14 वर्षों से शोषण का आरोप, सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुपालन की मांग को लेकर अनुदेशकों का क्रमिक अनशन
प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशक शिक्षकों ने सरकार पर पिछले 14 वर्षों से उनके विधिक एवं मौलिक अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है...
अंबेडकर पार्क में अनुदेशक शिक्षकों ने किया प्रदर्शन, वेतन व अन्य सुविधाएं लागू करने की उठाई मांग
बांदा। प्रदेश के उच्च प्राथमिक विद्यालयों में कार्यरत अनुदेशक शिक्षकों ने सरकार पर पिछले 14 वर्षों से उनके विधिक एवं मौलिक अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन की मांग को लेकर अनुदेशक शिक्षकों ने सोमवार को अंबेडकर पार्क में प्रथम क्रमिक अनशन किया।
अनुदेशकों का कहना है कि उनका मामला लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया से गुजरने के बाद सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। उनके अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय ने 4 फरवरी 2026 को अपने 46 पृष्ठों के निर्णय में अनुदेशक शिक्षकों के संबंध में फैसला सुनाते हुए सरकार को बकाया एरियर सहित शिक्षकों के समान वेतन एवं अन्य सुविधाएं प्रदान करने के निर्देश दिए हैं। अनुदेशकों ने यह भी कहा कि सरकार की ओर से दायर पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बावजूद अब तक निर्णय के अनुपालन के लिए शासनादेश जारी नहीं किया गया है।
ज्ञापन और पैरवी के बाद शुरू किया अनशन
अनुदेशक शिक्षकों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्णय को लागू कराने के लिए वे कई बार ज्ञापन देकर और संबंधित स्तरों पर पैरवी कर चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। इससे अनुदेशकों में निराशा और आक्रोश है।
अपनी मांगों को लेकर अनुदेशक अब सत्य और अहिंसा के मार्ग पर आंदोलन कर रहे हैं। इसी क्रम में बांदा के अंबेडकर पार्क में प्रथम क्रमिक अनशन आयोजित किया गया। अनशन का शुभारंभ दोपहर 12 बजे प्रार्थना और राष्ट्रगान के साथ हुआ। इसके बाद करीब सवा दो बजे एलआईयू को ज्ञापन सौंपा गया।
कई अनुदेशक रहे मौजूद
क्रमिक अनशन में जिलाध्यक्ष चंद्र सेन सिंह, उपाध्यक्ष शशिकांत, सुधीर कुमार, मंत्री बाल किशन, मनीष कुमार, संयोजक आनंद यादव, राजकिशोर सचिन, रमाकांत यादव, विवेक यादव, रमेश यादव, विमल कुमार, महेश कुमार, शिवधीर सोनी सहित अन्य अनुदेशक शामिल रहे।
महिला विंग से आराधना विमल, क्रांति साहू और नीलम देवी ने भी आंदोलन में भाग लिया। अनुदेशकों ने सरकार से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का शीघ्र अनुपालन करते हुए बकाया एरियर, वेतन और अन्य सुविधाओं से संबंधित आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की।
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