धूमधाम से निकली शाही यात्रा, मत्यगयेन्द्रनाथ का किया जलाभिषेक
महाशिवरात्रि के पावन महापर्व एवं अमृत महाकुंभ के पुण्यतम सुयोग पर तीर्थक्षेत्र के संत महात्माओं ने गाजेबाजे, धूमधाम...
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मां मंदाकिनी गंगा में अमृत शाही स्नान की हुई भव्य शुरुआत
चित्रकूट। महाशिवरात्रि के पावन महापर्व एवं अमृत महाकुंभ के पुण्यतम सुयोग पर तीर्थक्षेत्र के संत महात्माओं ने गाजेबाजे, धूमधाम के साथ रथ, बग्घी में सिंहासनारूढ़ होकर भव्य शाही यात्रा निकाली। रामघाट मंदाकिनी गंगा में अमृत शाही डुबकी लगाकर पूजन अर्चन किया।
विरक्त संत मण्डल के आयोजन एवं मां मंदाकिनी सेवा ट्रस्ट के संयोजन में आयोजित इस धार्मिक आयोजन में विभिन्न अखाड़े, मठ मंदिरों के लगभग छह सौ संत, महंत, नागा साधू-महात्मा शाही यात्रा, स्नान एवं संत सभा में सम्मिलित रहे। जिनमें महंत सनकादिक ब्रम्हचारी जी महाराज, सीताशरण दास जी महाराज, रामहृदय दास जी महाराज, गोविंददास जी महाराज, बलराम दास जी महाराज, रामप्यारे दास जी महाराज, प्रेमनारायण दास, पागल बाबा, दिनेश दास, रामबली दास, माधवदास जी महाराज, रामप्रिय दास, रामकुमार दास, राघव दास, बालकदास जी महाराज, रामदास, नागा नरसिंह दास, मोहनदास, मनोज दास, अजयदास आदि मौजूद रहे। मां मंदाकिनी गंगा में संत विभूतियों द्वारा पहली बार शाही स्नान किया गया है। इसे मंदाकिनी गंगा में स्नान की नयी परंपरा का यहां श्रीगणेश माना जा रहा है। उल्लेखनीय है कि मां मंदाकिनी गंगा एकमात्र ऐसी पुनीत नदी है जो एक स्त्री, एक सती अर्थात माता अनुसुइया के तपोबल से प्रकट हुई है। भारतीय वांग्मय में मंदाकिनी का व्यापक महात्म मिलता है। मंदाकिनी गंगा में पांच नदियों का संगम स्थल पंचमप्रयाग भी कहलाता है। यह भी धार्मिक मान्यता है कि तीर्थराज प्रयाग जब मानवों के पापों की अधिकता से प्रभावित हो जाते हैं तो मंदाकिनी में स्वयं आकर स्नान करते हैं और पापों के भार से मुक्त हो जाते हैं। यहां शाही स्नान की परंपरा से इसकी महत्ता, स्वच्छता और पवित्रता को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए भी बल मिलेगा। शाही स्नान के उपरांत नगर परिषद पार्क में संतों ने विशाल सभा की, जिसमें मंदाकिनी में शाही स्नान परंपरा के विकास तथा चित्रकूटधाम के आध्यात्मिक, धार्मिक विकास पर संतों ने विचार विमर्श किया।
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