53वें राष्ट्रीय रामायण मेले का हुआ भव्य शुभारंभ

राष्ट्रीय रामायण मेला के 53वें महोत्सव का उदघाटन समूहिक रूप से दीप प्रज्जवलित कर अयोध्या से आए जगद्गुरू राघवाचार्य महाराज व उच्च...

Feb 16, 2026 - 10:08
Feb 16, 2026 - 10:08
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53वें राष्ट्रीय रामायण मेले का हुआ भव्य शुभारंभ

जन-जन तक रामायण का संदेश पहुंचाना रामायण मेले का उद्देश्य: जगद्गुरू

अखाड़ों के निशान के साथ निकली शोभायात्रा

चित्रकूट। राष्ट्रीय रामायण मेला के 53वें महोत्सव का उदघाटन समूहिक रूप से दीप प्रज्जवलित कर अयोध्या से आए जगद्गुरू राघवाचार्य महाराज व उच्च न्यायलय के न्यायमूर्ति अजीत कुमार व उत्तर प्रदेश शासन के जल शक्ति राज्य मंत्री रामकश निषाद ने किया। 

जगद्गुरु राघवाचार्य महाराज ने रामचरितमानस को विश्व का प्रथम ग्रन्थ बताते हुए मानस को राष्ट्रीय ग्रन्थ घोषित किये जाने कि जारूरत बतायी। रामायण विश्व में अनेक है जो दोषरहित है। रामायण भारत का प्राण है। रामायण का संदेश जन-जन तक पहुंचाना रामायण मेले का ही उद्देश्य है। उन्होंने श्रीराम को सभी जीवों की आत्मा बताया। वहीं कहा भगवान का एक नाम न्याय भी है। चित्रकूट और अयोध्या दोनों समान है। उन्होंने कहा की भगवान श्रीराम ने जानकी जी को बताया था कि चित्रकूट का पर्वत ही अयोध्या है। यहा के जीवों को अयोध्यावासी समझों। यहाँ की मन्दाकिनी सरयू का ही रूप है। जगदगुरु ने कहा की चित्रकूट में भगवान राम हमेशा बास करते हैं। चित्रकूट सतदिन बसत प्रभु श्री लखन समेत। उन्होने बताया कि जानकी जी को जब जक वो चित्रकूट में रही इतना अधिक आनन्द प्राप्त हुआ। उतना कमी मिथला और अयोध्या में नहीं प्राप्त हुआ। राष्ट्रीय रामायण मेला का मूल उद्देश्य धर्म की स्थापना करना है। वहीं उन्होंने महर्षि वाल्मीकि के रामायण को विश्व का प्रथम ग्रन्ध बताया कि महर्षि वाल्मीकि ही तुलसी के रूप में जन्म लेकर रामवारितः मानस की रचना की। उच्च न्यायलय के न्यायमूर्ति अजीत कुमार ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि तुलसी बाबा ने यह लिख दिया है कि जो जिस काम को कर रहा हैं यानी जो जिस व्यवसाय में लगा है उस व्यावसाय में सत्य का धारण करे और उसी को मार्ग से ईश्वर की पूजा करे। भगवान त्रेता युग में अयोध्या में जन्म लिये थे। चित्रकूट भी अयोध्या जैसा है। यहां भी उन्होने निवास किया। द्वापर में भगवान कृष्णा के रूप में उन्होंने अवतार लिया महाभारत भी सत्य की असत्य पर विजय का ग्रन्थ है जो यह स्ताता है कि धमों की स्थापना करने को लिए ईश्वर बार-बार जन्म लेंगे। यानी जब भी अपने धर्म अपने सत्य से हाटगे तब तब इश्वर इस भूमि की रक्षा वारने के लिए स्वयं आयेंगे क्योंकि मनुष्य ईश्वर की सबसे सुन्दर रचना है।

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