बांदा कृषि विश्वविद्यालय के उद्यान छात्रों ने लिखी सफलता की नई इबारत

बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के उद्यान महाविद्यालय के अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने अपनी मेहनत, कौशल और व्यावहारिक ज्ञान...

Sep 22, 2026 - 15:46
Sep 22, 2026 - 15:48
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बांदा कृषि विश्वविद्यालय के उद्यान छात्रों ने लिखी सफलता की नई इबारत

‘अर्न व्हाइल यू लर्न’ के तहत छात्रों ने तैयार की पौध और फूलों की नर्सरी, वैल्यू एडिशन कर बनाए हर्बल गुलाल, हर्बल टी समेत कई उत्पाद

बांदा। बांदा कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के उद्यान महाविद्यालय के अंतिम वर्ष के छात्र-छात्राओं ने अपनी मेहनत, कौशल और व्यावहारिक ज्ञान के जरिए सफलता की नई मिसाल पेश की है। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) द्वारा प्रायोजित एक्सपीरिएंशियल लर्निंग प्रोग्राम के तहत बीएससी उद्यानिकी अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने पौध उत्पादन से लेकर उत्पादों की मार्केटिंग तक का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त किया।

उद्यान महाविद्यालय के फ्लोरीकल्चर एंड लैंडस्केप आर्किटेक्चर विभाग द्वारा संचालित ‘नर्सरी प्रोडक्शन एंड वैल्यू एडिशन ऑफ फ्लावर्स’ कोर्स में विद्यार्थियों को पौधे उगाने के साथ-साथ उन्हें व्यावसायिक रूप से उपयोगी बनाने और बाजार तक पहुंचाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

‘अर्न व्हाइल यू लर्न’ पर आधारित प्रशिक्षण

इस एक्सपीरिएंशियल लर्निंग प्रोग्राम का मुख्य उद्देश्य ‘अर्न व्हाइल यू लर्न’ यानी सीखने के साथ कमाई के सिद्धांत पर विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव देना है। कार्यक्रम के प्रभारी डॉ. अमित कनौजिया की देखरेख में छात्रों ने विश्वविद्यालय परिसर में विभिन्न सजावटी पौधों, फूलों और व्यावसायिक महत्व वाले पौधों की नर्सरी तैयार की।

छात्रों ने गर्मी के मौसम में लगाए जाने वाले गेंदा, कॉसमॉस, सेलोशिया, जिनिया, सनफ्लावर और कोचिया की पौध तैयार की। इसके अलावा बोगेनवेलिया, फाइकस, तुलसी, कनेर और गुड़हल जैसे बहुवर्षीय पौधों की कटिंग भी तैयार की। तैयार पौधों की बांदा शहर में जाकर मार्केटिंग की गई।

फूलों से तैयार किए कई उपयोगी उत्पाद

विद्यार्थियों ने केवल पौध उत्पादन तक ही अपनी गतिविधियों को सीमित नहीं रखा, बल्कि फूलों का वैल्यू एडिशन कर कई उत्पाद तैयार किए। इनमें हर्बल गुलाल, हर्बल टी, सूखे फूलों से ईयररिंग्स, चाभी के उत्पाद, फ्लोरल फ्रेम और धूपबत्ती शामिल हैं। विद्यार्थियों ने इन उत्पादों की पैकेजिंग, सौंदर्यीकरण और मार्केटिंग की जिम्मेदारी भी स्वयं संभाली।

इस प्रक्रिया से विद्यार्थियों को उत्पाद तैयार करने के साथ बाजार में उसकी मांग, प्रचार-प्रसार और बिक्री का व्यावहारिक अनुभव मिला। छात्रों ने लोगों को उत्पादों के बारे में जागरूक करते हुए उनकी बिक्री भी की।

रोजगार देने वाला बनने की सीख

इस सफलता पर उद्यान महाविद्यालय के डीन डॉ. सत्यव्रत द्विवेदी ने छात्रों का उत्साहवर्धन किया। फ्लोरीकल्चर विभागाध्यक्ष डॉ. अजय कुमार सिंह ने कहा कि इस तरह के पाठ्यक्रमों का उद्देश्य केवल छात्रों को डिग्री देना नहीं, बल्कि उन्हें नौकरी मांगने वाले के बजाय रोजगार देने वाला बनाने की दिशा में तैयार करना है। उन्होंने कहा कि नर्सरी प्रबंधन और फ्लोरीकल्चर के क्षेत्र में स्वरोजगार की काफी संभावनाएं हैं।

ईएलपी कोर्स के प्रभारी डॉ. अमित कनौजिया ने बताया कि नर्सरी उत्पादन और अलंकृत पौधों के मूल्यसंवर्धन के माध्यम से युवा अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। इस क्षेत्र में रोजगार और स्वरोजगार की व्यापक संभावनाएं हैं।

मार्केटिंग का भी मिला व्यावहारिक अनुभव

अंतिम वर्ष के विद्यार्थियों ने बताया कि प्रैक्टिकल आधारित इस कोर्स से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। पौधों की नर्सरी तैयार करने, उनका मूल्यसंवर्धन करने और बाजार में बेचने से उन्हें काफी व्यावहारिक अनुभव मिला। विद्यार्थियों के अनुसार उत्पाद तैयार करने के साथ उसकी मार्केटिंग सबसे महत्वपूर्ण चुनौती है। इस प्रशिक्षण के दौरान उन्होंने टीम के रूप में काम करने और बाजार की जरूरतों के अनुसार उत्पादों को प्रस्तुत करने का अनुभव हासिल किया।

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