बाँदा : 16 साल पुराने गैंगस्टर एक्ट मामले में अभियुक्त को 3 साल की कठोर कारावास की सजा
करीब 16 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में न्यायालय ने अभियुक्त वरुण प्रताप सिंह पुत्र स्व. सुरेंद्र प्रताप सिंह, निवासी कांशीराम कॉलोनी, थाना कोतवाली नगर...
विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट ने सुनाया फैसला, ₹6 हजार अर्थदंड; न देने पर दो माह का अतिरिक्त कारावास
बांदा। करीब 16 वर्ष पुराने गैंगस्टर एक्ट के मामले में न्यायालय ने अभियुक्त वरुण प्रताप सिंह पुत्र स्व. सुरेंद्र प्रताप सिंह, निवासी कांशीराम कॉलोनी, थाना कोतवाली नगर, बांदा को दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास और 6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई है। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट) श्रीपाल सिंह ने शुक्रवार को फैसला सुनाया।
अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में अभियुक्त को दो माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा। फैसला सुनाए जाने के बाद अभियुक्त को न्यायिक अभिरक्षा में लेकर सजा भुगतने के लिए जिला कारागार बांदा भेज दिया गया।
2014 में दर्ज हुआ था मुकदमा
विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह के अनुसार, थाना कोतवाली नगर में तत्कालीन वादी विवेकानंद तिवारी की ओर से वर्ष 2014 में मु.अ.सं. 475/2014, धारा 2/3 उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत मुकदमा दर्ज कराया गया था।
अभियोजन के अनुसार अभियुक्त एक संगठित आपराधिक गिरोह से जुड़ा था। गिरोह के सदस्य संगठित रूप से आपराधिक गतिविधियों के जरिए आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करते थे तथा क्षेत्र में भय और आतंक का माहौल पैदा करते थे। अभियुक्त के आपराधिक इतिहास और आधारभूत मुकदमों के आधार पर गैंग चार्ट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदित कराया गया था।
छह गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर दोषसिद्धि
मामले की विवेचना उप निरीक्षक कमलेश सिंह यादव ने की। विवेचना के दौरान आपराधिक इतिहास, गैंग चार्ट, एफआईआर, जीडी कायमीनामा, आधारभूत मुकदमों से संबंधित अभिलेख और अन्य दस्तावेजी साक्ष्य जुटाए गए। विवेचना पूरी होने के बाद आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया गया।
न्यायालय ने 17 अगस्त 2015 को अभियुक्त के विरुद्ध आरोप निर्धारित किए। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से कुल छह मौखिक गवाहों का परीक्षण कराया गया। साथ ही गैंग चार्ट, एफआईआर, जीडी कायमीनामा, आरोपपत्र और अभियोजन स्वीकृति समेत महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए गए।
प्रभावी पैरवी से पहुंचा मुकदमा तार्किक निष्कर्ष तक
विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों को न्यायालय के समक्ष रखा। अभियोजन ने तर्क दिया कि उपलब्ध साक्ष्यों से अभियुक्त की आपराधिक गतिविधियों में संलिप्तता और गैंग से उसके संबंध प्रमाणित होते हैं।
मुकदमे की पैरवी में पैरोकार अभिलाष यादव, कोर्ट मोहर्रिर रघुनाथ एवं अमित का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहा। अभियोजन विभाग के साथ समन्वय कर साक्षियों की समयबद्ध उपस्थिति और आवश्यक अभिलेख न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कराए गए।
साक्ष्यों के समग्र परीक्षण के बाद न्यायालय ने वरुण प्रताप सिंह को धारा 3, उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 के तहत दोषी करार देते हुए तीन वर्ष के कठोर कारावास और 6 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। फैसला आने के बाद अभियुक्त को जिला कारागार भेज दिया गया।
What's Your Reaction?
Like
0
Dislike
0
Love
0
Funny
0
Angry
0
Sad
0
Wow
0
