भक्त के सामने नहीं चलती भगवान की चालाकी : कथा व्यास
भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास महंत ने कौरव और पांडव की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जैसे भगवान के...
चित्रकूट। भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास महंत ने कौरव और पांडव की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने कहा कि जैसे भगवान के आगे किसी की चालाकी नहीं चलती उसी प्रकार भक्त के सामने भगवान की चालाकी नहीं चलती।
गुरुवार को तरौंहा के खाकी रामबाग अखाड़ा में चल रही भागवत कथा के तीसरे दिन कथा व्यास महंत अमृतदास ने कौरव और पांडव की कथा का रसपान कराया। उन्हेोने बताया कि भीम ने दुर्योधन की जंघा पर गदा मारकर घायल कर दिया। दर्द से कराहते समय अश्वत्थामा ने पूछा कि यह दशा किसने की। इस पर दुर्योधन ने कहा कि पांचो पांडवो को मारकर उनके सिर लाओ। तभी भगवान श्रीकृष्ण ने पांचो पांडवो को शिविर से हटाकर दूसरे स्थान पर जाने के लिए कहा। द्रौपदी के पांच पुत्र भी वहां सो रहे थे। अश्वत्थामा ने पांच पांडवो के पुत्रो की हत्या कर सिर काटकर ले गया। इससे द्रौपदी काफी दुखी हुई। अर्जुन भगवान श्रीकृष्ण के पास गए और अश्वत्था के कृत्य को बताया। भगवान ने कहा कि ब्राह्मण को मारना अपराध है, लेकिन बच्चे के हत्यारे को छोड़ना नहीं चाहिए। इस पर अर्जुन धर्मसंकट में पड़ गए। इसके बाद अश्वत्थामा और अर्जुन के बीच युद्ध हुआ। जिसमें अश्वत्था की पराजय हुई। इसी बीच अश्वत्था के ब्रह्मास्त्र चलाने से अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा के गर्भ में पल रहे बच्चे पर घात हुआ। गर्भ नष्ट होने पर भगवान श्रीकृष्ण ने गर्भ में पल रहे बच्चे को जीवनदान दिया। कथा के पश्चात आरती प्रसाद वितरण किया गया। इस मौके पर राष्ट्रीय रामायण मेला के कार्यकारी अध्यक्ष प्रशांत करवरिया, करुणा शंकर द्विवेदी, राजाबाबू पांडेय, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष चन्द्र प्रकाश खरे, बजरंग दल के जिलाध्यक्ष राजेन्द्र त्रिवेदी, भाजयुमो जिलाध्यक्ष विकास उर्फ हीरो मिश्रा आदि श्रोतागण मौजूद रहे।
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