चना, मटर व सरसों में फफूंद व माहू कीट का बढ़ा प्रकोप
बांदा। बुंदेलखंड क्षेत्र के किसान एक बार फिर मौसम की मार से चिंतित हैं। पिछले करीब पंद्रह दिनों से छाए घने कोहरे और कड़ाके की ठंड ने रबी फसलों को भारी नुकसान पहुंचाना शुरू कर दिया है। दिनभर धूप न निकलने और रात के समय पाला पड़ने से सरसों, चना, मटर, मसूर और अरहर जैसी फसलों के फूल झड़ने लगे हैं, जिससे उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार लगातार गिरते तापमान और वातावरण में 70 से 100 प्रतिशत तक बनी नमी के कारण फसलों में झुलसा रोग, फफूंद और कीटों का प्रकोप तेजी से बढ़ रहा है। विशेषकर दलहन और तिलहन फसलें इस मौसम में अधिक प्रभावित हो रही हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों से चिंताजनक हालात
पैलानी, नरैनी और अतर्रा क्षेत्र से आ रही सूचनाएं हालात की गंभीरता बयां कर रही हैं। खप्टिहा कलां के किसान मनोज पांडे का कहना है कि अरहर, मटर और सरसों में फूल झड़ने लगे हैं, वहीं कुछ खेतों में पौधे सूखने की स्थिति में हैं। चने की फसल में “जोरई” कीट के प्रकोप से फल अंदर से खोखले हो रहे हैं।
नरैनी क्षेत्र के किसानों ने भी सरसों और चने में “माहू” और “जुरई” कीट लगने की पुष्टि की है, जिससे पैदावार में भारी कमी की आशंका है। किसानों का कहना है कि खरीफ की फसल पहले ही अतिवृष्टि से प्रभावित हो चुकी थी और अब रबी फसल पर भी संकट गहरा गया है।
धूप की कमी से रुक रही बढ़वार
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही बर्फबारी से मैदानी इलाकों में ठंड और कोहरा और बढ़ने की संभावना है। धूप कम मिलने या न मिलने से प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित हो जाती है, जिससे पौधों की बढ़वार रुक जाती है और फूल झड़ने लगते हैं। अत्यधिक नमी की स्थिति कीटों और रोगों के लिए अनुकूल मानी जाती है।
पिछले दिनों का तापमान (डिग्री सेल्सियस में)
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सोमवार : न्यूनतम 7.0, अधिकतम 17.1
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मंगलवार : न्यूनतम 7.45, अधिकतम 17.0
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बुधवार : न्यूनतम 7.4, अधिकतम 16.2
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बृहस्पतिवार : न्यूनतम 8.30, अधिकतम 17.8
कृषि विभाग ने बताए बचाव के उपाय
उप निदेशक कृषि ने किसानों को सलाह दी है कि गेहूं की फसल में सिंचाई के बाद यूरिया का प्रयोग अवश्य करें। चना और मटर में फफूंद रोग की स्थिति में मैनकोजेब या कार्बेंडाजिम का छिड़काव करें। सरसों में माहू कीट के प्रकोप पर अनुशंसित कीटनाशकों का प्रयोग किया जा सकता है। इसके अलावा पाले से बचाव के लिए फसलों में धुआं करना और हल्की सिंचाई करना भी लाभकारी बताया गया है।
कृषि विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी दवा या कीटनाशक का प्रयोग कृषि रक्षा अधिकारी की सलाह के बिना न करें, ताकि फसलों को और अधिक नुकसान से बचाया जा सके।
Source: Amar Ujala