संस्कारों की जड़ें, आशीर्वाद की छाँव, किड्ज़ी वी.एन.एम.पी.एस. दे रहा बुजुर्गों को आदर का ठाँव
नरैनी रोड स्थित KCNIT कैंपस के किड्ज़ी वी.एन.एम.पी.एस. में 20 सितंबर को ग्रैंडपेरेंट्स डे का भव्य आयोजन किया गया...
बांदा। नरैनी रोड स्थित KCNIT कैंपस के किड्ज़ी वी.एन.एम.पी.एस. में 20 सितंबर को ग्रैंडपेरेंट्स डे का भव्य आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों और उनके दादा-दादी एवं नाना-नानी के बीच प्रेम, सम्मान और पारिवारिक संस्कारों के रिश्ते को मजबूत करना रहा।
कार्यक्रम में नन्हे-मुन्ने बच्चों ने अपने दादा-दादी के सम्मान में कविता पाठ, नृत्य एवं विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। बच्चों की मनमोहक प्रस्तुतियों ने उपस्थित अतिथियों और अभिभावकों का मन मोह लिया। वहीं ग्रैंडपेरेंट्स के मनोरंजन के लिए पास द कॉइन, नेलपेंट रेस और सेव योर बैलून सहित विभिन्न खेल प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। बुजुर्गों के अनुभव और बच्चों की मासूमियत का संगम कार्यक्रम का प्रमुख आकर्षण रहा।
कार्यक्रम में दैनिक जागरण बांदा के ब्यूरो चीफ विमल पांडेय एवं खबर लहरिया की सह-संपादक कविता बुंदेलखंडी विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद रहीं। कविता बुंदेलखंडी ने ग्रामीण पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य करते हुए देश-विदेश में बुंदेलखंड की पहचान और यहां की जमीनी पत्रकारिता को नई पहचान दिलाई है।
इस अवसर पर कविता बुंदेलखंडी ने कहा कि ऐसे आयोजन समाज में दादा-दादी और नाना-नानी के सम्मान को बढ़ाने का काम करते हैं। जब बच्चों के बीच उनके सम्मान में कार्यक्रम आयोजित होते हैं तो बुजुर्गों को भी यह महसूस होता है कि वे परिवार की मुख्यधारा का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को अपने बुजुर्गों के अनुभव और संस्कारों से जोड़ना आज के समय की आवश्यकता है।
दैनिक जागरण के ब्यूरो चीफ विमल पांडेय ने कहा कि हमें इस बात पर चिंतन करने की आवश्यकता है कि पहले इस तरह के आयोजन सामान्य रूप से नहीं होते थे, लेकिन आज इन्हें आयोजित करने का उद्देश्य केवल उत्सव मनाना नहीं, बल्कि बच्चों को अपनी संस्कृति, परंपराओं और पारिवारिक मूल्यों से जोड़े रखना है। ऐसे कार्यक्रम नई पीढ़ी को यह समझाने का माध्यम हैं कि परिवार में बुजुर्गों की भूमिका कितनी महत्वपूर्ण है।
किड्ज़ी हेड ने कहा कि ग्रैंडपेरेंट्स डे जैसे आयोजन बच्चों में अपने बुजुर्गों के प्रति सम्मान और परिवार के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करते हैं। दादा-दादी और नाना-नानी बच्चों की पहली पाठशाला की तरह होते हैं, जिनके अनुभव और कहानियां बच्चों को जीवन के महत्वपूर्ण संस्कार सिखाती हैं।
विद्यावती निगम मेमोरियल पब्लिक स्कूल, बांदा (वीएनएमपीएस) के प्रिंसिपल ने कहा कि बच्चों के विकास और उन्हें संस्कारित बनाने में बुजुर्गों का साथ बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कार्यक्रम में आए सभी अतिथियों एवं ग्रैंडपेरेंट्स का स्वागत करते हुए आभार व्यक्त किया।
विद्यालय परिवार ने कहा कि बदलते समय में जब संयुक्त परिवारों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों को अपनी पारिवारिक जड़ों और बुजुर्गों के महत्व से जोड़ना आवश्यक है। कार्यक्रम ने यह संदेश दिया कि “जड़ों से जुड़े रहेंगे, तभी हम फूलों की तरह खिलेंगे।”
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