आईये आपको बताते हैं कि बाँदा के व्यापारी क्यों डरते हैं प्रशासन से

पूरे प्रदेश में दो दिन पहले प्रदेश के मुख्य सचिव राजेन्द्र तिवारी के आदेश जारी हुए थे, साप्ताहिक बंदी के बावत...

आईये आपको बताते हैं कि बाँदा के व्यापारी क्यों डरते हैं प्रशासन से

सोमवार से शुक्रवार तक प्रदेश के हर बाजार की दुकानें विधिवत खुलेंगी पर सोशल डिस्टेंसिंग के साथ। लेकिन सभी बाजारों की साप्ताहिक बंदी अब से शनिवार और रविवार हुआ करेगी। इस पर बाँदा के व्यापारी तो आश्वस्त थे, कि जब मुख्य सचिव का आदेश है तो ऐसा ही होगा। इस नाते मंगलवार की होने वाली एक दिनी साप्ताहिक बंदी अब दो दिन की शनिवार और रविवार को हुआ करेगी।

अगर ऐसा ही होता तो ठीक था, पर बाँदा जिला प्रशासन की जब तक गाइडलाइन न आ जाये तब तक यहां के व्यापारी मानते ही नहीं। यहां के व्यापारी एक ओर मानते हैं कि प्रदेश के मुख्य सचिव की गाइडलाइन ज्यादा पाॅवरफुल है और वही सही है। तो फिर क्यों यहां पर वो अलग से गाइडलाइन की राह तकते हैं? कुछ तो वजह है। और वजह वाजिब भी प्रतीत होती है। क्या ये व्यापार मण्डल और प्रशासन के बीच की संवादहीनता है? आईये आपको सिलसिलेवार बताते हैं।

दरअसल जब से कोरोना का हमला यहां पर हुआ है, यहां का व्यापार चैपट ही हो गया है। बुन्देलखण्ड की मार्केट में वैसै ही अर्थव्यवस्था का फ्लो कमजोर रहता है। बाकी बची-खुची कसर कोरोना पूरी कर गया। कोरोना के चलते जिसके पास जो जमा पूंजी थी, वह उसी से काम चला रहा था, इसी उम्मीद में कि एक दिन सब कुछ सही होगा। अब जब लाॅकडाउन खुलने की घोषणा हुई तो उम्मीद बंधी पर लाॅकडाउन में प्रशासन के हाथ जो अघोषित पाॅवर आ गयी थी, उसी से व्यापारी दहशत में आते चले गये। एक के बाद एक दुकानों के चालान, और जिला प्रशासन का सख्त रवैये ने बाँदा के व्यापारियों को बैकफुट में ला दिया।

व्यापारी तो व्यापारी यहां के व्यापार मण्डल भी असहाय से लगने लगे थे। हालांकि वो पुरजोर कोशिश कर रहे थे कि व्यापारियों के हक को न मारा जाये। ऊपर से जो आदेश आ रहे हैं, वो लोग वही मानने को तैयार हैं, पर कोरोना काल में बाँदा का माहौल ही ऐसा बना था कि शासन के आदेश के बावजूद बाँदा का व्यापारी जब तक जिलाधिकारी का आदेश नहीं देख लेता था, तब तक शासन के आदेश को भी नहीं मानता था। यानि बाँदा के जिलाधिकारी के आगे यूपी सरकार का आदेश भी बेअसर था। क्या ये डर, ये दहशत एक दिन में आई थी?

शासन की गाइडलाइन बांदा में बेअसर, व्यापारी असमंजस में

कोविड-19 के संक्रमण से जनमानस को बचाने के उद्देश्य से शासन स्तर पर लाॅकडाउन घोषित होते रहे हैं जिसका पालन भी कड़ाई से कराने की जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होती थी। इधर उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा नई गाइडलाइन जारी कर शनिवार और रविवार को लाॅकडाउन घोषित कर बाकी 5 दिनों में बाजार खोलने की अनुमति दी। पर इस गाइडलाइन के विपरीत बाँदा में पुलिस ने मंगलवार को बाजार खोलने नहीं दिया। जिससे व्यापारियों में भारी आक्रोश रहा। दुकान खोलने में कुछ व्यापारियों के साथ पुलिस ने अभद्रता की उनका सामान फेंक दिया गया। व्यापारी नेताओं ने जब मोर्चा संभाला तब जाकर सीओ ने आकर स्थिति को कंट्रोल किया और मौखिक रूप से कहा कि व्यापारी दुकानें खोल सकते हैं।

