पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन का निधन, चित्रकूट में महाप्रसाद कार्यक्रम में हजारों लोगों ने दी श्रद्धांजलि

विंध्य क्षेत्र सहित देशभर में नेत्र चिकित्सा सेवा के लिए विख्यात पद्मश्री सम्मानित नेत्र चिकित्सक डॉ. बुधेंद्र कुमार जैन...

Mar 13, 2026 - 16:56
Mar 13, 2026 - 18:17
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पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन का निधन, चित्रकूट में महाप्रसाद कार्यक्रम में हजारों लोगों ने दी श्रद्धांजलि

श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक रहे डॉ. जैन ने जीवनभर गरीबों को दी आंखों की रोशनी

चित्रकूट। विंध्य क्षेत्र सहित देशभर में नेत्र चिकित्सा सेवा के लिए विख्यात पद्मश्री सम्मानित नेत्र चिकित्सक डॉ. बुधेन कुमार जैन का 27 फरवरी 2026 को शाम लगभग 4 बजे चित्रकूट में निधन हो गया। उनके निधन से पूरे विंध्य क्षेत्र और देशभर में शोक की लहर दौड़ गई। उन्होंने चित्रकूट की पावन भूमि पर अंतिम सांस लेते हुए स्वयं को प्रभु चरणों में समर्पित कर दिया।

श्री सदगुरु सेवा संघ ट्रस्ट के ट्रस्टी और श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के निदेशक के रूप में डॉ. जैन ने अपना पूरा जीवन सेवा और समर्पण को समर्पित किया। उनके योगदान से यह संस्थान शून्य से शिखर तक पहुंचा और देश-विदेश में अपनी पहचान बनाई।

सेवा और समर्पण की मिसाल बने डॉ. जैन

डॉ. जैन ने अपने जीवन में आत्म अनुशासन, आत्म विश्वास और सेवा भाव को सर्वोपरि रखा। वर्ष 1974 में वह सदगुरु नेत्र चिकित्सालय से जुड़े और पांच दशकों से अधिक समय तक गरीब और जरूरतमंद लोगों की आंखों की रोशनी लौटाने का कार्य किया।

उनका जन्म वर्ष 1948 में हुआ था। प्रारंभिक शिक्षा सतना में हुई, जबकि चिकित्सा शिक्षा Shyam Shah Medical College Rewa से प्राप्त की। इसके बाद उन्होंने मुंबई से पीजी की पढ़ाई पूरी की। वर्तमान में वह AIIMS Raipur के अध्यक्ष पद पर भी कार्यरत थे।

अनेक राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय सम्मान

नेत्र चिकित्सा और अंधत्व निवारण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए डॉ. जैन को देश-विदेश में अनेक पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। उन्हें सामुदायिक नेत्र चिकित्सा सेवा के लिए ‘ढान्ढा पुरस्कार’, ‘फिरदौसी अवार्ड’, ‘ग्लोरी ऑफ इंडिया अवार्ड’, ‘आर.के. सेठ मेमोरियल अवार्ड’ और कई लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड प्राप्त हुए।

भारत सरकार ने उनके चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए उन्हें प्रतिष्ठित Padma Shri से भी सम्मानित किया। वर्ष 2023 में इंडियन जर्नल ऑफ ऑप्थाल्मोलॉजी ने उन्हें “भारतीय नेत्र चिकित्सा का जीवित किंवदंती” (Living Legend in Indian Ophthalmology) के रूप में सम्मानित किया।

महाप्रसाद में उमड़ा जनसैलाब

डॉ. जैन की स्मृति में 13 मार्च को रघुवीर मंदिर जानकी कुंड में महाप्रसाद (भंडारा) का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में चित्रकूट क्षेत्र के संत-महंत, जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, ट्रस्ट के सदस्य, सदगुरु परिवार के लोग और देशभर से हजारों श्रद्धालु शामिल हुए और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

परिवार और विरासत

डॉ. जैन अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनकी पत्नी ऊषा जैन सामाजिक सेवा और महिला सशक्तिकरण के कार्यों में सक्रिय हैं। उनके बड़े पुत्र जिनेश जैन और छोटे पुत्र डॉ. इलेश जैन हैं। डॉ. इलेश जैन वर्तमान में श्री सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के सीईओ और ट्रस्टी के रूप में कार्य कर रहे हैं तथा अपने पिता के पदचिन्हों पर चलते हुए संस्थान को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं।

डॉ. बी.के. जैन का जीवन सेवा, समर्पण और मानवता की मिसाल रहा। उनकी विरासत आने वाली पीढ़ियों को समाज सेवा और चिकित्सा के क्षेत्र में प्रेरित करती रहेगी।

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