कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता 'ज्वाला' के दो और शावकों की मौत

मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला के दो और शावकों की गुरुवार को मौत हो गई। प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) जेएस चौहान ने इसकी..

कूनो राष्ट्रीय उद्यान में मादा चीता 'ज्वाला' के दो और शावकों की मौत

श्योपुर/भोपाल, मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में नामीबिया से लाई गई मादा चीता ज्वाला के दो और शावकों की गुरुवार को मौत हो गई। प्रदेश के प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्य प्राणी) जेएस चौहान ने इसकी पुष्टि की है। मादा चीता ज्वाला ने दो माह पहले 27 मार्च को ही कूनो राष्ट्रीय उद्यान में चार शावकों को जन्म दिया था। इनमें से एक शाव की मौत बीते मंगलवार को हो गई थी, जबकि एक शेष बचे शावक की हालत भी गंभीर बताई जा रही है। कूनो में दो माह में तीन शावकों समेत छह चीतों की मौत हो चुकी है।



प्रधान मुख्य वन संरक्षक जेएस चौहान ने बताया कि कूनो राष्ट्रीय उद्यान में गत मंगलवार, 23 मई को मादा चीता ज्वाला के एक शावक की मौत होने के बाद वन्यप्राणी चिकित्सकों की टीम ज्वाला और उसके तीन शावकों की मॉनिटरिंग कर रही थी। उस दिन इन तीनों शावकों की हालात भी सामान्य नहीं लगी। उस दिन तापमान 46 डिग्री के आसपास था। दिनभर गर्म हवाएं और लू चलती रही। जिसके बाद तीनों शावकों को रेस्क्यू कर जरूरी इलाज करने का निर्णय लिया गया। शावकों के उपचार के लिए नामीबिया एवं साउथ अफ्रीका के सहयोगी चीता विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों से लगातार सलाह ली जा रही थी, लेकिन गुरुवार को इनमें से दो शावकों की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि एक शावक की हालत गंभीर बनी हुई है। उसे पालपुर स्थित चिकित्सालय में रखा गया है। उसके उपचार के लिए नामीबिया एवं साउथ अफ्रीका के सहयोगी चीता विशेषज्ञों एवं चिकित्सकों से लगातार सलाह ली जा रही है। उक्त शावक वर्तमान में गहन उपचार में हैं एवं उसके स्वास्थ्य की स्थिति स्थिर है। मादा चीता ज्वाला वर्तमान में स्वस्थ है, जिसकी सतत निगरानी की जा रही है।

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कुनो प्रबंधन के अनुसार, इससे पहले सभी चीता शावक कमजोर, सामान्य से कम वजन एवं अत्यधिक डिहाइड्रेटेड पाए गए। मादा चीता ज्वाला हैंड रियर्ड चीता है, जो पहली बार मां बनी थी। चीता शावकों की उम्र लगभग आठ हफ्ते है। इस अवस्था में चीता शावक सामान्यतः जिज्ञासु होते हैं एवं मां के साथ लगातार चलते हैं। चीता शावकों ने अभी लगभग 8-10 दिन पूर्व ही अपनी मां ज्वाला के साथ घूमना शुरू किया था। चीता विशेषज्ञों के अनुसार सामान्यतः अफ्रीका में चीता शावकों का जीवित रहने का प्रतिशत बहुत कम होता है। स्टैंडर्ड पोटोकाल अनुसार पोस्टमार्टम की कार्रवाई की जा रही है।

इस मौत के बाद कूनो राष्ट्रीय में कुल छह चीते दम तोड़ चुके हैं। इनमें सबसे पहले 26 मार्च को नामीबिया से लाई गई मादा चीता साशा की मौत हुई थी। इसके बाद 23 अप्रैल को साउथ अफ्रीका से लाए गए चीता उदय ने दम तोड़ दिया था। फिर 9 मई को दक्षिण अफ्रीका से लाई गई मादा चीता दक्षा की मौत हो गई थी। अब एक सप्ताह के भीतर मादा चीता ज्वाला के तीन शावकों ने भी दम तोड़ दिया। एक शाव की मौत 23 मई को हुई थी, जबकि 25 मई को दो और शावकों की मौत हो गई।

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उल्लेखनीय है कि दक्षिण अफ्रीकी देश नामीबिया से पहली खेप में कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आठ चीतों को लाया गया था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका से दूसरी खेप में 12 चीते यहां लाए गए। यहां मादा चीता ज्वाला ने चार शावकों को जन्म दिया था। छह चीतों की मौत के बाद अब कूनो में 18 चीते बचे हैं, जिनमें एक शावक की हालत गंभीर है।


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हिस

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