नेत्रदान कर दी नई जिंदगियां, मरणोपरांत परिजनों ने कराया नेत्रदान
जनपद में सराहनीय पहल देखने को मिली है जो समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए सबक का विषय है। लोग रक्तदान कर तो दूसरों को जिंदगी देते है...
चित्रकूट। जनपद में सराहनीय पहल देखने को मिली है जो समाज के प्रत्येक व्यक्ति के लिए सबक का विषय है। लोग रक्तदान कर तो दूसरों को जिंदगी देते है। अगर कोई अंग दान कर किसी को नई जिंदगी दे तो शायद इससे बड़ा कोई परोपकार नही हो सकता है। जनपद में एक ऐसा ही मामला देखने को मिला। पुरानी बाजार कर्वी निवासी सरिता अग्रवाल ने अपने पति स्व. राजेंद्र अग्रवाल के मरणोपरांत नेत्रदान कर चित्रकूट जनपद में एक नई पहल कर समाज को जगाने का काम किया। उन्होंने बताया कि स्व. पति के भाई डॉ राकेश अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, संजय अग्रवाल एवं पुत्र राहुल अग्रवाल सहित सारे परिवार की इच्छा थी कि उनको तो जिंदा नहीं कर सकते पर नेत्रदान करके उनकी आंखों को जिंदा रख सकते है। उनकी आंखों से दो परिवार इस दुनिया को देख सकते है। सदगुरू नेत्र चिकित्सालय को सूचना दी और उनका नेत्रदान कराया है। सदगुरू नेत्र चिकित्सालय टीम ने बताया कि इस नेत्रदान से दो लोगों को नई रोशनी मिलेगी। चित्रकूट क्षेत्रवासियों सहित आम जनमानस के लिए यह एक सीख है कि किसी ने मरणोपरांत अपने परिवार के सदस्य का नेत्रदान कराया है। वही सदगुरू नेत्र चिकित्सालय के प्रशासक डॉ इलेश जैन ने पुण्य आत्मा के लिए प्रार्थना किया एवं अग्रवाल परिवार की सराहना करते हुए कहा कि नेत्रदान बहुत ही पुनीत कार्य है। इस कार्य के लिए समाज के हर व्यक्ति को आगे आना चाहिए। साथ ही समाज में नेत्रदान को लेकर फैली कुरीतियों के बारे में लोगों को जागरूक करने का काम भी हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
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