‘सुपर अल नीनो’ का खतरा : भारत में भीषण गर्मी, सूखा और बाढ़ की आशंका
जलवायु परिवर्तन और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच अब ‘सुपर अल नीनो’ को लेकर वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों...
विशेषज्ञों ने जताई चिंता, मानसून और अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है गंभीर असर
नई दिल्ली। जलवायु परिवर्तन और मौसम में लगातार हो रहे बदलाव के बीच अब ‘सुपर अल नीनो’ को लेकर वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों ने गंभीर चेतावनी जारी की है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सुपर अल नीनो की स्थिति बनी तो भारत में भीषण गर्मी, सूखा और अचानक बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं का खतरा काफी बढ़ सकता है। इसका असर दक्षिण-पश्चिम मानसून, कृषि उत्पादन और देश की अर्थव्यवस्था पर भी व्यापक रूप से देखने को मिल सकता है।
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार ‘सुपर अल नीनो’ सामान्य अल नीनो की तुलना में अधिक शक्तिशाली स्थिति होती है, जिसमें प्रशांत महासागर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। इसका सीधा प्रभाव दुनिया भर के मौसम चक्र पर पड़ता है। भारत में यह स्थिति मानसून को कमजोर कर सकती है, जिससे कई राज्यों में सूखे जैसे हालात बन सकते हैं, जबकि कुछ क्षेत्रों में अत्यधिक वर्षा और बाढ़ की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि यह स्थिति वर्ष 1877 में आए विनाशकारी अल नीनो प्रभाव से भी अधिक खतरनाक साबित हो सकती है। उस दौरान भारत के कई हिस्सों में भीषण सूखा और अकाल की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। अब बढ़ते वैश्विक तापमान के कारण इसके प्रभाव और भी गंभीर हो सकते हैं।
मौसम विभाग और जलवायु वैज्ञानिकों का कहना है कि यदि सुपर अल नीनो सक्रिय होता है तो उत्तर भारत में गर्मी के रिकॉर्ड टूट सकते हैं। कई राज्यों में तापमान सामान्य से कई डिग्री अधिक पहुंच सकता है। वहीं कृषि क्षेत्र पर इसका सीधा असर पड़ने से खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित होने की संभावना है, जिससे महंगाई और आर्थिक दबाव भी बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों ने सरकारों और प्रशासनिक एजेंसियों को पहले से तैयारी करने की सलाह दी है। जल संरक्षण, आपदा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और कृषि योजनाओं को मजबूत बनाने पर जोर दिया जा रहा है ताकि संभावित संकट से प्रभावी ढंग से निपटा जा सके।
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