्र में छात्रा तविक्षा सहित अन्य विद्यार्थियों ने भी अत्यंत उत्साहपूर्वक अपनी भागीदारी दर्ज कराई।

संस्कारित युवा ही समर्थ भारत की नींव: विद्यालय के निदेशक श्री वेद टण्डन जी ने रामानन्द मिशन के इस राष्ट्रव्यापी अभियान की मुक्तकंठ से सराहना करते हुए कहा कि आज की पीढ़ी को तकनीक के साथ-साथ नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने पूज्य जगद्गुरु जी के 11 करोड़ हनुमान चालीसा के संकल्प को युवाओं के सर्वांगीण विकास का महायज्ञ बताया।

उल्लेखनीय है कि रामानन्द मिशन द्वारा 12 अक्टूबर 2026 से दिल्ली-एनसीआर के विभिन्न विद्यालयों व शिक्षण संस्थानों में यह जनजागरण अभियान निरंतर चलाया जा रहा है। कार्यक्रम के अंत में सभी विद्यार्थियों व शिक्षकों ने नित्य हनुमान चालीसा का पाठ करने, पर्यावरण संरक्षण करने, अपने अभिभावकों का आदर करने, देश से प्रेम करने तथा इस राष्ट्रीय अभियान में अपनी आहुति देने का संकल्प लिया।

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