श्रीमद् भागवत कथा के चौथे दिन श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की रही धूम
सीतापुर में चल रही श्रीमदभागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास आचार्य नवलेश दीक्षित महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई...
जीवन जीने का स्वरूप देती है भागवत कथा: नवलेश महाराज
चित्रकूट। सीतापुर में चल रही श्रीमदभागवत कथा के चतुर्थ दिवस कथा व्यास आचार्य नवलेश दीक्षित महाराज ने श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा सुनाई। उन्होंने कहा कि भागवत कथा जीवन जीने का स्वरूप देती है। जीवन ही समुद्र मंथन है। विष भी पान करना पड़ेगा और अमृत एक जैसा समय संसार में कभी किसी का नहीं रहा। इसलिए अपनी शक्ति और सम्पति का बहुत जल्दी सदुपयोग करें।
कहा कि सदा संत गुरुजनों के बताए हुए मार्ग पर चलना चाहिए, क्योंकि यदि परमात्मा की प्राप्ति करना है तो संत गुरु ही बीच की कड़ी है जो परमात्मा से मिला सकते हैं। जिस प्रकार नारद के उपदेश और आशीर्वाद से धु्रव और प्रहलाद को भगवत प्राप्ति हो गई। आगे संतों के लक्षण का वर्णन करते हुए कहा कि पांच लक्षण जिसमें हो उसी को संत समझो। संत तितिक्षु होता है। सहनशील संत में करुणा बहुत ही होती है। सभी देहधारियों में अपने परमात्मा को देखते हैं। उनका कोई शत्रु नहीं होता है। साधु हमेशा शांत स्वभाव में रहते हैं। जिस प्रकार जीवात्मा और परमात्मा के बीच संत सेतु का कार्य करते हैं। आगे वर्णन करते हुए कहा वस्तु शक्ति ज्ञान की अपेक्षा नहीं करती है। जैसे भगवान का नाम जानकर ले या अनजाने में तो वह नाम हमारा कल्याण करके ही रहेगा। नारायण कवच की महिमा का वर्णन करते हुए महाराज ने कहा भागवत का नारायण कवच नित्य पाठ करने से कवच की तरह रक्षा करते हैं। भगवान की भक्ति करने के लिए हृदय में विश्वास होना चाहिए। कहा कि श्रीकृष्ण चरित्र से अपना अंत सुधारना चाहिए। कथा में श्रीकृष्ण जन्मोेत्सव धूमधाम से मनाया गया। कथा स्व जियालाल की स्मृति में चल रही है। इस मौके पर बड़ी तादाद में श्रोतागण मौजूद रहे।
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