चित्रकूट में सजेगा हुनरमंदों का मंच, 'एक जनपद एक उत्पाद' से मिल रही हुनरमदों को पहचान
योगी सरकार की महात्वाकांक्षी योजना 'एक जनपद एक उत्पाद' के तहत चित्रकूट के पारंपरिक काष्ठ कला और लकड़ी के खिलौना उद्योग को...
योगी सरकार में चित्रकूट के काष्ठ कला और लकड़ी के खिलौना उद्योग को वैश्विक पहचान दिलाने की ओर बढ़ रहे कदम
उपायुक्त उद्योग कार्यालय में जुटें हस्तशिल्पी, टूलकिट और विशेष प्रशिक्षण से चमकेगी स्थानीय कारीगरों की किस्मत
बिना किसी शैक्षिक बाध्यता के जमीनी हुनर को मिल रहा मुकाम, चित्रकूट के 250 युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने की योगी सरकार की अनूठी मुहीम
चित्रकूट। योगी सरकार की महात्वाकांक्षी योजना 'एक जनपद एक उत्पाद' के तहत चित्रकूट के पारंपरिक काष्ठ कला और लकड़ी के खिलौना उद्योग को अब वैश्विक पहचान मिलने जा रही है। जिला उद्योग प्रोत्साहन एवं उद्यमिता विकास केन्द्र चित्रकूट में बुधवार को शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के कुशल व अकुशल कारीगरों के कौशल उन्नयन के लिए साक्षात्कार का आयोजन किया गया। योगी सरकार की इस अनूठी मुहिम से बिना किसी शैक्षिक बाध्यता के जमीनी हुनर को नया मुकाम मिल रहा है। जिससे चित्रकूट के 250 युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने का मार्ग प्रशस्त होगा।
विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक टूल किट से चमकेगी हुनरमंदों की किस्मत
उपायुक्त उद्योग कार्यालय में जुटे हस्तशिल्पियों और कारीगरों की किस्मत अब विशेष प्रशिक्षण और आधुनिक टूलकिट से चमकेगी। योजना की जानकारी देते हुए उप आयुक्त उद्योग चन्द्र प्रकाश पटेल ने बताया कि उत्तर प्रदेश शासन द्वारा संचालित इस योजना का मुख्य उद्देश्य स्थानीय हस्तशिल्पियों का कौशल विकास करना और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है। चित्रकूट जिले में ODOP के अंतर्गत काष्ठ कला उत्पाद और लकड़ी के खिलौने के निर्माण को चुना गया है। चालू वित्तीय वर्ष में विभाग को काष्ठ कला के लिए 125 और लकड़ी के खिलौने के लिए 125, यानी कुल 250 हुनरमंदों को लाभांवित करने का लक्ष्य प्राप्त हुआ है।
250 के सापेक्ष 125 लोगों का हो चुका साक्षात्कार व प्रशिक्षण
उद्योग विभाग के अधिकारियों ने बताया कि इस साल मिले 250 के लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 125 लोगों का साक्षात्कार कर उनकी ट्रेनिंग कराई जा चुकी है। बताया कि विभाग को मिले शेष लक्ष्य को भी जल्द ही पूरी पारदर्शिता के साथ पूरा कर लिया जाएगा। इसी क्रम में बुधवार को कार्यालय उपायुक्त उद्योग में आवेदकों का साक्षात्कार संपन्न हुआ जिसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लाभार्थियों ने हिस्सा लिया।
योगी सरकार की यह योजना उन गरीब और हुनरमंद कारीगरों के लिए वरदान साबित हो रही है जो शैक्षिक रूप से पिछड़े होने के बावजूद पारंपरिक कला में पारंगत हैं। टूलकिट और विशेष प्रशिक्षण मिलने के बाद स्थानीय कारीगरों के उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार आएगा जिससे उनके उत्पाद वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा कर सकेंगे। यह पहल न केवल चित्रकूट के ऐतिहासिक काष्ठ शिल्प को जीवित रखेगी बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ कर युवाओं के पलायन पर भी प्रभावी रोक लगाएगी।
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