चित्रकूट : गड्ढा मुक्त सड़क के सरकारी दावे की पोल खोल रहे संपर्क मार्ग

रामनगर तुम्हारी फाइलों मे गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे ये दावा किताबी है।मशहूर शायर..

चित्रकूट : गड्ढा मुक्त सड़क के सरकारी दावे की पोल खोल रहे संपर्क मार्ग

तुम्हारी फाइलों मे गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे ये दावा किताबी है  

रामनगर तुम्हारी फाइलों मे गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे ये दावा किताबी है।मशहूर शायर अदब गोंडवी की उक्त पक्तियां सरकार गड्ढा मुक्त दावो की सही तस्वीर प्रस्तुत कर रही हैं।कहते है सड़कें गांवों के विकास की जीवन रेखा हैं  लेकिन क्षेत्र के लगभग आधा दर्जन सम्पर्क मार्गों की हालत इस कदर बदतर है कि उन पर पैदल चलना तक कठिन है।

प्रदेश सरकार के गड्ढा मुक्त मार्गों के दावे को झुठलाने के लिए इन सड़कों की वर्तमान स्थिति काफी है। जनपद का एक ब्लाक व बाजार होने के नाते रामनगर कस्बे का जुडा़व लगभग एक दर्जन गांवों से है।चाहे बाजार हाट करना हो, किसी की दवा करानी हो या बच्चों की पढ़ाई हो, या ब्लाक का कार्य हो प्रायः इन सभी चीजों के लिए लोगों को रामनगर आना ही है।

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यही नही जिला मुख्यालय या अन्य शहरों मे जाने के लिए भी लोगों को यहां वाहन पकड़ने के लिए आना है।यहां आने के लिये विभिन्न गांवों से आधा दर्जन सम्पर्क मार्गों का जाल है।सम्पर्क मार्गों की हालत यह है कि मार्गों मे गड्ढे हैं कि गड्ढों मे मार्ग है यह बता पाना कठिन है।सबसे ज्यादा परेशानी तो छोटे छोटे स्कूली बच्चों को होती है।कब इन मार्गों पर चलने से वह चोटिल हो जायें इस बात से उनके माता पिता बराबर सशंकित रहते हैं।यही हाल गम्भीर मरीज़ों व उनके सहायकों की है।

प्रदेश सरकार ने सड़कों को गड्ढा मुक्त करने का अभियान चलाया था जरूर लेकिन उसका लाभ इस क्षेत्र विशेष को नही मिला। रामनगर से  बसिंहा,बुध्वल,बारिया,देवहटा, गोबरौल,उफरौली, बिल्हौरा,चाहटा,नॉनवाई, आदि जैसे आधा दर्जन से अधिक मार्गों की हालत इस कदर जर्जर है कि उसे मार्ग कहने मे भी शर्म महसूस हो रहा है।क्षेत्र का एक महत्वपूर्ण गांव रामपुर ग्राम पंचायत अंतर्गत बेलरी मजरे  तक मुख्य मार्ग से जोड़ने वाला पगडंडी सम्पर्क मार्ग भी डूब क्षेत्र गुंता बांध के पानी मे समाया हुआ है जँहा आज भी लोग नावों का सहारा लेकर रैपुरा आकर अपने गंतव्य जाने की यात्रा करते हैं।

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इस मजरे में जाने के लिए मुख्यमार्ग से कई किलोमीटर का चक्कर काट कर बड़े मुश्किल से वाहन पहुच पाता है, जिसके चलते एम्बुलेंस में जाने वाले मरीजों को यमलोक जाने जैसी परिस्थितियों का सामना करना पड़ता हैं,

वही ग्राम प्रधान रामपुर श्रीमती निर्मला देवी द्वारा बेलरी सम्पर्क मार्ग बनवाये जाने को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों को पत्र दिया गया जिस कर्मचारियों द्वारा मौका मुआयना करने के बाद भी आज तक सम्पर्क मार्ग में कार्य नहीं हुआ।बताते चले यह वही गांव बेलरी है जँहा ग्रामीणों ने पिछली विधानसभा सभा चुनाव में वोट वाहिकर का प्रदर्शन किए थे,ग्रामीणों की माने तो आज तक यँहा कोई जनप्रतिनिधि मजरे में झांकने तक नही आया। योगी सरकार के चार साल बीतने के बाद भी चित्रकूट में गड्ढामुक्त के दावे हो रहे हैं पूरी तरफ फेल।मुख्य मार्गो से निकलने वाली लग्जरी चमचमाती गाड़ियों के भीतर बैठे जिम्मेदारों को काले चश्मे से बाहर की गाँवो को जोड़ने वाली सड़कें क्यों नही दिखाई दे रही..?

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