आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियान तेज, 543 लोगों की हुई स्क्रीनिंग

मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बांदा के निर्देशन में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) के तहत जिले में आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक...

Sep 11, 2026 - 17:33
Sep 11, 2026 - 17:34
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आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता अभियान तेज, 543 लोगों की हुई स्क्रीनिंग
Dr. Vijendra Singh,CMO, Banda

101 लोग आत्महत्या जोखिम श्रेणी में, 13 अति जोखिम वाले मिले; मानसिक तनाव में समय पर काउंसलिंग और उपचार पर जोर

बांदा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी, बांदा के निर्देशन में राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम (NMHP) के तहत जिले में आत्महत्या की रोकथाम और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए विभिन्न स्तरों पर जागरूकता, काउंसलिंग एवं संवेदनशीलता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं।

वर्ष 2024 और 2025 के उपलब्ध अभिलेखों के विश्लेषण में सामने आया कि आत्महत्या से जुड़े मामलों में गृह कलह, बीमारी से उत्पन्न मानसिक तनाव, प्रेम प्रसंग, नशे की समस्या और आर्थिक कठिनाइयां प्रमुख कारणों में शामिल रही हैं। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि संकट की स्थिति में समय रहते व्यक्ति को भावनात्मक सहयोग, उचित परामर्श और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना बेहद जरूरी है।

543 लोगों की स्क्रीनिंग, 114 जोखिम वाले मिले

स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय कर्मियों आशा, एएनएम और सीएचओ द्वारा आत्महत्या जोखिम मूल्यांकन के तहत जिले में 543 लोगों की स्क्रीनिंग की गई। इनमें 101 लोग जोखिम वाले और 13 लोग अति जोखिम वाले पाए गए। ऐसे लोगों की पहचान के बाद समय पर काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह, उपचार और आवश्यकतानुसार फॉलोअप पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

कॉलेजों और धार्मिक स्थलों पर जागरूकता

आत्महत्या की रोकथाम के लिए कॉलेजों एवं अन्य शैक्षणिक संस्थानों में मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन और आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता एवं काउंसलिंग कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। धार्मिक स्थलों पर भी मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या की रोकथाम के प्रति लोगों को जागरूक किया जा रहा है।

जिला चिकित्सालय बांदा में मानसिक तनाव एवं मानसिक रोग से संबंधित लोगों को काउंसलिंग, आवश्यक उपचार और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। साथ ही टेली-मानस हेल्पलाइन नंबर 14416 का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जा रहा है।

परिवार और समाज की भी जिम्मेदारी

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने कहा कि आत्महत्या की रोकथाम केवल स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार, शैक्षणिक संस्थानों, समुदाय, धार्मिक एवं सामाजिक संस्थाओं और अन्य विभागों की भी सामूहिक जिम्मेदारी है। यदि किसी व्यक्ति में लगातार उदासी, अत्यधिक तनाव, निराशा, सामाजिक दूरी, नशे की बढ़ती प्रवृत्ति या जीवन के प्रति नकारात्मक विचार दिखाई दें तो उसे अकेला न छोड़ें और तत्काल परिवार, स्वास्थ्यकर्मी या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

उन्होंने जनपदवासियों से अपील की कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाने के बजाय समय रहते सहायता लें। समय पर बातचीत, काउंसलिंग और उपचार किसी व्यक्ति का जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। संकट की स्थिति में टेली-मानस 14416 पर संपर्क किया जा सकता है।

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