बाँदा की शजर पत्थर शिल्प कला : प्रकृति और परंपरागत हुनर का अद्भुत संगम

उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में विकसित शजर पत्थर शिल्प कला प्रकृति और मानवीय हुनर का ऐसा अनोखा संगम है, जो प्रदेश ही नहीं बल्कि देश-विदेश...

Feb 9, 2026 - 10:15
Feb 9, 2026 - 10:41
 0  11
बाँदा की शजर पत्थर शिल्प कला : प्रकृति और परंपरागत हुनर का अद्भुत संगम

केन नदी के पत्थरों से उकेरी जाती है प्राकृतिक विरासत, GI टैग से मिली वैश्विक पहचान

बांदा। उत्तर प्रदेश के जनपद बांदा में विकसित शजर पत्थर शिल्प कला प्रकृति और मानवीय हुनर का ऐसा अनोखा संगम है, जो प्रदेश ही नहीं बल्कि देश-विदेश में अपनी विशिष्ट पहचान बना चुका है। केन नदी के तटों पर पाए जाने वाले विशेष पत्थरों पर प्रकृति स्वयं वृक्ष, पत्तियों और विविध आकृतियों की अद्भुत रेखाएं उकेर देती है, जिन्हें स्थानीय शिल्पकार अपनी बारीक दृष्टि, अपार धैर्य और पीढ़ियों से चली आ रही शिल्प परंपरा के माध्यम से सहेज कर कलात्मक रूप प्रदान करते हैं।

बांदा के कुशल कारीगर इन प्राकृतिक आकृतियों को बिना अधिक छेड़छाड़ किए तराशते हैं, जिससे पत्थरों में प्रकृति की मूल छाप बनी रहती है। यही विशेषता शजर पत्थर शिल्प को अन्य शिल्प कलाओं से अलग पहचान देती है। यह हस्तनिर्मित उत्पाद आज भौगोलिक संकेतक (GI) टैग प्राप्त कर चुका है, जिससे इसकी प्रामाणिकता और अंतरराष्ट्रीय पहचान को और मजबूती मिली है।

शजर पत्थर शिल्प न केवल उत्तर प्रदेश के हस्तशिल्प परिपथ का गौरव बन चुका है, बल्कि यह स्थानीय कारीगरों के लिए आजीविका का सशक्त माध्यम भी है। इस कला से जुड़े शिल्पकारों का कहना है कि जब कोई व्यक्ति इन अनमोल पत्थरों को अपनाता है, तो वह केवल एक कलाकृति नहीं खरीदता, बल्कि सदियों पुरानी सांस्कृतिक धरोहर और शिल्प परंपरा को जीवित रखने में अपना योगदान देता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि शजर पत्थर शिल्प कला प्रकृति संरक्षण, आत्मनिर्भर कारीगर और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का प्रतीक है। प्रदेश सरकार द्वारा हस्तशिल्प को बढ़ावा देने की विभिन्न योजनाओं से इस कला को नई पहचान और बाजार मिल रहा है।

उत्तर प्रदेश की इस अनूठी कला यात्रा का हिस्सा बनकर, हर नागरिक को बांदा के इस ‘प्राकृतिक रत्न’ को सहेजने और आगे बढ़ाने में अपनी सहभागिता निभानी चाहिए।

What's Your Reaction?

Like Like 0
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0