मानव को परम धर्म का ज्ञान होना चाहिए, प्रेम निष्काम हो : अमृतदास महाराज
भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास महंत ने भागवत के प्रादुर्भाव की कथा का रसपान श्रोताओं को कराया। उन्होने बताया कि शुकदेव...
कथा व्यास ने भागवत कथा के प्रादुर्भाव की सुनाई कथा
चित्रकूट। भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास महंत ने भागवत के प्रादुर्भाव की कथा का रसपान श्रोताओं को कराया। उन्होने बताया कि शुकदेव ने छह प्रश्नों का उत्तर देते हुए कहा कि मानव का परम धर्म प्रीत होना है।
बुधवार को तरौंहा स्थित खाकी रामबाग अखाड़ा में चल रही भागवत कथा के दूसरे दिन कथा व्यास महंत अमृतदास ने बताया कि मंगलवार को पहले दिन भागवत के महात्म्य का वर्णन किया गया। भागवत के प्रादुर्भाव की कथा सुनाते हुए बताया कि भगवान शिव ने पार्वती को यह कथा सुनाया। कथा सुनते-सुनते पार्वती को नींद आ गई। जब पार्वती की नींद टूटी तो उन्होंने सोने की बात कही। इस पर भगवान ने कहा अगर सो गई थी तो कथा की हुंकारी कौन भर रहा था। इसी बीच उन्होने पास में छिपे शुक को देखा तो क्रोधित होकर त्रिशूल से मारने के लिए पीछा किया। तभी व्यास जी क पत्नी वतकी ने पुत्र प्राप्ति की कामना की। इधर शुक आया और भगवान शिव के कोप से बचने के लिए उनके पेट में छिप गया। 12 वर्ष तक वह व्यास की पत्नी की कोख से नहीं निकला। तब ब्रह्मा जी ने वचन दिया कि तुम बाहर आओ। तुम्हे माया नहीं घेरेगी। तभी शुक बाहर निकले। यहीं से भागवत कथा सुनाने का सिलसिला चल पड़ा। उन्होंने कहा कि शुकदेव ने छह प्रश्नो का उत्तर देते हुए कहा कि मानव को परम धर्म का ज्ञान होना चाहिए। प्रीति भगवान पर लगाना चाहिए। प्रेम निष्काम हो। भागवत व्यास ने कहा कि मंदिर जाए, लेकिन कुछ पाने के लिए नहीं, निष्काम भाव से पहुंचे। निंदा किसी की न करें। बताया कि भगवान एक है। निष्ठा एक से होना चाहिए। भगवान बड़े या छोटे नहीं होते। कथा सुनकर श्रोतागण मंत्रमुग्ध हो गए। कथा पश्चात आरती कर प्रसाद वितरत किया गया। इस मौके पर पूर्व जिलाध्यक्ष चन्द्र प्रकाश खरे, भाजपा नेता हरिओम करवरिया समेत बड़ी तादाद में श्रोतागण मौजूद रहे।
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