बुन्देलखण्ड के बाँदा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हैं 4 गहरे नाते, क्या आपको पता है?

 देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदरदास मोदी का बुन्देलखण्ड के जनपद बांदा से किसी न किसी मायने में गहरा नाता है...

बुन्देलखण्ड के बाँदा से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हैं 4 गहरे नाते, क्या आपको पता है?
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का बांदा से है गहरा नाता

मुख्यमंत्री से लेकर प्रधानमंत्री तक उनका जुड़ाव बांदा से बना हुआ है। आज भी जब अयोध्या में श्री राम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन का अनुष्ठान हुआ, उस अनुष्ठान में भी उनका बाँदा से गहरा जुड़ाव नजर आया।

पहला नाता
गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के पहले से लेकर प्रधानमंत्री तक के सफर में नरेन्द्र मोदी का बाँदा से नाता जुड़ा हुआ है। जब वह गुजरात के मुख्यमंत्री भी नहीं बने थे, तब से उनके निजी सहायक के रूप में जिस व्यक्ति ने कार्यभार संभाला वह बाँदा जनपद के ओ. पी. सिंह चन्देल हैं। जब से वो उनके निजी सहायक बने तब से नरेन्द्र मोदी ने पीछे मुड़कर नहीं देखा, और तीन बार गुजरात के मुख्यमंत्री और फिर दूसरी बार प्रधानमंत्री पद का दायित्व संभालकर देशसेवा में संलग्न हैं। सरस्वती विद्या मन्दिर में ओ.पी. सिंह के सहपाठी और बुन्देलखण्ड न्यूज के प्रधान सम्पादक सचिन चतुर्वेदी ने भी बताया कि ओ.पी. सिंह शुरू से ही पढ़ाई में तेज थे, तभी उनका चयन नरेन्द्र मोदी के निजी सचिव के लिए किया गया। ओ.पी. सिंह सन् 1998 में नरेन्द्र मोदी के साथ जुड़े।

दूसरा नाता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का दूसरा नाता तब जुड़ा जब वह पिछले वर्ष 2019 में प्रयागराज के महाकुम्भ मेले में पहुंचे और उन्होंने जब कुछ सफाई कर्मियों के पैर अपने हाथों से धोए थे। ये एक बड़ी चर्चा रही कि किसी देश के प्रधानमंत्री ने समाज के निम्नवर्ग में गिने जाने वाले स्वच्छकारों के पैर धोये थे। प्रधानमंत्री मोदी ने कुल पाँच स्वच्छता कर्मियों के पैर धोये, जिसमें से 4 स्वच्छता कर्मी जनपद बांदा के ही निवासी थे।

जनपद के बबेरू क्षेत्र के वो चारों सफाई कर्मी जिनमें एक महिला भी थी, उन्हें एक बारगी अचम्भा भी हुआ था, जब उन्हें यह पता चला कि प्रधानमंत्री मोदी उनके पैर धोयेंगे। इतिहास में यह पहली बार हुआ था, और यही मोदी की खास बात थी, जिसके लिए पूरा स्वच्छकार समाज उनका ऋणी हो गया था। बुन्देलखण्ड न्यूज ने भी जब उन सफाई कर्मियों के गांव जाकर उनसे पूंछा था तो उन्होंने अपने पूरे अनुभव हमसे शेयर किये थे।

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तीसरा नाता
सन् 2019 की गर्मी थी, जब देश में लोकसभा चुनाव की लहर थी। तब बाँदा में एक अलग ही लहर चल रही थी, जिसने बाँदा का नाम लोकसभा चुनाव के इतिहास में अमर कर दिया। और यह कार्यक्रम था ‘90$ वोटिंग अभियान’ का, जिसे पूरी शिद्दत के साथ निभा रहे थे, तत्कालीन जिलाधिकारी डाॅ. हीरा लाल। डाॅ. हीरा लाल ने बाँदा के जन सामान्य के साथ मिलकर पूरे बाँदा जनपद में वो माहौल बना दिया था, जिसकी कल्पना करना मुश्किल था।

चुनाव आयोग जिस वोटिंग परसेंटेज को बढ़ाने के लिए लाखों करोड़ों झोंक देता है, उसे डाॅ. हीरा लाल ने बहुत ही सीमित प्रशासनिक खर्चे में करके दिखाया था। इस बात की तारीफ स्वयं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बाँदा की एक जनसभा में की। बाद में आये रिजल्ट ने बाँदा के साथ पूरे देश को चैंकाया था, जब बाँदा ने अप्रत्याशित रूप से पिछले चुनाव की तुलना में पूरे देश में सबसे ज्यादा बढ़त दर्ज कराई थी। ये डाॅ. हीरा लाल का ही प्रयास था, जिसे प्रधानमंत्री मोदी के उत्साहवर्धन ने दोगुना कर दिया था।

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चौथा नाता
सन् 2019 के नवम्बर में जैसे ही उच्चतम न्यायालय का फैसला श्रीरामजन्मभूमि मन्दिर के निर्माण के लिए आया तो मानो पूरा देश राममय हो गया था। तब से लेकर अब, जब श्री राम का मन्दिर बनने की शुरूआत हुई है, हर रामभक्त बेचैन था। पर जब शुभ घड़ी आई तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी मुख्य यजमान बने, और उन्हें भूमि पूजन कराते हुए बाँदा के ही प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी का नाम सर्वाधिक प्रसिद्ध हुआ।

हर जगह इसी बात की चर्चा थी कि लगभग 500 वर्ष के बाद जो मौका यहां की अधिकांश जनता चाह रही थी, उसका शुभ मुहूर्त आ चुका था, पर कोरोना के कारण सभी का वहां पहुंच पाना नामुमकिन हो गया था। यहां तक कि इस बहुप्रतीक्षित कार्यक्रम में गिनती के लोगों को आमंत्रण भेजा गया था। उसमें भी भूमि पूजन अनुष्ठान संपन्न कराने में जो विद्वान शामिल थे उनमें प्रमुख नाम बाँदा के निवासी और वाराणसी में काशी विद्वत परिषद के संयोजक/मंत्री प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी भी थे। उन्होंने अपने सहयोगियों के साथ मिलकर भूमि पूजन कार्यक्रम मंत्रोच्चार के साथ सम्पन्न कराया। इस कार्यक्रम में प्रोफेसर राम नारायण द्विवेदी ने प्रधानमंत्री मोदी के बगल में बैठकर उन्हें शास्त्रोक्त पूजन विधि के साथ उनके द्वारा शिला पूजन इत्यादि कार्यक्रम पूरे विधि-विधान के साथ सम्पन्न कराये।

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इस प्रकार यह एक संयोग ही कहा जायेगा कि यहां से दूर-दूर का कोई नाता न होने के बावजूद भी देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र दामोदरदास मोदी ने बाँदा के साथ चार प्रकार के नाते बना लिये हैं। ये सचमुच बाँदा और बुन्देलखण्ड के लिए गौरव की बात है।