सोलर हैंडलूम के तहत 300 महिलाओं को स्वरोजगार देने की योजना

सोलर हैंडलूम के तहत 300 महिलाओं को स्वरोजगार देने की योजना
Solar Handloom

जनपद में आए प्रवासी कामगारों को प्रधानमंत्री गरीब रोजगार कल्याण योजना अंतर्गत प्रशिक्षित करते हुए स्वरोजगार हेतु प्रेरित करने के लिए जिलाधिकारी अमित सिंह बंसल के निर्देशन में उत्तर प्रदेश राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन जनपद इकाई बांदा और विनोबा भावे ग्रामोद्योग संस्थान के कन्वर्जेंस द्वारा खादी वस्त्र निर्माण की प्रथम इकाई अंतर्गत एनआरएलएम गठित स्वयं सहायता समूह की 25 महिलाएं (जिसमें 11 प्रवासी कामगार महिलाएं हैं) के लिए महुआ की जखनी ग्राम सभा में तीस दिवसीय प्रशिक्षण सत्र का प्रारंभ किया गया।

6000 रू मासिक कमा सकती है महिलाएं

महुआ की जखनी ग्राम सभा में आयोजित 30 दिवसीय प्रशिक्षण सत्र में शिक्षण सत्र में महिलाओं को सोलर चरखा पर सूत काटने हेतु प्रशिक्षित किया जाएगा। पूर्व में सूत काटने का कार्य हाथ के चरखे से हुआ करता था। कुछ दिनों पूर्व सोलर चरखा का उपयोग करते हुए सूत कातने की विधा को खादी ग्राम उद्योग द्वारा प्रोत्साहित किया जा रहा है । एक महिला द्वारा प्रशिक्षण के उपरांत एक दिन में  120 ग्राम सूत कात लिया जाता है। जिसकी बाजार में कीमत 232 रूपये होती है। इस प्रकार किसी भी महिला द्वारा प्रशिक्षण के पश्चात प्रतिदिन औसतन 200 रू. की आमदनी करते हुए महीने में 6000 रू की अतिरिक्त आमदनी परिवार के अन्य कार्यों को करते हुए की जा सकती है!

यह भी पढ़ें : मिट्टी के कार्य में माप बढ़ाकर लिखने पर ग्राम पंचायत सचिव निलंबित

समूह ऋण भी मिल सकता है

सोलर चरखा पर प्रशिक्षण के उपरांत यदि दीदी द्वारा इच्छा व्यक्त की जाएगी तो उन्हें सोलर चरखा उपलब्ध करा दिया जाएगा और इसके लिए बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज भी खादी ग्राम उद्योग द्वारा उपलब्ध कराई जाएगी। सोलर चरखा और इसके साथ-साथ बैकवर्ड तथा फॉरवर्ड लिंकेज के लिए 30, 000 रू. दीदी को खादी ग्राम उद्योग द्वारा नामित संस्था (जो बैकवर्ड और फॉरवर्ड लिंकेज उपलब्ध कराएगी) के पास अमानत के रूप में जमा करना होता है! यह धनराशि यदि दीदी चाहे तो उन्हें समूह ऋण के रूप में उपलब्ध करवा देगा। उत्तर प्रदेश में एनआरएलएम और खादी ग्राम उद्योग बोर्ड के कन्वर्जेंस के साथ क्रियान्वित की जाने वाली यह सोलर चरखा पर एकमात्र इकाई है।

महिलाओं की मदद करेगा प्रशासन

जिलाधिकारी द्वारा अवगत कराया गया कि भविष्य में इस सूत का उपयोग करते हुए सोलर हैंडलूम की इकाई महिलाओं को प्रशिक्षित करते हुए खादी के वस्त्र बनाने हेतु पूरी इकाई की स्थापना जनपद बांदा में करने का प्रयास किया जा रहा है। सोलर चरखे का उपयोग कर सूत कातने और काते गए सूत का उपयोग करते हुए सोलर हैंडलूम पर खादी के वस्त्र के निर्माण से जनपद बांदा में योजना के अनुसार भविष्य में करीब 300 महिलाओं को स्वरोजगार दिया जा सकेगा।  जिलाधिकारी द्वारा महिलाओं को आश्वस्त किया गया कि उनकी प्रत्येक कठिनाई को जनपद प्रशासन दूर करेगा ।

यह भी पढ़ें : गिरफ्तार होने के बाद पुलिस को दिखाया रौब, कहा- ‘मैं विकास दुबे हूं कानपुर वाला’