बाँदा : यूजीसी कानून पर गरमाई सियासत : अधिवक्ता अशोक त्रिपाठी ‘जीतू’ का केंद्र सरकार पर सीधा हमला
यूजीसी कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में उठ रहे विरोध के बीच अधिवक्ता संघ एवं भाजपा के पूर्व...
कानून को बताया छात्र विरोधी, प्रधानमंत्री से कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल को बर्खास्त करने की मांग
संविधान की मूल भावना से खिलवाड़ का आरोप
बांदा। यूजीसी कानून को लेकर राजनीतिक और सामाजिक हलकों में उठ रहे विरोध के बीच अधिवक्ता संघ एवं भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी ‘जीतू’ ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने इस कानून को छात्र विरोधी करार देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग की है।
अशोक त्रिपाठी जीतू ने कहा कि यूजीसी कानून के माध्यम से देश के मेधावी और सामान्य छात्रों को अनावश्यक रूप से फंसाने की साजिश रची जा रही है। उन्होंने आश्चर्य जताते हुए सवाल किया कि देश के कानून मंत्री को आखिर हो क्या गया है, जो संविधान की मूल भावना को दरकिनार कर इस तरह का कानून देश पर थोप दिया गया। उनका कहना था कि कानून ऐसा होना चाहिए जिससे छात्र सुरक्षित रहें, न कि ऐसा जिसमें निर्दोष छात्रों को झूठे मामलों में उलझाया जाए।
पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष ने कहा कि यदि कोई छात्र किसी दूसरे छात्र को परेशान करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन यूजीसी कानून के तहत सामान्य और मेधावी छात्रों को भी झूठे मामलों में फंसाने का रास्ता खोल दिया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब झूठे आरोप लगाने वालों के खिलाफ कोई स्पष्ट कार्रवाई का प्रावधान ही नहीं है, तो यह कैसी न्याय व्यवस्था है। उन्होंने इसे एक देश में दो अलग-अलग कानून व्यवस्था चलने जैसा करार दिया।
अशोक त्रिपाठी जीतू ने आरोप लगाया कि इस कानून के माध्यम से संविधान की आत्मा—समानता और न्याय को ही किनारे कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि समान अधिकारों की बात करने वाला संविधान ऐसे भेदभावपूर्ण कानून की अनुमति नहीं देता।
अधिवक्ता संघ के पूर्व अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने का आग्रह किया। उन्होंने यूजीसी कानून को तुरंत प्रभाव से वापस लेने तथा केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन मेघवाल को मंत्रिमंडल से बर्खास्त करने की मांग दोहराई। उनका कहना था कि यदि इस कानून को समय रहते नहीं रोका गया, तो यह देश की शिक्षा व्यवस्था के साथ-साथ सामाजिक सौहार्द को भी गंभीर क्षति पहुंचा सकता है।
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