गैंग बनाकर अपराध करने वालों पर कोर्ट का शिकंजा, दो दोषियों को कठोर कारावास

गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में विशेष न्यायालय ने दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास और...

Aug 18, 2026 - 18:57
Aug 18, 2026 - 19:01
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गैंग बनाकर अपराध करने वालों पर कोर्ट का शिकंजा, दो दोषियों को कठोर कारावास

बांदा। गैंगस्टर एक्ट के एक पुराने मामले में विशेष न्यायालय ने दो अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए 5-5 वर्ष के कठोर कारावास और 6-6 हजार रुपये के अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड अदा न करने पर दोनों अभियुक्तों को तीन-तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने बताया कि थाना बदौसा में 25 जून 2015 को मु0अ0सं0 74/2015 के तहत उत्तर प्रदेश गिरोहबंद एवं समाज विरोधी क्रियाकलाप (निवारण) अधिनियम, 1986 की धारा 2/3 में भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव पुत्र रामआसरे तथा लाला यादव पुत्र भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव, निवासी बरगदहा पुरवा मजरा उतरवा, थाना बदौसा, जनपद बांदा के विरुद्ध मुकदमा दर्ज किया गया था।

अभियोजन के अनुसार भुल्ली उर्फ शिवशरण यादव गिरोह का लीडर था, जबकि लाला यादव उसका सक्रिय सदस्य था। दोनों पर गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर आर्थिक एवं भौतिक लाभ के लिए आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त रहने तथा क्षेत्र में भय एवं आतंक का वातावरण उत्पन्न करने का आरोप था। मामले में अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास एवं आधारभूत मुकदमों के आधार पर गैंगचार्ट तैयार कर सक्षम प्राधिकारी से अनुमोदित कराया गया था।

विवेचना के दौरान अभियुक्तों के आपराधिक इतिहास, गैंगचार्ट, एफआईआर, तहरीर, अभियोजन स्वीकृति सहित अन्य अभिलेखीय साक्ष्य संकलित किए गए। विवेचना पूर्ण होने के बाद न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया। न्यायालय ने 11 नवंबर 2016 को दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप निर्धारित किए।

मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल 5 मौखिक गवाहों को परीक्षित कराया गया। इनमें एफआईआर लेखक, वादी मुकदमा, उपनिरीक्षक एवं तथ्य साक्षी शामिल रहे। इसके साथ ही गैंगचार्ट, प्रथम सूचना रिपोर्ट, तहरीर, आरोपपत्र एवं अभियोजन स्वीकृति सहित महत्वपूर्ण दस्तावेजी साक्ष्य न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए गए।

विशेष लोक अभियोजक गैंगस्टर एक्ट सौरभ सिंह ने अभियोजन की ओर से प्रभावी पैरवी करते हुए न्यायालय के समक्ष मौखिक एवं दस्तावेजी साक्ष्यों के आधार पर अभियुक्तों की संलिप्तता को प्रमाणित किया। अभियोजन ने तर्क दिया कि अभियुक्त गिरोह बनाकर आपराधिक गतिविधियों के माध्यम से आर्थिक एवं भौतिक लाभ अर्जित करने तथा क्षेत्र में भय का वातावरण उत्पन्न करने में संलिप्त थे।

18 अगस्त 2026 को विशेष न्यायाधीश (गैंगस्टर एक्ट)/अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश, बांदा श्रीपाल सिंह ने दोनों अभियुक्तों को दोषी करार देते हुए धारा 3 गैंगस्टर एक्ट के तहत 5-5 वर्ष के कठोर कारावास एवं 6-6 हजार रुपये के अर्थदंड से दंडित किया।

अर्थदंड जमा न करने की स्थिति में प्रत्येक अभियुक्त को तीन-तीन माह का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

मामले में पैरोकार पुष्पेंद्र कुमार, कोर्ट मुहर्रिर रघुनाथ मौर्य तथा विशेष लोक अभियोजक सौरभ सिंह द्वारा प्रभावी पैरवी एवं अभियोजन संबंधी कार्यवाही में समन्वय किया गया। अभियोजन के अनुसार समयबद्ध रूप से साक्षियों का परीक्षण कराने तथा मौखिक एवं अभिलेखीय साक्ष्यों को प्रभावी ढंग से न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत किए जाने के परिणामस्वरूप दोनों अभियुक्तों के विरुद्ध आरोप सिद्ध हुए और न्यायालय ने उन्हें सजा सुनाई।

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