53वें राष्ट्रीय रामायण मेले का हुआ भव्य समापन

राष्ट्रीय रामायण मेले के पाचवें दिन मेले के समापन की घोषणा करते हुये हैदराबाद खाकी अखाड़ा रामबाग तरौहा के महंत अमृतदास महाराज ने कहा कि...

Feb 20, 2026 - 10:16
Feb 20, 2026 - 10:17
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53वें राष्ट्रीय रामायण मेले का हुआ भव्य समापन

देश के सामने मिसाल बनकर उभरेगा रामायण मेला : महंत अमृतदास

चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेले के पाचवें दिन मेले के समापन की घोषणा करते हुये हैदराबाद खाकी अखाड़ा रामबाग तरौहा के महंत अमृतदास महाराज ने कहा कि रामायण राम जी की प्राप्ति का सोपान है। चित्रकूट में पिछले 53 वर्षो से हो रहा यह दिव्य भव्य रामायण मेला जन-जन को राम बनने की प्रेरणा देता है। मैं समझता हूँ कि जिस तरह संसार में रहने गृहस्थ आश्रम में रहने वाले मनुष्यों को नित्य परिश्रम और प्रयास करना चाहिए। वैसा ही प्रयास रामायण मेले के आयोजन को षानदार बनाने के लिए इसकी कमेटी द्वारा किया जा रहा है। उन्होने कहा कि इस रामायण मेले को और अधिक भव्य बनाने के लिए साधु समाज को भी आगे आना होगा। चूँकि यह रामायण मेला तरौहा से प्रारम्भ हुआ और वह भी तरौहा से हैं तो मैं अपनी जिम्मेदारी समझता हूँ। यह मेला एक नयी ऊंचाई प्राप्त कर देश के सामने एक मिसाल बनकर उभरेगा। रामायण मेले के समापन सत्र में पधारे चित्रकूट के सनकादिक आश्रम के संनकादिक महाराज ने कहा कि अब रामकथा करने का समय नहीं है अब असली रामलीला करने का वक्त आ गया है। प्रभु राम की लीला ताडका वध से प्रारम्भ होकर आतंक के केन्द्र बिन्दु रावण को अंत के बाद पूर्ण हुई। जिन देवी-देवताओं की पूजा करते है सब के हाथो में उनके षस्त्र नजर आते है, लेकिन हमारे पास एक डंडा तक नहीं है।

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