धारकुंडी आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन महंत के अंतिम दर्शन को उमड़े भक्त

यूपी-एमपी की सीीमा स्थली पर स्थित प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम के संस्थापक महंत स्वामी परमहंस सच्चिदानन्द महाराज का पार्थिव शरीर रविवार की दोपहर...

Feb 9, 2026 - 13:07
Feb 9, 2026 - 13:08
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धारकुंडी आश्रम के संस्थापक ब्रह्मलीन महंत के अंतिम दर्शन को उमड़े भक्त

मप्र के मुख्यमंत्री, उप मुख्यमंत्री समेत यूपी-एमपी के मंत्रियो, अधिकारियों व विद्वतजनो ने नम आंखों से दी श्रद्धांजलि

आज आश्रम परिसर में निर्माणाधीन नए भवन में दी जाएगी समाधि

चित्रकूट। यूपी-एमपी की सीमा स्थली पर स्थित प्रसिद्ध धारकुंडी आश्रम के संस्थापक महंत स्वामी परमहंस सच्चिदानन्द महाराज का पार्थिव शरीर रविवार की दोपहर को भक्तो के अंतिम दर्शन के लिए चित्रकूट पहुंचा। महाराज के ब्रह्मलीन होने की जानकारी होते ही रविवार को तड़के से ही हजारो शिष्य आश्रम के परिसर में पहुंच गए। मप्र के मुख्यमंत्री व उप मुख्यमंत्री समेत छह से अधिक मंत्रियो और संत-महंतो व विद्वतजनो ने उन्हे श्रद्धांजलि दी। चित्रकूट, सतना के डीएम, एसपी समेत भारी पुलिस बल सुरक्षा व्यवस्था के लिए सुबह से रात तक डटे रहे। सोमवार को महाराज को आश्रम परिसर में ही समाधि दी जाएगी।

धारकुंडी आश्रम के संस्थापक स्वामी परमहंस सच्चिदानन्द महाराज ने शनिवार की दोपहर को मुम्बई के बदलापुर स्थित आश्रम में 102 वर्ष की आयु में अंतिम सांस ली। उनकी अंतिम इच्छा के अनुसार समाधि चित्रकूट के धारकुंडी आश्रम में देने के लिए विशेष विमान से महंत स्वामी अडगडानंद महाराज समेत चार सौ गाड़ियों का काफिला रविवार को तड़के ही धारकुंडी पहुंच गया। ब्रह्मलीन महाराज का पार्थिव शरीर विशेष कार से सड़क मार्ग से लाया गया। जगह-जगह उनके शिष्यो ने रास्ता रोक कर ब्रह्मलीन महाराज के दर्शन कर अंतिम विदाई दी। दोपहर एक बजे उनका पार्थिव शरीर धारकुंडी आश्रम पहुंचा तो मानो भक्तो का सब्र टूट पड़ा। उनके वाहन पर फूलमालाओ की बारिश के साथ भक्तो ने हाथ जोड़कर प्रणाम किया।

मप्र के मुख्यमंत्री मोहन यादव, उप मुख्यमंत्री राजेन्द्र शुक्ला, के अलावा चित्रकूट यूपी व सतना एमपी के डीएम, एसपी व अन्य अधिकारियों ने फूलमाला के साथ उनके चरण छूकर नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। देर शाम तक यह सिलसिला चलता रहा। आश्रम के संत रामायण बाबा व संजय बाबा ने बताया कि सोमवार को भी ब्रह्मलीन महंत का पार्थिव शरीर भक्तो के अंतिम दर्शन के लिए समाधि स्थल के पास रखा जाएगा। दोपहर बाद इसी स्थल पर उन्हे समाधि दी जाएगी।

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