पृथक बुंदेलखंड की मांग : अतर्रा से 'गांव-गांव पाव-पाव' यात्रा का शंखनाद
सुप्रसिद्ध अभिनेता और बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख राजा बुंदेला की अध्यक्षता में 'गांव-गांव पाव-पाव यात्रा' का भव्य शुभारंभ किया गया...
हुंकार: राजा बुंदेला बोले—खनिज संपदा से भरपूर है क्षेत्र, फिर भी विकास से महरूम हैं बुंदेली
अतर्रा (बांदा)। पृथक बुंदेलखंड राज्य निर्माण की मांग को लेकर गुरुवार को अतर्रा कस्बे में आंदोलन की धार तेज हो गई। सुप्रसिद्ध अभिनेता और बुंदेलखंड मुक्ति मोर्चा के प्रमुख राजा बुंदेला की अध्यक्षता में 'गांव-गांव पाव-पाव यात्रा' का भव्य शुभारंभ किया गया। इस दौरान सैकड़ों की संख्या में संगठन के पदाधिकारी और कार्यकर्ता हाथों में झंडे लेकर अलग राज्य के समर्थन में नारे लगाते हुए शामिल हुए।
लंबे समय से हो रही बुंदेलखंड के साथ नाइंसाफी
यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर जनसभा को संबोधित करते हुए राजा बुंदेला ने कहा कि बुंदेलखंड के लोगों के साथ दशकों से राजनीतिक और आर्थिक स्तर पर नाइंसाफी हो रही है। उन्होंने जोर देकर कहा कि अब चुप बैठने का समय नहीं है। उनका संगठन इस लड़ाई को निर्णायक मोड़ तक ले जाएगा और केंद्र व प्रदेश सरकार से बुंदेलखंड को अलग राज्य का दर्जा दिलाने की मांग पूरी करवाकर रहेगा।
संसाधनों की कमी नहीं, प्रबंधन की है दरकार
राजा बुंदेला ने क्षेत्र की बदहाली पर तर्क देते हुए कहा कि बुंदेलखंड खनिज संपदा और प्राकृतिक संसाधनों से भरा-पूरा क्षेत्र है, लेकिन इसके बावजूद यहां के लोग विकास की मुख्यधारा से कटे हुए हैं। उन्होंने बड़े राजनेताओं पर कटाक्ष करते हुए कहा, "बड़े नेता इस धरती को गरीब बताते हैं, जबकि सच्चाई यह है कि यहां संसाधनों की कोई कमी नहीं है।" उन्होंने विश्वास जताया कि यदि बुंदेलखंड अलग राज्य बनता है, तो स्थानीय संसाधनों का लाभ यहीं के लोगों को मिलेगा और क्षेत्र का सर्वांगीण विकास संभव हो सकेगा।
जन-जागरूकता के लिए 'पाव-पाव' पदयात्रा
बुंदेला ने स्पष्ट किया कि 'गांव-गांव पाव-पाव यात्रा' का मुख्य उद्देश्य सुदूर ग्रामीण अंचलों तक पहुंचना और लोगों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना है। इस पदयात्रा के माध्यम से गांव-गांव जाकर अलग राज्य की मांग को एक जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा, ताकि दिल्ली और लखनऊ तक बुंदेलियों की गूंज सुनाई दे।
कार्यकर्ताओं का जोश: यात्रा के दौरान कार्यकर्ताओं में भारी उत्साह देखा गया। कस्बे के मुख्य मार्गों से गुजरते हुए इस यात्रा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। कार्यकर्ताओं का कहना है कि जब तक राज्य का सपना पूरा नहीं होता, संघर्ष जारी रहेगा।
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