लेकिन सीओ के इस आश्वासन के बाद भी महेश्वरी देवी बाजार में अधिकांश दुकानें खुलीं तो काफी बंद भी रहीं। लेकिन शंकर गुरू चैराहा, सब्जी मंडी, गूलरनाका इत्यादि बाजार में अधिकांश व्यापारी दोपहर तक अपनी-अपनी दुकानें बंद किये रहे। कारण था कि सब्जी मंडी के बगल में एक गरीब महिला की दुकान का सारा सामान पुलिस ने डंडा मारकर गिरा दिया था। इतना ही नहीं पुलिस ने उस महिला से काफी अभद्रता भी की। इस घटना को आसपास के लोगों ने अपने मोबाइल में कैद कर वीडियो बनाया। इसके बाद शुरू हुई दोनों पुलिस कर्मियों को निलंबित करने की मांग।

इसके पहले आगे बढ़ें आपको बताते हैं कि जनपद मुख्यालय बाँदा में मंगलवार को साप्ताहिक बंदी होती थी। इसके अलावा जनपद के अन्य कस्बों में अलग-अलग दिन बंदी होती है। इधर लाॅकडाउन के चलते जब-जब शासन स्तर से बाजार बंद करने के निर्देश दिए गए, व्यापारियों ने उसका पालन किया। इधर 11 जुलाई को 55 घंटे का लाॅकडाउन उत्तर प्रदेश सरकार ने किया तो उसका भी व्यापारियों ने अक्षरशः पालन किया। इसके बाद आई प्रदेश शासन द्वारा एक नई गाइडलाइन, जिसमें कहा गया कि शनिवार और रविवार को 2 दिन लाॅकडाउन रहेगा। जिसमें बाजार सहित सभी कार्यालय बंद रहेंगे। इस नई गाइडलाइन के मुताबिक स्पष्ट किया गया कि बाजार सिर्फ 2 दिन बंद रहेंगे, और यही साप्ताहिक बंदी भी होगी। बाकी के 5 दिन बाजार व कार्यालय खुले रहेंगे। इस गाइडलाइन से स्पष्ट हो जाता है कि जनपद में जो पहले से बंदी के दिन निर्धारित थे, वो अब बदल चुके हैं, अब पूरे प्रदेश की साप्ताहिक बंदी एक सी होगी।

दुविधा में डालती है प्रशासन की चुप्पी

बंदी के दिन बाजार खुलेगा या नहीं? यह स्पष्ट करने के लिए सोमवार को व्यापारियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने सिटी मजिस्ट्रेट से मुलाकात की और इस संबंध में प्रशासन की स्थिति स्पष्ट करने को कहा। लेकिन प्रशासन चुप्पी साधे रहा, जबकि शासन की नई गाइडलाइन जारी होने के बाद उसी को आधार बनाते हुए प्रशासन को नया आदेश जारी कर व्यापारियों को बंदी के बारे में स्पष्ट करना चाहिए था। नई गाइडलाइन के मुताबिक 5 दिन बाजार खुलने का जो आदेश दिया गया है उसके मुताबिक डीएम द्वारा बाँदा में निर्धारित किए गए दुकानों के खुलने का रोस्टर भी समाप्त हो जाता है। इसके बाद भी प्रशासन द्वारा कोई आदेश जारी नहीं किया गया। जिससे आज मंगलवार को जनपद मुख्यालय के बाजार में असमंजस की स्थिति रही। इससे बड़ी संख्या में दुकानदारों ने सुबह से दुकान नहीं खोली और जिन दुकानदारों ने दुकानें खोली उन्हें पुलिस ने न सिर्फ डराया-धमकाया बल्कि शंकर मेडिकल स्टोर के सामने सब्जी मंडी के बाहर एक महिला दुकानदार का सामान सिपाही ने सड़क पर फेंक दिया। जिससे अन्य व्यापारियों में हड़कंप मच गया। जो दुकानें खोले भी थे, वह भी बंद करके भाग गए। आखिर सबको अपनी जान प्यारी है, और जुर्माने से भी बचना है।

