बुन्देलखण्ड के बाजारों में वर्षों से चली आ रही साप्ताहिक बंदी अब नहीं होगी, बदल गया नियम

बचपन से ही हम सभी कभी मंगलवार, तो कहीं बुधवार, या बृहस्पतिवार को होने वाली बाजार की साप्ताहिक बंदी सुनते और देखते आ रहे हैं। श्रम कानून के मुताबिक सप्ताह में एक दिन प्रतिष्ठान बंद रखना अनिवार्य है। पर अब यह नियम बदलने जा रहा है।

बुन्देलखण्ड के बाजारों में वर्षों से चली आ रही साप्ताहिक बंदी अब नहीं होगी, बदल गया नियम

साप्ताहिक बंदी का क्रम तो बदलेगा ही दिन भी बदल जायेगा। और ये सब कोरोना के कारण हो रहा है। बुन्देलखण्ड सहित यूपी के तमाम शहरों में साप्ताहिक बंदी होती आ रही है।

उद्देश्य यह था कि एक दिन ऐसा भी हो जब बाजार के दुकानदारों को भी आराम मिले। प्रतिष्ठानों पर कार्य करने वाले कुशल, अकुशल व अर्द्धकुशल श्रमिकों को श्रम कानून के मुताबिक सप्ताह में एक दिन अवकाश देने का प्रावधान है, जिससे उसे शारीरिक व मानसिक तौर पर आराम मिल सके। साथ ही बाजार पर अनावश्यक दबाव कम हो। लोग चैन से अपने-अपने घरों में बैठें और परिवार के साथ एन्जाॅय करें। घूमें-फिरें, मजे करें। आखिर जिन्दगी यूं ही थोड़े न काट देंगे। दो जून की रोटी के चक्कर में घर-परिवार को यदि भूल गये तो जिन्दगी नीरस हो जायेगी। 

किसी किसी शहर में तो कई बाजार होते हैं जहां सप्ताह में दो-तीन दिन अलग-अलग बाजारों के हिसाब से साप्ताहिक बंदी होती थी, पर अब यह गुजरे जमाने की बात होने जा रही है। कहते हैं कि समय एक समय बाद करवट लेता है, जिसमें तमाम नियम, कायदे, कानून बदल दिये जाते हैं, और वही अब हो रहा है। समय की यह करवट ऐसी है कि पूरे देश क्या पूरा विश्व समय की इस करवट से हतप्रभ है। कोरोना ने हम सबके जीवन जीने का तरीका ही बदल दिया है। तभी तो यूपी सरकार ने कोरोना के बढ़ते प्रभाव के चलते सप्ताह में दो दिन आवश्यक बंदी करने का निर्णय ले लिया है, जिसके बाद अब से सप्ताह में पांच दिन केवल बाजार दफ्तर खुलेंगे। यानि शनिवार और रविवार को छुट्टी। घर में छुट्टी एन्जाॅय कीजिये और बाकी के पांच दिन जी भरके काम।

इसी कारण पहले होने वाली अलग अलग साप्ताहिक बंदियां भी स्वतः समाप्त हो जायेंगी। हालांकि इस आशय के लिए अभी कोई सूचना जारी नहीं हुई है पर यह होगा। क्योंकि यदि सप्ताह में दो दिन की साप्ताहिक बंदी के बाद भी पूर्व की भांति अन्य दिनों वाली साप्ताहिक बंदी की जाती रहेगी तो बेचारे दुकानदार व खुदरा व्यापारी क्या करेंगे। तीन दिन दुकान बंद करके आखिर वो कैसे अपना और अपने परिवार का पेट चलायेंगे? इसी को देखते हुए कोरोना और अर्थव्यवस्था में सामंजस्य बनाते हुए यूपी सरकार यह निर्णय लेने जा रही है। जो निश्चित ही व्यापारी भाईयों के हित में होगा।