सात समंदर पार बुंदेली संवाद : बुंदेलखंड विश्वकोश की आगामी रूपरेखा पर कैलिफोर्निया में हुआ मंथन

बुंदेलखंड की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से तैयार किए जा रहे...

Jan 25, 2026 - 10:17
Jan 25, 2026 - 10:22
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सात समंदर पार बुंदेली संवाद : बुंदेलखंड विश्वकोश की आगामी रूपरेखा पर कैलिफोर्निया में हुआ मंथन

कैलिफोर्निया से प्रारम्भ होंगे बुंदेलखंड विश्वकोश के प्रोजेक्ट — श्रीनिवास लोहिया

भावी पीढ़ी के लिए सांस्कृतिक संरक्षण पर प्रवासी बुंदेलखंडियों से संवाद आवश्यक — सचिन चतुर्वेदी

बांदा/कैलिफोर्निया। बुंदेलखंड की सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और साहित्यिक विरासत को संरक्षित करने के उद्देश्य से तैयार किए जा रहे बुंदेलखंड विश्वकोश की आगामी रूपरेखा को लेकर एक विशेष ऑनलाइन संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस संवाद में सुदूर कैलिफोर्निया (अमेरिका) में निवास कर रहे प्रबुद्ध प्रवासी बुंदेलखंडी भाई-बहनों ने सक्रिय सहभागिता निभाई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे श्रीनिवास लोहिया, जो विगत 45 वर्षों से अमेरिका में निवासरत हैं, ने बुंदेलखंड विश्वकोश के विकास एवं निर्माण के लिए कैलिफोर्निया से कुछ महत्त्वपूर्ण प्रोजेक्ट प्रारम्भ करने की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह प्रयास बुंदेलखंड की जड़ों को वैश्विक पटल पर स्थापित करने में सहायक सिद्ध होगा। इस प्रस्ताव का सभी सदस्यों ने स्वागत किया।

कार्यक्रम का शुभारम्भ श्रीमती शशि दीक्षित द्वारा सरस्वती वंदना से किया गया। इसके पश्चात डा. सरोज गुप्ता ने बुंदेलखंड विश्वकोश योजना की विस्तृत रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए इसके उद्देश्य, संरचना एवं भावी कार्ययोजना पर प्रकाश डाला। डा. मीना पिम्पलापुरे ने आशीर्वचन देते हुए बुंदेलखंड के इनसाइक्लोपीडिया की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

कार्यक्रम का संचालन करते हुए सचिन चतुर्वेदी, सचिव — बुंदेलखंड विश्वकोश योजना समिति, ने प्रवासी बुंदेलखंडियों से आह्वान किया कि वे अपनी सांस्कृतिक विरासत को संजोने और विश्व स्तर पर प्रस्तुत करने के इस अभियान में अपने सुझाव, अनुभव और सहयोग साझा करें। उन्होंने भावी पीढ़ी के लिए बुंदेलखंडी संस्कृति के संरक्षण को समय की आवश्यकता बताया।

संवाद के दौरान राजकुमार गुप्ता ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि बुंदेलखंड के विकास के लिए सभी प्रवासी अपनी क्षमता अनुसार आंशिक सहयोग अवश्य कर सकते हैं। वहीं विजय गुप्ता, प्रवेश गुप्ता एवं अभिषेक सरावगी ने तकनीकी सहयोग प्रदान करने की सहमति दी। डॉ. कुंकुम गुप्ता ने अपनी मॉरीशस यात्रा के संस्मरण साझा करते हुए वैश्विक स्तर पर राष्ट्रकवि मैथिलीशरण गुप्त की ख्याति का उल्लेख किया और बुंदेलखंड विश्वकोश निर्माण में सहयोग का आह्वान किया।

इस अवसर पर श्रीमती शोभा सराफ, दर्शनी शुक्ला, श्रीमती सावित्री मौर्य, श्रीमती नीता खन्ना, डा. संगीता सुहाने, अनिल सरावगी, अभय कुमार, आनंद सक्सेना, डा. अरविन्द दीक्षित, डा. शिखा दीक्षित सहित भारत एवं कैलिफोर्निया से जुड़े अनेक प्रतिभागियों ने अपना परिचय देते हुए बुंदेलखंड विश्वकोश योजना में सक्रिय सहयोग देने का संकल्प लिया।

कार्यक्रम ने यह स्पष्ट किया कि सात समंदर पार बसे प्रवासी बुंदेलखंडियों का यह संवाद बुंदेलखंड की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक मंच पर सशक्त रूप से स्थापित करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है।

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