‘विकसित भारत’ की नींव : बजट 2026 में बच्चों के लिए ₹1.32 लाख करोड़ का प्रावधान

बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों ने केंद्रीय बजट 2026 का स्वागत करते हुए इसे बच्चों के भविष्य के लिए एक सकारात्मक...

Feb 2, 2026 - 16:08
Feb 2, 2026 - 16:12
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‘विकसित भारत’ की नींव : बजट 2026 में बच्चों के लिए ₹1.32 लाख करोड़ का प्रावधान
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जेआरसी ने केंद्रीय बजट 2026 को बताया ‘उम्मीदों के मुताबिक’

नई दिल्ली। बाल संरक्षण और बाल अधिकारों के क्षेत्र में कार्यरत संगठनों ने केंद्रीय बजट 2026 का स्वागत करते हुए इसे बच्चों के भविष्य के लिए एक सकारात्मक और निर्णायक कदम बताया है। देशभर में बच्चों की सुरक्षा, शिक्षा और संरक्षण के लिए काम कर रहे 250 से अधिक नागरिक समाज संगठनों के सबसे बड़े नेटवर्क जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन (जेआरसी) ने बजट में बच्चों के लिए किए गए आवंटन को लंबे समय से प्रतीक्षित और उम्मीदों के अनुरूप करार दिया है।

बजट आंकड़ों के अनुसार, भारत में बच्चों के कल्याण के लिए कुल बजटीय आवंटन वित्त वर्ष 2025–26 के ₹1,16,133 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2026–27 में ₹1,32,297 करोड़ हो गया है। यह लगभग 14 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि है, जिसे बाल अधिकार संगठनों ने एक अहम उपलब्धि बताया है।

केंद्रीय बजट 2026 पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रेन के राष्ट्रीय संयोजक रवि कांत ने कहा कि यह बजट बाल अधिकारों और बच्चों की शिक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का स्पष्ट और सशक्त संदेश देता है। उन्होंने कहा कि एक दशक से अधिक समय में पहली बार कुल संघीय बजट में बच्चों के लिए आवंटन का अनुपात बढ़ा है, जो अपने आप में एक महत्वपूर्ण संकेत है।

रवि कांत ने कहा कि वित्त वर्ष 2026–27 में बच्चों के कल्याण के लिए बजट में 14 प्रतिशत की वृद्धि न केवल महत्वपूर्ण है, बल्कि समय की आवश्यकता भी है। कौशल विकास, एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय, जनजातीय कार्य, अल्पसंख्यक कल्याण और जल जीवन मिशन जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बढ़े हुए आवंटन से स्पष्ट है कि सरकार ने ‘विकसित भारत’ और बाल विवाह-मुक्त भारत के लक्ष्य की दिशा में ठोस नीतिगत कदम उठाए हैं।

उन्होंने आगे कहा कि बाल विवाह सामाजिक और आर्थिक असमानताओं की एक गंभीर समस्या है, जो कारण भी है और परिणाम भी। ऐसे में बालिकाओं की शिक्षा, कौशल विकास और आत्मनिर्भरता में निवेश करना इस चुनौती से निपटने का सबसे प्रभावी रास्ता है। उन्होंने चेताया कि बालिकाओं को सशक्त बनाए बिना वर्ष 2030 तक बाल विवाह के खात्मे की प्रतिबद्धता को पूरा करना कठिन होगा।

बाल अधिकार कार्यकर्ताओं का मानना है कि बजट 2026 में बच्चों के लिए बढ़ा हुआ आवंटन देश के सामाजिक विकास को नई दिशा देगा और कमजोर वर्गों के बच्चों के जीवन में वास्तविक बदलाव लाने में सहायक सिद्ध होगा।

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