बांदा के लाल सीओ देवेंद्र मिश्रा का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन

जनपद बांदा के लाल बिल्हौर के सीओ देवेंद्र मिश्रा का आज कानपुर के भैरव घाट में अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि उनकी बेटी वैष्णवी ने दी।

Jul 4, 2020 - 16:42
Jul 4, 2020 - 16:46
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बांदा के लाल सीओ देवेंद्र मिश्रा का पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन

बांदा

कानपुर के चौबेपुर में स्थित बिक्ररु गांव में कल हिस्ट्रीशीटर विकास यादव के साथ मुठभेड़ के दौरान सीओ देवेंद्र मिश्रा शहीद हो गए थे। उनके शहीद होने की खबर पाते ही परिजन कल कानपुर पहुंच गए थे।आज भैरव घाट में उनका अंतिम संस्कार किया गया। उनकी बेटी वैष्णवी ने मुखाग्नि दी।इस अवसर पर उनके रिश्तेदारों व परिजनों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। अंतिम संस्कार के दौरान पुलिसकर्मी भी मौजूद थे।जिनकी आंखें नम थी। साथ हीआईजी मोहित अग्रवाल तथा एसएसपी समेत भारी पुलिस बल भी अन्तिम संस्कार के दौरान मौजूद रहा। शहीद देवेंद्र मिश्र जनपद बांदा के गिरवा थाना अंतर्गत ग्राम सहेवा के निवासी थे।

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कांस्टेबल के पद में हुए थे भर्ती

बांदा के पंडित जवाहरलाल नेहरू डिग्री कालेज से स्नातक करने के बाद देवेंद्र ने वर्ष 1981 में कांस्टेबल के पद पर पुलिस विभाग में नौकरी पाई थी। इनकी पहली पोस्टिंग गाजियाबाद के मोदीनगर में हुई थी। घर के सामने अपने माता-पिता की याद में देवेंद्र ने शि‍व जी का मंदिर बनाया था। गांव में देवेंद्र के छोटे भाई राजीव मिश्र और रामग्रीनदीन मिश्र रहते हैं। देवेंद्र की पत्नी आशा मिश्र और उनकी दोनों बेटियां कानपुर में ही रहती हैं। बेटियां नीट परीक्षा की तैयारी कर रही हैं, देवेंद्र की ससुराल बांदा के मौदहा तहसील के इचौली गांव में है।

साहसी थे देवेंद्र

कांस्टेबल से सीओ तक का सफर देवेंद्र की दिलेरी की दास्तान है। विभागीय परीक्षा पास कर वे एसआई बने और कानपुर की अहिरवां चैकी इंचार्ज का पद संभाला था। इसके बाद वर्ष 2004-05 में वह उन्नाव जनपद के आसीवन थाना इंचार्ज रहते हुए एक शातिर का एनकाउंटर किया था। वे आउट ऑफ टर्न प्रमोशन पाकर इंस्पेक्टर बने थे। देवेंद्र की बहादुरी की बानगी थी कि वर्ष 2012 में चर्चित ट्रेन डकैती के बदमाशों को दबोचकर लूट का माल भी बरामद किया था. उस वक्त देवेंद्र इंस्पेक्टर थे.

इसके बाद तत्कालीन पुलिस महानिदेशक ने देवेंद्र को 15 हजार रुपए का इनाम और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया था। वर्ष 2013 में वाराणसी में कैंट जीआरपी निरीक्षक के रूप में तैनाती के दौरान देवेंद्र ने जहरखुरानी गिरोह को नेस्तनाबूद करने में मुख्य भूमिका निभाई थी। वर्ष 2016 में देवेंद्र आउट आफ टर्न प्रमोशन पाकर पुलिस उपाधीक्षक बने थे. वे मार्च 2021 में सेवानिवृत्त होने वाले थे।

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