महर्षि वाल्मीकि जयंती विशेष....
महाकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की विरासत को संरक्षित करने और त्रेता युगीन परंपरा को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए...
रामायण के रचयिता की तपोभूमि को मिल रहा नया स्वरूप, पर्यटकों को मिलेंगी बेहतर सुविधाएं
डाकू से आदिकवि बनने तक का सफर...आत्मबोध और संकल्प की मिसाल हैं महर्षि वाल्मीकि
’रामायण की धरती पर आदिकवि की विरासत को सहेज रही योगी सरकार: मंत्री
चित्रकूट। महाकाव्य रामायण के रचयिता महर्षि वाल्मीकि की विरासत को संरक्षित करने और त्रेता युगीन परंपरा को विशिष्ट पहचान दिलाने के लिए प्रदेश सरकार प्रयासरत है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में धार्मिक सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण के साथ उनसे जुड़े पौराणिक स्थलों को पर्यटन की दृष्टि से विकसित किया जा रहा है। इसी क्रम में रामायण सर्किट और राम वनगमन पथ के तहत चित्रकूट में विकास कार्यों को गति दी जा रही है। पर्यटन विभाग का महर्षि वाल्मीकि से जुड़े धार्मिक स्थलों के कायाकल्प और श्रद्धालुओं के लिए बेहतर सुविधाएं जुटाने पर जोर है। विभिन्न परियोजनाओं पर करोड़ों रुपए खर्च कर योगी सरकार आदिकवि की विरासत सहेजने के साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी विस्तार दे रही है। महर्षि वाल्मीकि जयंती 26 अक्टूबर पर उनकी विरासत का संरक्षण ही उन्हें सच्ची श्रद्धांजलि है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने बताया कि उत्तर प्रदेश में रामायण से जुड़े अनेक धार्मिक स्थल हैं। प्रदेश सरकार रामायण सर्किट और राम वनगमन पथ के माध्यम से इन स्थलों के संरक्षण, विकास और पर्यटन सुविधाओं के विस्तार पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में महर्षि वाल्मीकि से जुड़े धार्मिक स्थलों के संरक्षण और सौंदर्यीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। चित्रकूट इसका जीता जागता उदाहरण है। महर्षि वाल्मीकि का जीवन आत्मबोध, ज्ञान की साधना और सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा देता है। उनकी जयंती को वाल्मीकि समुदाय प्रगट दिवस के रूप में उत्साह और श्रद्धा से मनाता है।
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