प्रधानाध्यापकों का ‘दक्ष’ मॉड्यूल एवं मेंटल वेलनेस आधारित प्रशिक्षण प्रारंभ
जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं प्रधानाचार्यों के लिए ‘दक्ष’ मॉड्यूल एवं मेंटल वेलनेस कार्यक्रम आधारित...
प्रभावी विद्यालयी नेतृत्व एवं सकारात्मक शैक्षिक वातावरण के निर्माण पर जोर
चित्रकूट। जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में माध्यमिक विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों एवं प्रधानाचार्यों के लिए ‘दक्ष’ मॉड्यूल एवं मेंटल वेलनेस कार्यक्रम आधारित तीन दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ हुआ। प्राचार्य डायट बीके शर्मा एवं जिला विद्यालय निरीक्षक रविशंकर ने दीप प्रज्ज्वलन तथा माँ सरस्वती के छाया चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्पार्पण कर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। सरस्वती वंदना एवं प्रार्थना के साथ प्रशिक्षण सत्रों का आरंभ हुआ। इस अवसर पर जिला विद्यालय निरीक्षक श्री रविशंकर ने प्रतिभागियों का उत्साहवर्धन करते हुए प्रशिक्षण को पूर्ण मनोयोग से प्राप्त करने तथा अर्जित ज्ञान एवं कौशल को अपने विद्यालयों में लागू करने के निर्देश दिए।
उन्होंने प्रशिक्षण की सार्थकता पर चर्चा करते हुए विद्यालयों के शैक्षिक वातावरण एवं कार्यप्रणाली में सकारात्मक सुधार के लिए इसके उपयोग पर बल दिया। उन्होंने इस प्रकार के उपयोगी प्रशिक्षण के आयोजन के लिए डायट का आभार व्यक्त किया। प्राचार्य डायट ने प्रतिभागियों को पूरी ऊर्जा, उत्साह एवं सक्रिय सहभागिता के साथ प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने विद्यालयी नेतृत्व को अधिक प्रभावी बनाने के लिए सीखने की तत्परता और प्रशिक्षण से प्राप्त अनुभवों को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही, उन्होंने जिला विद्यालय निरीक्षक रविशंकर का कार्यक्रम में अपना समय देने एवं प्रतिभागियों का मार्गदर्शन करने के लिए आभार व्यक्त किया। प्रवक्ता डायट संदर्भदाता शिवलाल सिंह यादव ने तीन दिवसीय प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत की तथा प्रथम सत्र का संचालन किया। उन्होंने माध्यमिक शिक्षा के परिदृश्य पर विस्तृत चर्चा परिचर्चा करते हुए प्रतिभागियों को विषय से जोड़ा तथा माध्यमिक शिक्षा के इतिहास पर एवं माध्यमिक शिक्षा के पदानुक्रम पर विस्तृत चर्चा परिचर्चा की।
इसके उपरांत प्रवक्ता डायट संदर्भदाता सौरभ चन्द्र सविता ने ‘प्रधानाध्यापक की संकल्पना, वर्तमान शैक्षिक संदर्भ एवं माध्यमिक विद्यालय’ विषय पर सत्र का संचालन किया। चर्चा परिचर्चा एवं गतिविधियों के माध्यम से प्रधानाध्यापक की भूमिका, उत्तरदायित्व तथा बदलते शैक्षिक परिवेश में प्रभावी विद्यालयी नेतृत्व की आवश्यकता को स्पष्ट किया गया। प्रतिभागियों की सक्रिय सहभागिता ने सत्र को संवादपरक एवं उपयोगी बनाया। प्रशिक्षण में प्रभावी विद्यालय प्रबंधन के साथ शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित करने की आवश्यकता को भी रेखांकित किया। सहयोग, संवाद एवं सकारात्मक संबंधों पर आधारित विद्यालयी वातावरण शिक्षकों और विद्यार्थियों के समग्र विकास का महत्वपूर्ण आधार है। प्रशिक्षण के प्रथम दिवस सभी प्रतिभागी प्रधानाध्यापकों एवं प्रधानाचार्यों ने पूर्ण अनुशासन, रुचि एवं सक्रियता के साथ प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस अवसर पर संदर्भदाता ओपी सिंह, महेश प्रसाद, तकनीकी सहायक पुष्पेन्द्र सिंह आदि मौजूद रहे।
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