बुन्देली लोकगीत के चितेरे देशराज पटेरिया अब नहीं रहे

प्रसिद्ध कलाकार देशराज पटेरिया छतरपुर जिले एवं बुंदेलखंडी नहीं बल्कि देश विदेश में भी अपनी बुंदेली लोकगीतों की प्रस्तुति से धमाल मचा चुके हैं।आज जैसे ही उनके निधन की खबर आई तो पूरे बुंदेलखंड में लोग स्तब्ध रह गए...

बुन्देली लोकगीत के चितेरे देशराज पटेरिया अब नहीं रहे

मगरे पर बोल रहा था कौऊवा....लगा तेरे मायके से आ गए लिबऊआ.... वो किसान की लली...खेत खलिहान को चली..., जैसे सैकड़ों श्रंगार ,भक्ति एवं वीर रस आल्हा पर लोकगीत गाकर  बुन्देलखंड के लोगों के दिलों में राज करने वाले लोकगीत गायक देशराज पटेरिया अब हमारे बीच नहीं रहे।शनिवार को तड़के 3:15 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली। 4 दिन पहले छतरपुर के मिशन अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से पटेरिया वेंटिलेटर पर थे वे 67 वर्ष के थे।

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प्रसिद्ध कलाकार देशराज पटेरिया छतरपुर जिले एवं बुंदेलखंडी नहीं बल्कि देश विदेश में भी अपनी बुंदेली लोकगीतों की प्रस्तुति से धमाल मचा चुके हैं।आज जैसे ही उनके निधन की खबर आई तो पूरे बुंदेलखंड में लोग स्तब्ध रह गए। अपने गायन में श्रंगार भक्ति और वीर रस खासकर आल्हा गीतों को जब वह मंच के माध्यम से प्रस्तुत करते थे तो लोगों की भुजाएं फड़क उठती थी।उन्होंने गायन में हमेशा उत्कृष्टता और जीवंत कला को समर्पित किया।

पटेरिया को बुंदेलखंड सहित लोक गायकी के क्षेत्र में लोकगीत सम्राट के रूप में जाना जाता है। उनके निधन से अंचल ने एक महान लोकगीत गायक खो दिया है। उनके पार्थिव शरीर का अंतिम संस्कार आज भेसासुर मुक्तिधाम में किया जाएगा।

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बुंदेलखंड के लोकगीत सम्राट कहे जाने वाले पंडित देशराज पटेरिया का जन्म 25 जुलाई 1953 में छतरपुर जिले की तिंदनी गांव में हुआ था। चार भाइयों और दो बहनों में वह सबसे छोटे थे। हायर सेकेंडरी पास करने के बाद इन्होंने प्रयाग संगीत समिति से संगीत में प्रभाकर की डिग्री हासिल की। इसी बीच पंडित श्री पटेरिया की नौकरी स्वास्थ्य विभाग में लग गई थी। लेकिन इनका मन बुंदेली लोकगीत गाने में ज्यादा रहता था। इसी कारण वह दिन में नौकरी करते थे और रात में बुंदेली लोकगीतों में भाग लेते थे। वर्ष 1972 में उन्होंने मंचों से लोकगीत गाना शुरू कर दिया। लेकिन उनको असली पहचान वर्ष 1976 में छतरपुर आकाशवाणी ने दी। जब उनके लोकगीत आकाशवाणी से प्रसारित होने लगे, तो बुंदेलखंड में उनकी पहचान धीरे-धीरे बढ़ने लगी।

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वर्ष 1980 आते-आते उनके लोकगीतों की कैसेट मार्केट में आ गए। जो बुंदेलखंड में फिल्मी गीतों की जगह बुंदेली गीत बजने लगे या कहें देशराज पटेरिया के लोकगीतों के जादू हर बुंदेलखंड वासी की जुबां दिखने लगा। इसके बाद उन्होंने बुंदेलखंड के आल्हा हरदौल ओरछा इतिहास के साथ-साथ रामायण से जुड़े हास्य, श्रृंगार संवाद से जुड़े संवाद के भी लोकगीत गाए हैं।बुंदेलखंड में आज उनके नाम सबसे ज्यादा लोकगीत गाने कार्यक्रम है। पंडित श्री पटेरिया अभी तक 10000 से ज्यादा लोक गीत गा चुके हैं। बुंदेली फोक के लिए चर्चित पंडित श्री पटेरिया फिल्मी गायक मुकेश को अपना आदर्श मानते थे।