नागरीय प्रचारणी पुस्तकालय को मिल रहा अत्याधुनिक स्वरूप, सचिव बीडीए ने किया निरीक्षण

चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त और जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास को नई ऊंचाई देने की...

Feb 25, 2026 - 18:22
Feb 25, 2026 - 18:24
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नागरीय प्रचारणी पुस्तकालय को मिल रहा अत्याधुनिक स्वरूप, सचिव बीडीए ने किया निरीक्षण

संकटमोचन मंदिर परिसर के पास बन रहा हाईटेक अध्ययन केंद्र; विद्यार्थियों और शोधार्थियों को मिलेंगी विश्वस्तरीय सुविधाएं

बांदा। चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त और जिलाधिकारी के निर्देशन में जनपद के शैक्षणिक और सांस्कृतिक विकास को नई ऊंचाई देने की तैयारी शुरू हो गई है। शहर के ऐतिहासिक संकटमोचन हनुमान मंदिर परिसर के समीप नागरीय प्रचारणी पुस्तकालय का निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। प्रशासन की मंशा इस पुस्तकालय को एक ऐसे अत्याधुनिक हब के रूप में विकसित करने की है, जहाँ विद्यार्थियों और शोधार्थियों को शांतिपूर्ण वातावरण के साथ-साथ सभी आधुनिक संसाधन उपलब्ध हो सकें।

गुणवत्ता परखने पहुंचे बीडीए सचिव निर्माण कार्य की शुचिता और मानकों को परखने के लिए बांदा विकास प्राधिकरण (BDA) के सचिव मदन मोहन वर्मा ने निर्माण स्थल का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर मौजूद अभियंताओं और कार्यदायी संस्था को स्पष्ट निर्देश दिए कि निर्माण में प्रयुक्त होने वाली सामग्री की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।

समयबद्ध और मानक के अनुरूप कार्य के निर्देश निरीक्षण के दौरान सचिव ने कार्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा:

"यह पुस्तकालय बांदा के छात्र-छात्राओं के लिए मील का पत्थर साबित होगा। संबंधित अधिकारी यह सुनिश्चित करें कि सारा काम तय समय सीमा के भीतर और निर्धारित मानकों के अनुसार ही पूरा हो, ताकि जल्द से जल्द इसे जनता को समर्पित किया जा सके।"

पुस्तकालय की प्रमुख विशेषताएं:

  • आधुनिक संसाधन: डिजिटल और भौतिक संदर्भ सामग्रियों का विशाल संग्रह।

  • शांत वातावरण: पठन-पाठन और गहन शोध के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया स्पेस।

  • सांस्कृतिक महत्व: धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व वाले मंदिर परिसर के पास होने से क्षेत्र की गरिमा में वृद्धि।

  • सुलभ अध्ययन केंद्र: शहर के विद्यार्थियों को अब उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए एक बेहतर मंच मिलेगा।

निर्माण कार्य पूर्ण होने के पश्चात यह पुस्तकालय न केवल एक पठन केंद्र होगा, बल्कि बांदा की बौद्धिक विरासत का नया केंद्र बनकर उभरेगा।

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