लॉकडाउन और चुनाव उल्लंघन के मुकदमे क्यों हो रहे हैं खत्म? जानिए पूरा मामला...
प्रदेश के जनप्रतिनिधियों पर दर्ज छोटे आपराधिक मामलों को वापस लेने के प्रदेश सरकार के अनुरोध को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है...
लखनऊ। प्रदेश के जनप्रतिनिधियों पर दर्ज छोटे आपराधिक मामलों को वापस लेने के प्रदेश सरकार के अनुरोध को हाईकोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। हाईकोर्ट ने कुल 28 मामलों को वापस लेने की अनुमति प्रदान की है। ये सभी मुकदमे कोविड-19 लॉकडाउन के उल्लंघन, चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन तथा सरकारी अधिकारियों के आदेशों की अवज्ञा से संबंधित बताए गए हैं।
सरकारी पक्ष की दलीलों को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने कहा कि जिन मामलों को वापस लिया जा रहा है, वे गंभीर प्रकृति के नहीं हैं और सार्वजनिक हित को प्रभावित नहीं करते। इसके बाद इन मामलों को वापस लेने का रास्ता साफ हो गया है।
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिन प्रमुख जनप्रतिनिधियों के मुकदमे वापस होंगे, उनमें महोबा से उमा भारती, मुजफ्फरनगर से डॉ. संजीव बालियान, अलीगढ़ से ठाकुर जयवीर सिंह एवं सुरेश राणा, आजमगढ़ से नीलम सोनकर, उन्नाव से अनिल सिंह तथा शामली से अशरफ अली खान शामिल हैं।
इसके अलावा कानपुर से अभिजीत सिंह सांगा, जौनपुर से सीमा द्विवेदी, बुलंदशहर से विजेंद्र सिंह और मीनाक्षी सिंह, कुशीनगर से विवेकानंद पांडे, महाराजगंज से जय मंगल कनौजिया, मुजफ्फरनगर से राजपाल बालियान तथा हाथरस से प्रदीप चौधरी के मामलों को भी वापस लेने की अनुमति दी गई है।
सरकार का तर्क था कि ये मामले विशेष परिस्थितियों में दर्ज हुए थे और इनका कोई आपराधिक उद्देश्य नहीं था। हाईकोर्ट की अनुमति के बाद संबंधित जिलों में अब औपचारिक प्रक्रिया पूरी कर मुकदमे वापस लिए जाएंगे।
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