क्या कहते हैं व्यापारी

बाँदा की इस घटना पर राष्ट्रीय जन उद्योग व्यापार संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष  अमित गुप्ता भी इसे दुःखद बताते हुए कहते हैं-

"जब तक बाँदा के व्यापारियों और जिला प्रशासन के मध्य उचित संवाद स्थापित नहीं होगा, तब तक ये समस्या आयेगी। वहां के व्यापार मण्डल को प्रशासन के साथ लगातार संवाद करना होगा, स्वयं के साथ व्यापार में हो रही परेशानियों को प्रशासन के साथ साझा करना होगा, तभी व्यापारियों का भला होगा।"

इस सम्बंध में उत्तर प्रदेश व्यापार मंडल के उपाध्यक्ष  संतोष कुमार गुप्ता का कहना है -

"व्यापारियों ने इस बारे में चित्रकूट धाम मंडल के कमिश्नर से भी बातचीत की थी और कहा था कि डीएम के द्वारा नई गाइडलाइन के मुताबिक आदेश जारी किया जाना चाहिए ताकि व्यापारी अपनी दुकान खोल सकें, परंतु प्रशासन द्वारा कोई कार्यवाही न होने पर व्यापारियों से कहा गया था कि फिलहाल जब तक प्रशासन द्वारा कोई आदेश जारी नहीं होता तो व्यापारी दुकान बंद रखें।"

इसी तरह व्यापारी नेता  अमित सेठ भोलू का कहना है-

"सवेरे पुलिस कर्मियों द्वारा कुछ दुकानदारों के साथ अभद्रता की गई है। जिसकी शिकायत शासन स्तर पर की गई है और व्यापारियों से कहा गया है कि वह अपनी दुकानें खोलें। इस बीच क्षेत्राधिकारी नगर भी मौके पर आए थे और उन्हें शासन का शासनादेश अवगत कराया गया और बताया गया कि शासन द्वारा नई गाइडलाइन में 5 दिन दुकानें खोलने का आदेश है इसलिए व्यापारी बाजार खोल रहे हैं। इस पर क्षेत्राधिकारी नगर ने भी किसी तरह की आपत्ति नहीं की और महेश्वरी देवी, बलखंडी नाका सहित बड़ी संख्या में दुकानें खुल गई हैं। जबकि शंकर गुरु चैराहा के आसपास दुकानें बंद हैं क्योंकि सुबह की घटना के बाद दुकानदार अपनी दुकानें बंद करके चले गए थे।"

व्यापारी नेता  मनोज जैन कहते हैं-

"जिस महिला के साथ पुलिस कर्मियों ने अभद्रता की है, उसकी शिकायत सीओ सिटी से की है। और अभद्रता करने वाले दोनों पुलिस कर्मियों को निलम्बित करने की मांग की है।"

इसके अलावा भी कांग्रेस के मण्डलीय नेता प्रद्युम्न कुमार लालू दुबे इस प्रकरण पर कहते हैं, "निर्बल को न सताइये, जाकी मोटी हाय", ये कहकर वो इस घटना को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हैं। साथ ही कांग्रेस के शहर अध्यक्ष  पुष्पेन्द्र श्रीवास्तव ने भी इस घटना की कड़ी निंदा की और दोनों सिपाहियों को निलम्बित करने की मांग की है। सपा के भी कई नेताओं ने प्रशासन की इस कार्यवाही को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है।

उधर सदर विधायक  प्रकाश द्विवेदी के पास जब यह मामला पहुंचा तो उन्होने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए प्रशासन को कार्यवाही करने का निर्देश दिया, उसके बाद तत्काल प्रभाव से महिला व्यापारी के साथ अभद्रता करने वाला सिपाही प्रदीप पटेल को लाइन हाजिर कर दिया गया है, साथ ही सीओ सिटी इस मामले की जांच करेंगे। यह जानकारी विधायक प्रतिनिधि रजत सेठ ने दी।