चित्रकूट से 20 जिलों के गांवों तक पहुंच रही निःशुल्क नेत्र जांच सेवा, 10 लाख से अधिक लोगों की जांच
परम पूज्य संत रणछोड़दास जी महाराज द्वारा स्थापित विश्वप्रसिद्ध श्री सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, जानकीकुंड चित्रकूट और श्रीमद् राजचंद्र लव एंड केयर...
सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय और श्रीमद् राजचंद्र लव एंड केयर की पहल; दिसंबर 2026 तक 20 लाख जांच और 4 लाख निःशुल्क चश्मे देने का लक्ष्य
चित्रकूट। परम पूज्य संत रणछोड़दास जी महाराज द्वारा स्थापित विश्वप्रसिद्ध श्री सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय, जानकीकुंड चित्रकूट और श्रीमद् राजचंद्र लव एंड केयर (एसआरएलसी) के संयुक्त प्रयास से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के 20 जिलों के गांवों तक निःशुल्क नेत्र जांच सेवा पहुंचाई जा रही है। सर्व मंगल फैमिली ट्रस्ट और शाह हैप्पीनेस फाउंडेशन के सहयोग से संचालित इस पहल के तहत 2 नवंबर 2026 तक 10 लाख से अधिक लोगों की दृष्टि संबंधी समस्याओं की जांच की जा चुकी है, जबकि 2 लाख से अधिक लोगों को निःशुल्क चश्मे वितरित किए गए हैं।
ग्राम-स्तरीय नेत्र देखभाल कार्यक्रम का उद्देश्य उन ग्रामीण और वंचित समुदायों तक नेत्र सेवाएं पहुंचाना है, जहां अस्पताल या जांच केंद्रों तक पहुंचना कठिन होता है। जनवरी 2025 में शुरू हुआ यह कार्यक्रम 2026 में भी जारी है। आयोजकों ने दिसंबर 2026 तक कुल 20 लाख लोगों की जांच और 4 लाख जोड़ी निःशुल्क चश्मे उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
यह पहल परोपकारी मनुभाई और रिकाबेन शाह के सर्व मंगल फैमिली ट्रस्ट तथा शाह हैप्पीनेस फाउंडेशन के सहयोग से समर्थित है। इसका संचालन श्री सद्गुरु सेवा संघ ट्रस्ट के सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय द्वारा श्रीमद् राजचंद्र लव एंड केयर के साथ मिलकर किया जा रहा है।
आधुनिक तकनीक से गांवों में जांच
नेत्र शिविरों में QuickSee (क्विक्सी) नामक हैंडहेल्ड उपकरण का उपयोग किया जाता है। यह PlenOptika (प्लेन ऑप्टिका) द्वारा विकसित तकनीक है, जिसे एसआरएलसी ने उपलब्ध कराया है। उपकरण लगभग 10 सेकंड में चश्मे का नंबर बताने में सक्षम है। इसके माध्यम से स्कूल परिसरों और पंचायत भवनों जैसे स्थानीय स्थानों पर क्लिनिक-स्तरीय दृष्टि जांच की सुविधा पहुंचाई जा रही है।
गांव में ही जांच होने से लोगों को अस्पताल तक आने-जाने के खर्च और काम से छुट्टी लेने की परेशानी से राहत मिलती है। शिविर टीम कम समय में अधिक लोगों की जांच कर पाती है। निःशुल्क चश्मा देने से पहले नेत्र विशेषज्ञ प्रत्येक नुस्खे की पुष्टि करते हैं। मोतियाबिंद या अन्य गंभीर नेत्र समस्याओं से प्रभावित लोगों को आगे उपचार के लिए भेजा जाता है।
दूरी और मजदूरी का नुकसान बड़ी बाधा
सर्व मंगल फैमिली ट्रस्ट के चीफ गिविंग ऑफिसर मनुभाई शाह ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनेक लोग धुंधली दृष्टि के साथ जीवन बिताते हैं, क्योंकि नेत्र जांच की सुविधा उन तक नहीं पहुंच पाती। उन्होंने बताया कि विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और पोर्टेबल तकनीक की मदद से नेत्र शिविर विश्वस्तरीय देखभाल को लोगों के द्वार तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय और श्रीमद् राजचंद्र लव एंड केयर के साथ साझेदारी को सेवा और गुणवत्तापूर्ण उपचार के साझा संकल्प का हिस्सा बताया।
आयोजकों के अनुसार, चश्मों की कीमत कुछ सौ रुपये होने के बावजूद ग्रामीणों के लिए दूरी, मजदूरी का नुकसान और आसपास जांच सुविधा का अभाव बड़ी बाधाएं हैं। राष्ट्रीय और क्षेत्रीय अध्ययनों में भी दृष्टि-बाधा की समस्या को व्यापक बताया गया है।
सहयोग से जनस्वास्थ्य चुनौतियों का समाधान
सद्गुरु नेत्र चिकित्सालय के ट्रस्टी एवं निदेशक डॉ. इलेश जैन ने कहा कि चिकित्सालय दशकों से चित्रकूट और आनंदपुर के समुदायों की सेवा कर रहा है। यह साझेदारी उन गांवों तक नेत्र जांच पहुंचाने में मददगार है, जहां स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच सीमित है। उन्होंने कहा कि परोपकार, चिकित्सकीय विशेषज्ञता और तकनीक के साथ मिलकर काम करने से जनस्वास्थ्य की बड़ी चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना किया जा सकता है।
नेत्र शिविर सभी वंचित समुदायों के वयस्कों और बच्चों के लिए खुले हैं। शिविर में आने वाले लोगों से आधार कार्ड और चालू मोबाइल नंबर साथ लाने की अपील की गई है।
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