कुदरत के अधूरे काम को डॉक्टर ने दिया मुकाम

कभी-कभी कुदरत कुछ कार्य अधूरे छोड़ देती है, जिन्हें डॉक्टर अपने ज्ञान, कौशल और समर्पण से पूरा करते हैं। शायद इसी वजह से डॉक्टरों को भगवान का रूप कहा जाता है...

Jan 5, 2026 - 12:13
Jan 5, 2026 - 12:21
 0  94
कुदरत के अधूरे काम को डॉक्टर ने दिया मुकाम

रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में हाइपोस्पेडियस का सफल ऑपरेशन, 8 वर्षीय बालक को मिला नया जीवन

बाँदा | कभी-कभी कुदरत कुछ कार्य अधूरे छोड़ देती है, जिन्हें डॉक्टर अपने ज्ञान, कौशल और समर्पण से पूरा करते हैं। शायद इसी वजह से डॉक्टरों को भगवान का रूप कहा जाता है। ऐसा ही एक प्रेरणादायक और सराहनीय मामला बाँदा के रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में सामने आया है, जहाँ एक जटिल जन्मजात बीमारी का सफल ऑपरेशन कर चिकित्सकों ने बालक को सामान्य जीवन की राह दिखाई है।

मेडिकल कॉलेज के सर्जरी विभाग में कार्यरत यूरो सर्जन डॉ. सोमेश त्रिपाठी ने हाइपोस्पेडियस (मूत्र छिद्र का निचली सतह पर होना) से पीड़ित एक 8 वर्षीय बालक का सफल ऑपरेशन कर बाँदा की सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को नई ऊँचाइयों पर पहुँचा दिया है।

मामला बाँदा जनपद के तिंदवारी क्षेत्र के बेंदा गांव निवासी सूरज (8 वर्ष) पुत्र लक्ष्मी शरण से जुड़ा है। सूरज को जन्म से ही पेशाब करने में गंभीर समस्या थी। उसकी पेशाब की नली आधी बनी हुई थी और आधा रास्ता पूरी तरह बंद था, जिससे बीच में छेद बन गया था। इस कारण वह सामान्य रूप से मूत्र त्याग नहीं कर पा रहा था।

सूरज के पिता ने बताया कि उन्होंने अपने बेटे का इलाज कई नामी-गिरामी अस्पतालों में कराया, लेकिन कहीं भी संतोषजनक लाभ नहीं मिला। अंततः वे सूरज को लेकर रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बाँदा पहुँचे। यहाँ डॉ. सोमेश त्रिपाठी ने जाँच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों की सहमति के बाद पिछले सप्ताह बच्चे का ऑपरेशन किया गया।

करीब ढाई से तीन घंटे चले इस जटिल ऑपरेशन में डॉ. सोमेश त्रिपाठी ने सर्जरी के माध्यम से पेशाब की अधूरी नली को लिंग की मांसपेशियों से बनाकर पूरा किया। ऑपरेशन के बाद सूरज को अब सामान्य रूप से पेशाब होने लगी है और उसका लिंग भी पूरी तरह कार्य करने लगा है। कुछ दिनों तक भर्ती रखने के बाद शनिवार को बच्चे को स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

डॉ. सोमेश त्रिपाठी ने बताया कि यदि समय रहते यह ऑपरेशन नहीं होता तो बच्चे की मूत्राशय और गुर्दे खराब होने की आशंका थी, साथ ही भविष्य में उसका गृहस्थ जीवन भी प्रभावित हो सकता था। उन्होंने बताया कि सरकारी अस्पताल में यह ऑपरेशन मामूली सरकारी खर्च में संपन्न हुआ, जबकि निजी अस्पताल में यही सर्जरी कराने पर करीब डेढ़ से दो लाख रुपये का खर्च आता।

इस सफल ऑपरेशन में डॉ. सोमेश त्रिपाठी (यूरो सर्जन) के साथ डॉ. खुर्शीद अहमद (जेआर), डॉ. प्रिया दीक्षित, डॉ. पंकज एवं ऑपरेशन थिएटर स्टाफ में आशीष हसन, उमा सहित अन्य कर्मचारियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इस सफलता ने न केवल एक बच्चे का जीवन बदला, बल्कि सरकारी चिकित्सा व्यवस्था पर आमजन का विश्वास भी और मजबूत किया है।

What's Your Reaction?

Like Like 1
Dislike Dislike 0
Love Love 0
Funny Funny 0
Angry Angry 0
Sad Sad 0
Wow Wow 0