Gangster Love Story : विकास दुबे और रिचा निगम की प्रेम दास्तान

कहते हैं कि हर सफल आदमी के पीछे एक औरत का हाथ होता है, ये कहावत है। पर असफल आदमी के पीछे किसका हाथ ? ये तो शायद ही कोई बता पाये। असफलता का ठीकरा स्वयं उसी के सिर फूटता है, ऐसी रवायत है।

Gangster Love Story : विकास दुबे और रिचा निगम की प्रेम दास्तान
Gangster Vikas Dubey & His Wife Richa

विकास दुबे भी चाहे जितना रसूखदार बन गया था पर आज उसके हाथ खाली हैं। वो असफल हो चुका है, हालांकि जिस रास्ते पर वो चला था, वह रास्ता एक दिन ढलान की ओर ही ले जाता है। ये हमने अपने बाप-दादाओं से सुन रखा था, और आज उसे सही पाया। हो सकता है कि विकास दुबे ने ये न सुना हो, तभी तो उसे जरायम की दुनिया में सफलता का द्वार दिखाई दिया। और इस काम में उसका बखूबी साथ दिया था उसकी पत्नी रिचा ने, जो कभी रिचा निगम हुआ करती थी। विकास से शादी की तो रिचा दुबे हो गयी। विकास के साथ उसकी भी जिन्दगी बदल गयी। एक सीधी-सादी रिचा जरायम की दुनिया का बेताज बादशाह की बेगम बनने को उतारू थी। उसने विकास को समझाने तक की कोशिश नहीं की, इस बात की तस्दीक रिचा के भाई की पत्नी यानि रिचा की भाभी पुष्पा निगम करती हैं।

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दरअसल विकास की कहानी शुरू होती है, जब वह कानपुर के शास्त्री नगर में रहने वाली अपनी बुआ के घर पढ़ने गया। बुआ के घर पर रहकर पढ़ाई करते-करते पड़ोस में रहने वाले एसपी निगम जोकि एयरफोर्स की नौकरी में थे, उनके पुत्र राजू निगम से विकास की दोस्ती हो गयी। बस यहीं से राजू के घर आना-जाना शुरू हुआ तो जल्द ही विकास की मुलाकात राजू की बहन रिचा से हुई। रिचा को सभी लोग सोनू कहकर पुकारते थे तो विकास भी उसे सोनू कहने लगा। सोनू यानि रिचा को देखते ही विकास को लगा कि यही वह लड़की है जो उसकी जीवन संगिनी बन सकती है। इसी बीच विकास और राजू मिलकर कुछ कामधन्धा भी करने लगे थे। राजू को लग रहा था कि विकास उसका जिगरी यार है पर सच्चाई तो विकास को ही पता थी कि इस दोस्ती का रहस्य क्या था। विकास को हर समय रिचा ही दिखाई देती थी, सोते-जागते, खाते या पीते, रिचा.. रिचा.. नाम जैसे उसकी जुबां से हटने को तैयार नहीं होता था।

Vikas Dubey & Richa Nigam (File Photo)

धीरे-धीरे, वो सब भी होने लगा जो हर प्रेम कहानी में होता है, छिप-छिपकर मिलना, लेटरबाजी इत्यादि, ये सब कुछ विकास और रिचा के बीच होता रहा और किसी को भी कानोकान खबर नहीं लगी। विकास अपना दिल हार बैठा था, तो जरूरत थी कि उसे अन्तिम परिणति तक पहुंचाया जाये। घरवालों को जब मालूम चला तो काफी हो-हल्ला हुआ। अब विकास और रिचा को लगने लगा कि घरवालों के विरोध के चलते उनका मिलन कहीं आधा-अधूरा न रह जाये तो उन्होंने इसे पूरा करने की ठान ली।
वो साल 1997 था जब रिचा को विकास दुबे भगाकर ले गया। ऐसा रिचा की भाभी पुष्पा कहती हैं। पुष्पा बताती हैं कि विकास से शादी करके शुरू में रिचा को काफी पछतावा हुआ था, और इसी कारण वह विकास के पास से वापस मायके आ गयी थी। पर विकास ने उसे मना लिया, प्यार से या दबंगई से। कारण जो भी हो, रिचा एक बार फिर विकास के साथ चली गयी थी। लेकिन इस बार रिचा खुद बदल गयी थी। विकास जो शुरू से ही आपराधिक प्रवृत्ति का था, उसके धन्धे अब रिचा को भी भाने लगे थे। लिहाजा अब रिचा भी उसके हर काम में साथ थी।

