बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे : चित्रकूट से इटावा के निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ़्तार

विकास की गति तेज हुई और विगत कई सरकारों में इस समस्या का काफी हद तक निराकरण भी हुआ, पर जरूरत थी कुछ ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स की जो यहां के निवासियों को तेज गति से चलने वाली वो सुविधा दे सके जो 21वीं सदी के भारत के लिए एक बेहद जरूरी कदम है..

बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे : चित्रकूट से इटावा के निर्माण कार्य ने पकड़ी रफ़्तार

  • योगी सरकार का ड्रीम प्रोजेक्ट है बुन्देलखण्ड एक्सप्रेसवे

इसी वर्ष फरवरी के महीने में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चित्रकूट में भरतकूप के गोंडा गांव में जब बुन्देलखण्ड की तकदीर बदलने वाली इस महत्वाकांक्षी योजना का शिलान्यास किया तो यहां के लोगों में एक उम्मीद की किरण जगी। बरसों तक खराब सड़कों से गुजरते हुए यहां के लोग एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने में काफी मुश्किलातों का सामना करते थे। पर सरकारें बदलीं और लोगों की किस्मत भी।

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विकास की गति तेज हुई और विगत कई सरकारों में इस समस्या का काफी हद तक निराकरण भी हुआ। पर जरूरत थी कुछ ऐसे बड़े प्रोजेक्ट्स की जो यहां के निवासियों को तेज गति से चलने वाली वो सुविधा दे सके जो 21वीं सदी के भारत के लिए एक बेहद जरूरी कदम है और लोगों की इसी नब्ज को पकड़कर यूपी की योगी सरकार ने वाकई एक बड़ा और सार्थक कदम उठाया है।

  • 15 हजार करोड़ की लागत से बन रहा है एक्सप्रेसवे

बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे के साथ ही उत्तर प्रदेश के पूर्वी क्षेत्र में पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का काम भी बराबर गति से चल रहा है। यहां तक कि पूर्वांचल एक्सप्रेसवे तो अब कार्य समाप्ति की ओर बढ़ रहा है। पर बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस वे की बात करें तो यहां लगभग 12 फीसदी काम पूरा हो चुका है। और अब तो इसकी गति और भी तेज हो गयी है। लाॅकडाउन के दौरान इस प्रोजेक्ट का काम कुछ रूका पर शीघ्र ही सरकार ने इसे मंजूरी दी और इसने अपनी पुरानी गति फिर से पकड़ ली।

बुन्देलखण्ड के जिलों को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र से जोड़ने वाला यह एक्सप्रेस वे वाकई कई मायनों में खास है। 15 हजार करोड़ की लागत से बनने वाले और 296 किलोमीटर लम्बा यह एक्सप्रेस-वे चित्रकूट से शुरू होकर बाँदा होते हुए हमीरपुर, जालौन और फिर औरया इटावा होते हुए लखनऊ आगरा एक्सप्रेसवे में जाकर मिल जायेगा। जब प्रधानमंत्री ने इसका शिलान्यास किया था तो लगभग 60 हजार लोगों को रोजगार मिलने की बात भी कही थी।

  • चित्रकूट से शुरू होकर इटावा में समाप्त होगा एक्सप्रेस-वे

बाँदा शहर से सटे मवई के पास तो अब मुख्यमंत्री के ड्रीम प्रोजेक्ट बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस वे का कार्य दिखने लगा है। कनवारा में कार्यदायी संस्था ने प्लांट भी लगा लिया है। अब इंतजार है कि मिट्टी का कार्य पूरा हो तो पक्का निर्माण शुरू किया जाए।

यूपीडा के द्वारा इस कार्य को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए कराया जा रहा है। कनवारा-अछरौड़ केन नदी घाट में 500 मीटर लंबा एक फोर लेन ब्रिज बनेगा। इस ब्रिज में कुल 22 पिलर होंगे। इस ब्रिज के फाउंडिंग लेबल का काम लगभग पूरा हो चुका है। इसके लिए अब मात्र साढ़े 4 फीसदी जमीन के अधिग्रहण का काम बाकी रह गया है, जिसे जल्दी ही पूरा कर लिया जायेगा।

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बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे का स्वरूप

बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे 4 लेन चैड़ा होगा पर यह बाद में 6 लेन तक एक्सटेंड किया जा सकेगा। इसके राइट आॅफ वे की चैड़ाई भी 110 मीटर है। एक्सप्रेस-वे के एक ओर 3.75 मीटर चैड़ाई की सर्विस रोड भी स्टैन्डर्ड रूप में बनाई जायेगी, जिससे आस-पास के ग्रामीणों का सुगम आवागमन हो सके।

यह एक्सप्रेस-वे बुन्देलखण्ड की बागैं, केन, श्यामा, चन्द्रावल, बिरमा, यमुना, बेतवा सहित सेंगर नदियों से गुजरेगा।

बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे पर चार रेलवे ओवरब्रिज, 14 बड़े पुल, 6 टोल प्लाजा, 7 रैंप प्लाजा, 268 छोटे पुल, 18 फ्लाईओवर और 214 अंडरपास का निर्माण किया जा रहा है।

इचैली निवासी और हमीरपुर के सदर विधायक युवराज सिंह इसे बुन्देलखण्ड वासियों के लिए मुख्यमंत्री योगी का तोहफा बताते हैं। उनके गांव के पास से गुजरने वाले इस एक्सप्रेस-वे पर वो कहते हैं कि 21वीं सदी के भारत के लिए यह एक बेहद जरूरी कदम है। और लोगों की इसी नब्ज को पकड़कर यूपी की योगी सरकार ने वाकई एक बड़ा और सार्थक कदम उठाया है।

  • चित्रकूट सहित बाँदा, हमीरपुर, जालौन से निकलेगा एक्सप्रेसवे

बाँदा के सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी कहते हैं कि इस एक्सप्रेस वे से दिल्ली जाने वाले यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलेगी। कनेक्टिविटी फास्ट होगी तो हर क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

जिस प्रकार तेजी के साथ पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे का काम पूरा हुआ है, उसी प्रकार की तेजी अब बुन्देलखण्ड एक्सप्रेस-वे में देखने को मिल रही है। इसे देखते हुए यह उम्मीद की जा सकती है कि बुन्देलखण्ड के दिन अब बहुरने लगे हैं। कह सकते हैं कि बेचारगी का ठप्पा लगाये बुन्देलखण्ड अब 21वीं सदी की ओर तेजी से दौड़ने के लिए तैयार है।