कोरोना काल में दिलीप की दानवीरता का दबदबा कायम

कोरोना काल में दिलीप की दानवीरता का दबदबा कायम

वैश्विक महामारी कोरोना के प्रकोप से देश को बचाने के लिए बड़ी संख्या में लोग आर्थिक रूप से भी सरकार की मदद करने में आगे आ रहे हैं, ऐसे ही दानवीरों में बांदा के निवासी दिलीप सिंह का नाम लिया जा सकता है। उन्होंने देश हित में 21 लाख रुपए  देकर इस महामारी से निपटने में सरकार की मदद की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को 21 लाख रुपए की चेक प्रदेश की राजधानी में पहुंचकर मुख्यमंत्री के कार्यालय में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी।

जनपद बांदा के ग्राम महोखर के मूलनिवासी दिलीप सिंह समाज सेवा में हमेशा आगे रहते हैं। जब से देश में कोविड-19 ने दस्तक दी है तबसे श्री सिंह सरकार और जरूरतमंदों की मदद करने को हाथ बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि देशहित व समाज हित में जिसके पास जो संभव हो मदद के लिए आगे आना चाहिए, मैंने भी उसी उद्देश्य मुख्यमंत्री कोष में अपना अंशदान किया है। बताते चलें कि इसके पहले भी श्री सिंह ने पांच लाख का चेक जिला अधिकारी हमीरपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री कोष में जमा किया था और उनके छोटे भाई राहुल सिंह एक लाख रुपए की चेक दे चुके हैं। बता दें कि वह लाकडाउन 1,2,3 के दौरान निरन्तर मरीजों को लाने-जाने में बांदा जिले में लगी सरकारी एंबुलेंस सेवा को अपने पेट्रोल पंप “रिलायंस पेट्रोल पंप” के माध्यम से निशुल्क डीजल देते आ रहे है। साथ ही उनके द्वारा जिला बांदा, हमीरपुर, लखनऊ में अपने घरों को लौटने वाले राहगीरों को एवं गरीब असहाय लोगों को भोजन, भोजन सामग्री एवं दवाएं दिन प्रतिदिन उपलब्ध कराई जाती रही हैं।।

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दिलीप सिंह बसपा के टिकट पर तिंदवारी हमीरपुर संसदीय सीट से चुनाव मैदान में उतरे थे। लेकिन वह चुनाव जीतने में असफल रहे थे। इधर मुख्यमंत्री से सीधे मिलकर मदद राशि सौंपने पर राजनीतिक खेमों में तरह-तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, कुछ लोगों का मानना है कि श्री सिंह जल्दी ही भाजपा में शामिल हो सकते हैं इसीलिए उन्होंने भाजपा में नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी है।

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जब इस बारे में श्री सिंह से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि मैंने तो सिर्फ देशहित और समाज हित में यह कदम उठाया है। पहले भी मैंने जब कभी भी देश या समाज में कोई संकट की घड़ी आई है तो मदद करने में कभी भी पीछे नहीं रहा रहा हूं। रही बात लोगों के सोचने  की तो यह लोकतंत्र है कोई कुछ भी सोचे यह उनका ही सोचने का नजरिया हो सकता है।

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