दीक्षांत समारोह में प्रदान की गई 2417 उपाधियां, 141 स्वर्ण पदक, 6 कुलाधिपति पदक, 39 शोध उपाधियां
जगदगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ संपन्न हुआ। दीक्षांत समारोह का प्रारंभ शोभायात्रा...
दिव्यांगों की उच्च शिक्षा के लिए समर्पित है जेआरएचआरयू: मंत्री
जगदगुरु रामभद्राचार्य की पुस्तकों का हुआ विमोचन
जेआरएचआरयू का नवम दीक्षांत समारोह संपन्न्न
चित्रकूट। जगदगुरु रामभद्राचार्य दिव्यांग राज्य विश्वविद्यालय का नवम दीक्षांत समारोह भव्यता के साथ संपन्न हुआ। दीक्षांत समारोह का प्रारंभ शोभायात्रा से किया गया। अतिथियों ने मां सरस्वती की वंदना तथा दीप प्रज्वलन कर दीक्षांत समारोह का परंपरागत ढंग से शुभारंभ किया।
कुलपति प्रो शिशिर कुमार पांडेय ने कहा कि यह विश्वविद्यालय के लिए गौरव का विषय है। राज्य सरकार के द्वारा प्रतिष्ठापित होने के पश्चात यह गौरवपूर्ण समावेशी पर्यावरण में आयोजित होने वाला दीक्षांत समारोह ऐतिहासिक होकर बुंदेलखंड क्षेत्र का ही नहीं बल्कि संपूर्ण देश के दिव्यांगजनों को सहज में आकर्षित कर रहा है। विवि उपलब्धियां का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों की संख्या में आशातीत वृद्धि से लेकर विभिन्न नए पाठ्यक्रमों का प्रारंभ तथा विश्वविद्यालय की प्रगति का विस्तार से विवरण प्रस्तुत किया। तत्पश्चात पैरालंपिक खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करके रजत पदक प्राप्त करने वाले आईएएस अधिकारी सुहास एलवाई तथा चित्रकूट धाम मंडल के मंडल आयुक्त अजीत कुमार को दिव्यांगजन सशक्तिकरण, खेल एवं लोक प्रशासन में उत्कृष्ट योगदान के लिए मानद उपाधि से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय की शोध पत्रिका समानु भूति के नवीन अंक का विमोचन, विश्वविद्यालय के जीवन पर्यंत कुलाधिपति स्वामी रामभद्राचार्य द्वारा रचित श्री रामचरितमानस का संपादकीय तथा संस्कृत वांगमय में जगदगुरु रामभद्राचार्य का योगदान पुस्तकों का विमोचन भी किया गया। दीक्षांत समारोह में 2417 उपाधियां, 141 स्वर्ण पदक, 6 कुलाधिपति पदक, 39 शोध उपाधि प्रदान की गईं।
इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित प्रदेश के दिव्यांगजन सशक्तिकरण तथा पिछड़ा वर्ग कल्याण राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार नरेंद्र कश्यप ने कहा यह विश्वविद्यालय भारत का ऐसा विश्वविद्यालय है जो पूर्ण रूपेण दिव्यांगों की उच्च शिक्षा के लिए समर्पित है। उन्होंने दीक्षांत समारोह में उपाधि धारकों को बधाई देते हुए कहा कि इस विश्वविद्यालय को दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नवीन कीर्तिमान स्थापित करने के लिए प्रत्येक प्रकार की सहायता प्रदान की जाएगी। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में नए केंद्र तथा बुनियादी सुविधाओं में सुधार किया जाएगा। उन्होंने जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य के योगदान को महत्वपूर्ण बताया। कार्यक्रम में डिजिटल माध्यम से केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने संबोधित करते हुए कहा कि दीक्षांत समारोह में भले मैं उपस्थित नहीं हुए लेकिन मन से सभी उपाधिधारकों तथा विश्वविद्यालय परिवार को हार्दिक बधाई है। शीघ्र ही विश्वविद्यालय में आकर यथासंभव योगदान का भरोसा दिया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए विश्वविद्यालय के जीवन पर्यंत कुलाधिपति जगदगुरु स्वामी रामभद्राचार्य ने कहा कि यह विश्वविद्यालय भारतीय ज्ञान परंपरा का उत्कृष्ट स्वरूप है। उन्होंने दीक्षांत के अर्थ को स्पष्ट करते हुए कहा कि प्रत्येक शिक्षार्थी को शिक्षा के सही अर्थ को ग्रहण कर उपकार के द्वारा मानव कल्याण के बारे में सोचना चाहिए। उन्होंने कहा कि वे स्वयं स्वर्ण पदक धारक हैं तथा उनके द्वारा यह स्थापित विश्वविद्यालय निश्चित रूप से पुरुषार्थ व भारतीय शिक्षा के प्रतिमान और व्यक्तिगत विकास के लिए एक सात्विक वातावरण उत्पन्न करेगा। कार्यक्रम के अंत में कुलसचिव मधुरेंद्र कुमार पर्वत ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर राज्यसभा सदस्य सुमित्रा बाल्मीकि, आचार्य रामचंद्र दास, कुलाधिपति के निजी सचिव रमापति मिश्र, वित्त अधिकारी रमेश कुमार, विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता व दीक्षांत समारोह के संयोजक डॉ महेंद्र कुमार उपाध्याय, डॉ हरिकांत मिश्र, डा सुशील त्रिपाठी, डॉ निहार रंजन मिश्र, डॉ गुलाबधर, डॉ शशिकांत त्रिपाठी, डा विनोद कुमार मिश्रा, डॉ अमित अग्निहोत्री आदि मौजूद रहे।
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