सामाजिक कार्यकर्ता को हिरासत में रखने पर, एसपी समेत तीन पुलिसकर्मियों को जुर्माना

जनपद चित्रकूट में एक सामाजिक कार्यकर्ता को थाने में बुलाकर रात भर रख कर टॉर्चर करना पुलिस को महंगा पड़ गया है..

Feb 21, 2022 - 05:26
Feb 21, 2022 - 05:31
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सामाजिक कार्यकर्ता को हिरासत में रखने पर, एसपी समेत तीन पुलिसकर्मियों को जुर्माना

बांदा,

जनपद चित्रकूट में एक सामाजिक कार्यकर्ता को थाने में बुलाकर रात भर रख कर टॉर्चर करना पुलिस को महंगा पड़ गया है। इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अंकित मित्तल व दो दरोगाओं को दोषी मानते हुए उन्हें 50,000 रुपए जुर्माना कर क्षतिपूर्ति की राशि पीड़ित सामाजिक कार्यकर्ता को देने के निर्देश दिए हैं। 

जनपद चित्रकूट के भरतकूप में चल रहे क्रेशर उद्योग में महिला मजदूरों के यौन उत्पीड़न का मामला सन 2020 में एक चौनल द्वारा प्रमुखता से दिखाया गया था। जिसमें प्रशासन की किरकिरी हुई थी। इस मामले में पुलिस ने विद्या धाम समिति नरैनी रोड अतर्रा जनपद बांदा निवासी सामाजिक कार्यकर्ता राजा भैया को उनके कार्यालय से हिरासत में लेकर थाने में रख कर रख कर टार्चर करते हुए रात भर पूछताछ की थी। पुलिस का मानना था न्यूज़ चौनल में दिखाई जा रही खबर, उनके द्वारा बताई गई थी। हालांकि बाद में कोई प्रमाण न मिलने पर इन्हें छोड़ दिया गया था। 

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इस पर सामाजिक कार्यकर्ता राजा भैया ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में रिट पिटिशन दायर कर आरोप लगाया था कि पुलिस ने उन्हें गैरकानूनी ढंग से हिरासत में लेकर थाने में टॉर्चर किया। उन्होंने इस मामले की जांच कर दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग द्वारा पूरे प्रकरण की सुनवाई के बाद एसपी सहित तीन पुलिसकर्मियों को दोषी माना और राज्य सरकार को निर्देश दिए गए हैं कि इस मामले में तत्कालीन एसपी चित्रकूट अंकित मित्तल ,दरोगा संजय उपाध्याय व पंकज मिश्रा दोषी हैं। इनसे 50000 रुपए की धनराशि अंतरिम सहायता के रूप में भुगतान किए जाने की स्वीकृति प्रदान की गई है।

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इस धनराशि की प्रतिपूर्ति प्रकरण में दोषी पुलिसकर्मियों पर नियमानुसार कार्रवाई कर उन पर वसूली का दण्ड निरूपित करके नियमानुसार वसूली कर राजकोष में जमा कराई जाए। आयोग के निर्देश पर गृह सचिव उत्तर प्रदेश द्वारा बांदा पुलिस को धनराशि वसूल कर शिकायतकर्ता को देने के निर्देश दिए गए हैं।

जिसके आधार पर बांदा पुलिस अधीक्षक द्वारा थाना अध्यक्ष अतर्रा को कार्यवाही करने को कहा गया है। जब इस संबंध में अतर्रा पुलिस द्वारा सामाजिक कार्यकर्ता से संपर्क कर जानकारी दी गई। तब सामाजिक कार्यकर्ता को इस मामले की जानकारी हुई। उन्होंने मानवाधिकार आयोग द्वारा की गई इस कार्रवाई को मानव अधिकार की रक्षा का एक और कदम बताया गया है।\

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