बुन्देलखंड की कृषि आत्मनिर्भरता की ओर: प्राकृतिक खेती और गौ आधारित कृषि को बढ़ावा

बुन्देलखंड की कृषि को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से बांदा कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय किसान मेले का समापन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

Oct 21, 2024 - 06:21
Oct 21, 2024 - 07:21
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बुन्देलखंड की कृषि आत्मनिर्भरता की ओर: प्राकृतिक खेती और गौ आधारित कृषि को बढ़ावा

बुन्देलखंड की कृषि आत्मनिर्भरता की ओर: प्राकृतिक खेती और गौ आधारित कृषि को बढ़ावा

बाँदा, 20 अक्टूबर 2024 – बुन्देलखंड की कृषि को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य सेबांदा कृषि और प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित दो दिवसीय किसान मेले का समापन सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उत्तर प्रदेश के कृषि, कृषि शिक्षा एवं अनुसंधान मंत्री श्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि बुन्देलखंड अब कृषि क्षेत्र में पिछड़ा नहीं है और प्राकृतिक खेती के माध्यम से एक नई दिशा में अग्रसर हो रहा है।

प्राकृतिक खेती और नवाचार

श्री शाही ने कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा प्राकृतिक खेती पर किए जा रहे शोध और प्रयोग उल्लेखनीय हैं और किसानों को इससे प्रेरणा लेकर अपनी फसलों में नवाचार करना चाहिए। उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे खजूर, ड्रैगन फ्रूट, और चिरौंजी जैसी नई फसलों को अपनाएं। इसके अलावा, बुन्देलखंड की अन्ना प्रथा की समस्या को ध्यान में रखते हुए पशु चिकित्सा महाविद्यालय और पशु उपचार केंद्र की स्थापना भी क्षेत्र के किसानों के लिए वरदान साबित हो रही है।

गौ आधारित खेती: टिकाऊ भविष्य की कुंजी

गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता ने किसानों को गौ आधारित खेती की ओर लौटने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि टिकाऊ कृषि तभी संभव है जब गौ माता के संरक्षण और गौ उत्पादों के उपयोग पर विशेष ध्यान दिया जाए। श्री गुप्ता ने गौमूत्र और अन्य गौ उत्पादों के कृषि में लाभकारी उपयोग पर विस्तार से जानकारी दी और किसानों को मिट्टी की गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर दिया।

कृषक मेले के दौरान किसानों ने विभिन्न प्रकार की उन्नत फसल, फल और सब्जियों की नई प्रजातियों का अवलोकन किया। कुलपति प्रो. नरेन्द्र प्रताप सिंह ने अपने संबोधन में बताया कि इस मेले में बुन्देलखंड के कई जिलों से लगभग 7000 किसानों ने भाग लिया और गेहूं, चना, मसूर और सरसों की उन्नत प्रजातियों के बीज क्रय किए।

मेले के दौरान आयोजित प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले किसानों को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। फसल प्रतियोगिता में श्री देव सिंह, राठ को प्रथम पुरस्कार मिला, जबकि फल और सब्जी प्रतियोगिताओं में भी किसानों ने शानदार प्रदर्शन किया। पशु श्रेणियों में भी कई किसानों को सम्मानित किया गया, जिनमें श्री सीताराम को देशी गाय श्रेणी में, श्री रामपाल को भैंस श्रेणी में और श्री रंजीत कुमार को वयस्क बकरी श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से नवाजा गया।

समाप्ति समारोह के दौरान वैज्ञानिकों और किसानों के बीच संवाद का आयोजन किया गया, जिसमें कृषि से संबंधित तकनीकी विषयों पर चर्चा की गई। कार्यक्रम का संचालन डॉ. बी.के. गुप्ता, डॉ. धीरज मिश्रा और डॉ. जगन्नाथ पाठक ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सह निदेशक प्रसार डॉ. नरेन्द्र सिंह द्वारा प्रस्तुत किया गया।

बुन्देलखंड क्षेत्र में प्राकृतिक और गौ आधारित खेती के प्रति बढ़ती जागरूकता और किसानों के उत्साह ने यह दर्शाया कि कृषि के क्षेत्र में यह मेला उनके लिए एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ है।

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