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बस फिर क्या था, भरपूर प्रेम करने वाली पत्नी थी, जिसे उसने चाहा था, जिसे भगाकर शादी की थी। जब वह उसके साथ थी, तो उसे किस बात की फिक्र थी। यहां से विकास तेजी से अपराध की दुनिया में कदम रखता चला गया। पति-पत्नी को एक-दूसरे की हर बात पता होती थी। विकास हर चीज अपनी पत्नी से शेयर करता था। तो पत्नी भी उसका खुलकर साथ देती थी। पुलिस ने जब तब विकास को उसके घर से उठाया तो उसकी पत्नी रिचा ने घर पर लगे सीसीटीवी की रिकाॅडिंग को सोशल मीडिया में वायरल कर पुलिस को मजबूर कर दिया कि वह विकास के साथ कुछ गलत न कर सके। एक पत्नी अपने पति के लिए हर बार पुलिस के सामने सुरक्षा कवच बनने को तैयार रहती थी। रिचा ने न केवल विकास से अटूट प्रेम किया बल्कि उसके सारे गुनाहों में भी भरपूर साथ दिया।

उधर रिचा का भाई यानि विकास का साला राजू निगम भी विकास के कारनामों के चलते कानपुर छोड़कर मध्य प्रदेश में शहडोल जिले के बुढ़ार में जाकर बस गया। उसने न तो विकास से सम्बन्ध रखा और न ही अपनी बहन रिचा से। एक बार सन् 2009 में जब राजू की मां की मौत हुई तब जरूर भाई बहन की मुलाकात हुई थी। पर उसके बाद भी न तो रिचा और न ही राजू ने कभी एक दूसरे से मिलने की सोची। ये कहानी बताते हुए राजू की पत्नी पुष्पा कहती हैं कि उनके पति ने पिछले 15 वर्षों से अपनी बहन से राखी तक नहीं बंधवाई। भाई-बहन का रिश्ता पूरी तरह से टूट चुका था, चूंकि उनके बीच विकास नाम का अपराधी जो खड़ा था। वो अपराधी जिसने उस समय एक भाई-बहन के रिश्ते को खत्म कर दिया था और आज कई लोगों के घर उजाड़ दिये, कितनों के सुहाग उजाड़कर वो अपनी आलीशान कोठी में शानोशौकत से रहता था, इस बात की तस्दीक उसकी वो तोड़ी गयी वो आलीशान कोठी ही करती है।

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कहते हैं कि विकास के साले राजू निगम ने शुरूआत में विकास के कामों में सहयोग किया लेकिन जल्द ही उसे यह लगने लगा था कि वह उसे रास्ते से हटा देगा तो इसी डर के कारण राजू निगम मध्य प्रदेश के शहडोल जिले के बुढ़ार कस्बे में आकर बस गया। तभी से राजू का बहन रिचा और विकास से कोई संबंध नहीं रह गया था।
पुष्पा कहती हैं कि विकास के जो रास्ते थे, उस पर विकास और रिचा ही चल सकते थे। इसलिए हम अलग हुए। यहां तक कि शहर ही नहीं बल्कि प्रदेश ही बदल दिया। जब 15 साल से सम्बन्ध नहीं रखा तब तो विकास के कारनामों के कारण हमें ये दिन देखना पड़ा है। अगर सम्बन्ध रखा होता तो न जाने हमारे साथ क्या होता। हो सकता है कि हमारा परिवार भी पुलिस एनकाउंटर की हिटलिस्ट में होता।