बुंदेलखंड में बाल विकास-जांच कार्यक्रम की शुरुआत

ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों के बच्चों में ऑटिज्म सहित विकास से जुड़ी चुनौतियों की समय रहते पहचान कर उन्हें उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के...

Feb 2, 2026 - 18:23
Feb 2, 2026 - 18:25
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बुंदेलखंड में बाल विकास-जांच कार्यक्रम की शुरुआत

ग्रामीण क्षेत्रों के बच्चों में ऑटिज्म व विकासात्मक चुनौतियों की होगी समय रहते पहचान

सृजन एक सोच व मॉम्स बिलीफ की पहल, पाँच हजार बच्चों की स्क्रीनिंग का लक्ष्य

राठ (हमीरपुर)। ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों के बच्चों में ऑटिज्म सहित विकास से जुड़ी चुनौतियों की समय रहते पहचान कर उन्हें उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से सृजन एक सोच एवं मॉम्स बिलीफ के संयुक्त तत्वावधान में बुंदेलखंड क्षेत्र में बाल विकास-जांच कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। इसी क्रम में एपेक्स मॉडर्न पब्लिक स्कूल परिसर में विशेष कार्यक्रम आयोजित कर बच्चों की विकासात्मक स्थिति का आकलन किया गया।

आयोजकों के अनुसार इस पहल के तहत बच्चों के शारीरिक, मानसिक, भावनात्मक एवं व्यवहारिक विकास से संबंधित समस्याओं की पहचान कर उन्हें आवश्यक परामर्श और विशेषज्ञ सेवाओं से जोड़ा जाएगा, जिससे भविष्य में गंभीर परेशानियों से बचाव किया जा सके। कार्यक्रम में डॉ. संतोष सिंह लोधी, डॉ. बृजेश राजपूत, अजेश राजपूत (निदेशक, एपेक्स मॉडर्न पब्लिक स्कूल) एवं डॉ. नितिन पात्रा सहित अन्य अतिथि उपस्थित रहे।

सृजन एक सोच के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रविंद्र गुप्ता ने बताया कि यह अभियान बुंदेलखंड में पाँच हजार बच्चों की विकास-जांच के लक्ष्य के साथ शुरू किया गया है। यह परियोजना सृजन एक सोच, मॉम्स बिलीफ और अपुर्व ट्रस्ट के सहयोग से संचालित की जा रही है, ताकि गांवों में रहने वाले बच्चों तक विशेषज्ञ सेवाएं पहुंचाई जा सकें।

डॉ. नितिन पात्रा ने बताया कि स्क्रीनिंग प्रक्रिया के दौरान बच्चों से 20 से 25 वैज्ञानिक व व्यवहारिक प्रश्न पूछे जाते हैं। इसके साथ ही माता-पिता या शिक्षक से लगभग 10 मिनट का संवाद कर बच्चे के विकासात्मक स्तर का समग्र मूल्यांकन किया जाता है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. संतोष सिंह लोधी ने कहा कि वर्तमान समय में बच्चों में विकास से जुड़ी समस्याएं बढ़ रही हैं, लेकिन यदि प्रारंभिक अवस्था में सही थेरेपी, परामर्श और मार्गदर्शन मिल जाए तो उनमें सकारात्मक सुधार संभव है। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक प्रभात सक्सेना तथा सलाहकार धर्मेंद्र घई की ओर से इस मॉडल को आगे चलकर राष्ट्रीय स्तर पर ग्रामीण व वंचित समुदायों तक पहुंचाने की योजना की जानकारी दी गई।

धर्मेंद्र घई ने कहा कि जब हर बच्चा खुलकर खिलता है, तभी मजबूत परिवार और सशक्त समाज का निर्माण होता है।

रिपोर्ट : अमित निगम, (राठ) हमीरपुर...

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